कोरबा का 200 साल पुराना कनकेश्वर महादेव मंदिर, जहां भगवान शिव ने ग्वाले को दिए थे दर्शन
कोरबा जिले का कनकेश्वर महादेव मंदिर लगभग 200 वर्ष पुराना ऐतिहासिक शिवालय है। यहां स्थापित स्वयंभू शिवलिंग, ग्वाले बैजू यादव को भगवान शिव के दर्शन की लोककथा और 18 पीढ़ियों से जारी पूजा-अर्चना इसे धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बनाती है। मंदिर के समीप स्थित कनकी प्रवासी पक्षी धाम इसे धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन का अनूठा संगम बनाता है।
UNITED NEWS OF ASIA. राहुल गुप्ता, कोरबा l छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्थित कनकेश्वर महादेव मंदिर धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य का ऐसा अद्भुत संगम है, जो हर वर्ष हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। लगभग 200 वर्ष पुराने इस मंदिर की पहचान केवल इसकी प्राचीनता तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां स्थापित स्वयंभू शिवलिंग और उससे जुड़ी लोकमान्यताओं ने इसे पूरे क्षेत्र में विशेष स्थान दिलाया है। श्रावण मास, महाशिवरात्रि और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं का विशाल जनसमूह भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचता है। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना यहां अवश्य स्वीकार होती है।
कनकेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण तत्कालीन जमींदार परिवार द्वारा कराया गया था। लगभग 50 फीट ऊंचा यह भव्य मंदिर उस समय की उत्कृष्ट स्थापत्य कला का जीवंत उदाहरण माना जाता है। मंदिर की संरचना, इसकी मजबूत दीवारें और पारंपरिक वास्तुकला आज भी लोगों को उस दौर की कला और शिल्पकला की याद दिलाती हैं। वर्षों बीत जाने के बाद भी मंदिर की भव्यता और धार्मिक महत्व में कोई कमी नहीं आई है। समय-समय पर इसका संरक्षण और मरम्मत की जाती रही है, जिससे इसकी ऐतिहासिक पहचान सुरक्षित बनी हुई है