एफआईआर दर्ज नहीं होने पर पीड़ित पहुंचा गृहमंत्री कार्यालय, निष्पक्ष जांच की लगाई गुहार

कबीरधाम जिले के पंडरिया थाना क्षेत्र के एक ग्रामीण ने मारपीट, घर में घुसकर हमला, मोबाइल छीनने और जान से मारने की धमकी के मामले में एफआईआर दर्ज नहीं होने का आरोप लगाया है। थाने में कार्रवाई नहीं होने पर पीड़ित ने गृहमंत्री कार्यालय पहुंचकर निष्पक्ष जांच और एफआईआर दर्ज कराने की मांग की।

Jul 21, 2026 - 16:18
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एफआईआर दर्ज नहीं होने पर पीड़ित पहुंचा गृहमंत्री कार्यालय, निष्पक्ष जांच की लगाई गुहार

UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा l कबीरधाम जिले के पंडरिया थाना क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें एक ग्रामीण ने पुलिस पर शिकायत दर्ज होने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं करने का आरोप लगाया है। थाने में कार्रवाई नहीं होने से निराश पीड़ित ने अब गृहमंत्री कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है और मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

जानकारी के अनुसार, पंडरिया थाना क्षेत्र के ग्राम अमलडीहा निवासी संतोष साहू का आरोप है कि 20 जुलाई 2026 को उनके घर में घुसकर कुछ लोगों ने उनके परिवार के साथ मारपीट की। शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने लाठी-डंडों से हमला किया, गाली-गलौज की, जान से मारने की धमकी दी और उनका मोबाइल भी छीन लिया। घटना में परिवार के सदस्यों को चोटें आने का भी दावा किया गया है।

पीड़ित का कहना है कि घटना के तुरंत बाद उन्होंने पंडरिया थाना पहुंचकर पूरे मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में गांव के नौ लोगों को आरोपी बनाया गया है। हालांकि, उनका आरोप है कि शिकायत दिए जाने के बाद भी थाना पुलिस ने अब तक प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज नहीं की है।

संतोष साहू के अनुसार, बार-बार थाना जाने के बावजूद उन्हें केवल आश्वासन दिया गया, लेकिन कानूनी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी। पुलिस की ओर से कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्होंने मंगलवार को गृहमंत्री कार्यालय पहुंचकर पूरे मामले की जानकारी दी और न्याय दिलाने की मांग की।

पीड़ित ने गृहमंत्री कार्यालय को दिए गए आवेदन में मांग की है कि मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित आरोपियों के विरुद्ध कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो उन्हें और उनके परिवार को जान-माल का खतरा बना रह सकता है।

ग्रामीण का कहना है कि कानून सभी नागरिकों को समान सुरक्षा और न्याय का अधिकार देता है। ऐसे में गंभीर आरोपों के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं होना चिंता का विषय है। उन्होंने प्रशासन से अपेक्षा जताई है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

फिलहाल इस मामले में पंडरिया थाना पुलिस या जिला पुलिस प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। साथ ही, पीड़ित द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि भी अभी नहीं हो सकी है। पुलिस का पक्ष सामने आने और जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

यह मामला फिलहाल शिकायतकर्ता के आरोपों पर आधारित है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और क्या मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जाती है।