जल जीवन मिशन से बदली अमलीपारा की तस्वीर, अब घर के आंगन में पहुंच रही नल की धार
कोरबा विकासखंड की ग्राम पंचायत गिरारी के आश्रित ग्राम अमलीपारा में जल जीवन मिशन के तहत घर-घर नल कनेक्शन पहुंचने से ग्रामीणों की वर्षों पुरानी पेयजल समस्या कम हुई है। पहले गर्मी के मौसम में ग्रामीणों को ढोढ़ी से पानी लाने के लिए काफी समय और मेहनत करनी पड़ती थी। भारत लोहार और सुनीता लोहार सहित ग्रामीणों का कहना है कि घर तक नल का पानी पहुंचने से समय और श्रम की बचत हो रही है तथा रोजमर्रा की जिंदगी आसान हुई है।
UNITED NEWS OF ASIA. कोरबा l कोरबा जिले के कोरबा विकासखंड की ग्राम पंचायत गिरारी के आश्रित ग्राम अमलीपारा में जल जीवन मिशन के तहत घर-घर नल कनेक्शन पहुंचने से ग्रामीणों की जिंदगी में बदलाव आया है। कुछ समय पहले तक गर्मी का मौसम शुरू होते ही गांव में पानी की समस्या बढ़ जाती थी। ग्रामीणों को घरेलू जरूरतों के लिए ढोढ़ी से पानी लाना पड़ता था। पानी जुटाने में परिवार के सदस्यों का काफी समय और श्रम खर्च होता था, लेकिन अब घर के आंगन में नल की धार पहुंचने से यह परेशानी काफी हद तक कम हुई है।
अमलीपारा में रहने वाले भारत लोहार और उनकी पत्नी सुनीता लोहार के लिए घर तक पानी पहुंचना रोजमर्रा की जिंदगी में बड़ा बदलाव है। भारत लोहार का पारंपरिक काम लोहे को गर्म कर उसे आकार और धार देना है। इसके लिए उन्हें दिनभर भट्ठी की आग के सामने मेहनत करनी पड़ती है। भारत लोहार बताते हैं कि गर्मी के दिनों में आग के सामने काम करना उनके काम का हिस्सा है, लेकिन पानी की समस्या उनके लिए अलग तरह की परेशानी खड़ी करती थी। पहले घरेलू जरूरतों के लिए ढोढ़ी से पानी लाने में काफी समय लग जाता था और कई बार पानी की व्यवस्था करने के लिए काम भी प्रभावित होता था।
अब घर में नल कनेक्शन होने के बाद भारत लोहार को पानी के लिए दूर जाने की जरूरत नहीं पड़ती। उनका कहना है कि घर के आंगन में पानी उपलब्ध होने से समय की बचत हो रही है और रोजमर्रा के काम भी पहले की तुलना में आसान हो गए हैं। पानी की सुविधा ने उनके परिवार की दिनचर्या को बेहतर बनाने में मदद की है।
सुनीता लोहार बताती हैं कि पहले गर्मी के मौसम में पानी जुटाना परिवार की बड़ी चिंता होती थी। सुबह और शाम पानी लाने में काफी समय निकल जाता था। कई बार परिवार के अन्य सदस्यों को भी पानी की व्यवस्था में सहयोग करना पड़ता था। अब घर में नल से पानी मिलने के कारण बाहर जाकर पानी लाने की जरूरत नहीं पड़ती। नियमित पानी मिलने से घरेलू काम समय पर पूरे करने में भी सुविधा हो रही है।
अमलीपारा के अन्य ग्रामीणों के अनुसार बारिश और दूसरे मौसम में पानी की समस्या अपेक्षाकृत कम रहती थी, लेकिन गर्मी के दिनों में ढोढ़ी पर निर्भरता बढ़ जाती थी। पानी के लिए दूरी तय करने से ग्रामीणों का समय और श्रम दोनों खर्च होते थे। घर-घर नल कनेक्शन पहुंचने के बाद इस परेशानी में कमी आई है। खासतौर पर महिलाओं को पानी लाने में लगने वाले अतिरिक्त समय से राहत मिली है।
जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण परिवारों तक नल से जल पहुंचाने के प्रयासों का असर अमलीपारा जैसे दूरस्थ गांवों में भी दिखाई दे रहा है। घर तक पानी पहुंचने से ग्रामीणों के लिए केवल पेयजल की सुविधा ही नहीं बढ़ी, बल्कि पानी जुटाने में लगने वाला समय और श्रम भी कम हुआ है। अमलीपारा के ग्रामीणों के लिए नल से आती पानी की धार सुविधा के साथ-साथ रोजमर्रा के जीवन में बदलाव का प्रतीक बन गई है।