श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिन इन्द्रेश महाराज ने बताया भगवान के तीन रूपों का महात्म्य

रायपुर में श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिन इन्द्रेश महाराज ने भगवान के सत्य, चैतन्य और आनंद स्वरूप की व्याख्या की। कथा से पहले निकली मंगल कलश यात्रा में 5 हजार से अधिक महिलाएं शामिल हुईं।

Sep 23, 2026 - 13:32
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श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिन इन्द्रेश महाराज ने बताया भगवान के तीन रूपों का महात्म्य

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर। कृषि उपज मंडी देवेन्द्रनगर मैदान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिवस व्यासपीठ से इन्द्रेश महाराज ने भगवान के तीन स्वरूप सत्य, चैतन्य और आनंद की व्याख्या की। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि रायपुर में कथा को लेकर श्रद्धालुओं में जो उत्साह दिखाई दे रहा है, वह निरंतर बढ़ता रहेगा। उन्होंने श्रद्धालुओं से कथा श्रवण के साथ भगवान के प्रति प्रेम, भक्ति और समर्पण की भावना बनाए रखने का संदेश दिया।

श्रीमद्भागवत कथा के महात्म्य पर प्रकाश डालते हुए इन्द्रेश महाराज ने कहा कि भगवान का पहला स्वरूप सत्य है। जीवन में जो प्राप्त हो रहा है और जो नहीं मिल रहा, उसके प्रति अधिक चिंता करने के बजाय परिस्थितियों को स्वीकार करते हुए भगवान के प्रति समर्पण रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि मनुष्य अक्सर भगवान से अपनी इच्छाओं के अनुसार कार्य करने की प्रार्थना करता है, जबकि भक्ति का भाव भगवान की शरण स्वीकार करने में है।

उन्होंने भगवान के दूसरे स्वरूप चैतन्य की व्याख्या करते हुए कहा कि प्रभु जड़ नहीं, बल्कि चैतन्य स्वरूप हैं। भगवान के प्रति चैतन्य भाव और विवेक के साथ भक्ति करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति सत्य और चैतन्य को समझ ले तो आनंद की अनुभूति स्वतः होने लगती है। उन्होंने सुख और आनंद के बीच अंतर बताते हुए कहा कि सांसारिक वस्तुओं से मिलने वाला सुख सीमित हो सकता है, जबकि भगवान के प्रति प्रेम, भक्ति और समर्पण से मिलने वाला आनंद अलग स्वरूप का होता है।

इन्द्रेश महाराज ने भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और त्याग के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भक्ति के मार्ग पर चलने से जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता बढ़ती है। उन्होंने विवेकयुक्त ज्ञान, आसक्ति से दूरी और परिस्थितियों को सहन करने की आदत को आवश्यक बताया। साथ ही उन्होंने सात्विकता, सनातन परंपरा, कथा और भजन से दूर करने वाले वातावरण एवं प्रवृत्तियों से दूरी बनाने की बात कही।

कथा स्थल पर भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा, बलभद्र और सुदर्शन जी के स्वरूप भी विराजमान हैं। इन्द्रेश महाराज ने श्रद्धालुओं से भगवान जगन्नाथ के साथ सुदर्शन जी के दर्शन करने का आग्रह किया। उन्होंने कलियुग में अपराध और उसके बाद सुधार की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यक्ति को अपनी गलतियों से सीखकर आगे उन्हें दोहराने से बचना चाहिए।

कथा प्रारंभ होने से पहले श्रीराम जानकी मंदिर, कृषि उपज मंडी के सामने देवेन्द्रनगर से भव्य मंगल कलश यात्रा निकाली गई। आयोजन समिति के अनुसार 2100 महिलाओं की कलश यात्रा प्रस्तावित थी, लेकिन श्रद्धालुओं के उत्साह के कारण 5 हजार से अधिक महिलाएं इसमें शामिल हुईं। कलशधारी महिलाएं पीली साड़ी में शामिल हुईं, जबकि जजमान परिवार श्रीमद्भागवत पुराण को सिर पर धारण कर यात्रा में आगे चल रहा था।

भक्ति उद्घोष, जयकारों, बाजे-गाजे और पुष्पवर्षा के बीच कलश यात्रा कथा स्थल तक पहुंची। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता से पूरा वातावरण भक्तिमय रहा। आयोजन के दौरान प्रतिदिन भगवान के विभिन्न श्रृंगार के साथ दर्शन की व्यवस्था की गई है।