नरक चतुर्दशी 2026: छोटी दिवाली की रात इन 5 चीजों की धूनी देने की है परंपरा, जानें धार्मिक महत्व और विधि

नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन घर में दीपदान, पूजा-पाठ और शुद्धि से जुड़े कार्य किए जाते हैं। मान्यता है कि छोटी दिवाली की रात काली राई, पीली सरसों, काले तिल, खड़ा नमक और कपूर की धूनी देने से घर में सकारात्मकता और सुख-शांति का वातावरण बनता है। जानिए इन पांच सामग्रियों का धार्मिक महत्व और धूनी देने की पारंपरिक विधि।

Nov 7, 2026 - 13:06
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नरक चतुर्दशी 2026: छोटी दिवाली की रात इन 5 चीजों की धूनी देने की है परंपरा, जानें धार्मिक महत्व और विधि

UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली। दिवाली के पांच दिवसीय महापर्व में नरक चतुर्दशी का विशेष धार्मिक महत्व है। इसे छोटी दिवाली और रूप चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। वर्ष 2026 में छोटी दिवाली 7 नवंबर, शनिवार को मनाई जा रही है। पंचांग के अनुसार कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर को सुबह 10:48 बजे से शुरू होकर 8 नवंबर को सुबह 11:28 बजे तक रहेगी।

इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा, यमराज के निमित्त दीपदान और घर की साफ-सफाई एवं शुद्धि से जुड़े धार्मिक कार्य किए जाते हैं। मान्यता है कि इस दिन विशेष पूजा-पाठ और दीपदान करने से परिवार में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है।

नरक चतुर्दशी का पौराणिक महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार नरक चतुर्दशी के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध कर हजारों बंदियों को मुक्त कराया था। इसी विजय की स्मृति में यह पर्व मनाया जाता है। इस दिन घरों में दीपक जलाने और नकारात्मकता दूर करने के उद्देश्य से पारंपरिक धार्मिक उपाय किए जाते हैं।

धार्मिक परंपरा में छोटी दिवाली की रात पांच विशेष सामग्रियों की धूनी देने का भी उल्लेख मिलता है। इनमें काली राई, पीली सरसों, खड़ा नमक, काले तिल और कपूर शामिल हैं।

इन पांच चीजों का है विशेष धार्मिक महत्व

1. काली राई: काली राई का उपयोग पारंपरिक रूप से नजर दोष और नकारात्मक प्रभावों से बचाव से जुड़े धार्मिक उपायों में किया जाता है। मान्यता है कि इससे घर का वातावरण शुद्ध होता है।

2. पीली सरसों: पीली सरसों को घर की शुद्धि और बाधाओं से मुक्ति से जुड़े पारंपरिक धार्मिक प्रयोगों में शामिल किया जाता है। इसका उपयोग कई धार्मिक अनुष्ठानों में भी होता है।

3. खड़ा नमक: नमक को शुद्धता का प्रतीक माना जाता है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार खड़े नमक का उपयोग घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखने के उद्देश्य से किया जाता है।

4. काले तिल: काले तिल का संबंध शनिदेव और पितरों से माना जाता है। पूजा-पाठ, तर्पण और धार्मिक अनुष्ठानों में इनका विशेष महत्व है।

5. कपूर: हिंदू धर्म में कपूर का विशेष स्थान है। आरती और पूजा-पाठ के दौरान कपूर जलाने की परंपरा है। इसे पवित्रता और शुभता का प्रतीक माना जाता है।

छोटी दिवाली की रात कैसे दें पांच चीजों की धूनी?

पारंपरिक विधि के अनुसार मिट्टी या लोहे के सुरक्षित पात्र में काली राई, पीली सरसों, खड़ा नमक और काले तिल थोड़ी-थोड़ी मात्रा में मिलाए जाते हैं। इसके बाद कपूर का उपयोग करके धार्मिक धूनी देने की परंपरा है।

इस दौरान घर में दीपक जलाकर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस परंपरा का उद्देश्य घर से नकारात्मक प्रभावों को दूर करना और परिवार में सुख-शांति, स्वास्थ्य एवं समृद्धि की कामना करना है।

बरतें जरूरी सावधानी

धार्मिक परंपराओं का पालन करते समय सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है। कपूर और अन्य ज्वलनशील सामग्रियों का उपयोग सुरक्षित स्थान पर करें। धूनी के दौरान आग को कभी अकेला न छोड़ें और बंद कमरे में धुआं न फैलाएं। घर में बच्चों और पालतू जानवरों को आग से दूर रखें।