हुडको जगदंबा मंदिर में भव्य पार्थिव शिवलिंग महारुद्राभिषेक, महिलाओं की उमड़ी आस्था
सावन माह में दुर्ग के हुडको स्थित जगदंबा मंदिर में पार्थिव शिवलिंग महारुद्राभिषेक का भव्य आयोजन हुआ। बड़ी संख्या में महिलाओं ने भगवान शिव का पूजन-अर्चन कर परिवार और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की।
UNITED NEWS OF ASIA. भारती कौर, दुर्ग l सावन माह के पावन अवसर पर दुर्ग के हुडको स्थित जगदंबा मंदिर में मंगलवार को भव्य पार्थिव शिवलिंग महारुद्राभिषेक का आयोजन श्रद्धा, भक्ति और वैदिक परंपरा के साथ संपन्न हुआ। इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, विशेष रूप से महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और भगवान भोलेनाथ का विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर परिवार, समाज और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की।
कार्यक्रम में भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष स्वीटी कौशिक तथा श्री राम कथा समिति के सचिव डॉ. वी.एस. राव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। दोनों अतिथियों ने भगवान शिव का अभिषेक और पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि सावन माह में आयोजित ऐसे धार्मिक अनुष्ठान समाज में आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक एकता को मजबूत करने का कार्य करते हैं।
आयोजन का नेतृत्व हुडको गुप्ता समाज की जोन अध्यक्ष ने किया। उनके आमंत्रण पर दुर्ग, रायपुर, रिसाली, पावर हाउस, सेक्टर-2, सेक्टर-4, सेक्टर-6, बोरसी, विजय नगर, हुडको, सिकोला भाटा और कोहका सहित विभिन्न क्षेत्रों से समाज की महिलाओं ने बड़ी संख्या में सहभागिता की। महिलाओं ने पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर वैदिक विधि से महारुद्राभिषेक किया और भगवान शिव से परिवार की खुशहाली, उत्तम स्वास्थ्य और जीवन में सुख-समृद्धि की प्रार्थना की।
पूरे मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार, शिव भजनों और 'हर-हर महादेव' के जयघोष से भक्तिमय वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया। मंदिर परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला।
आयोजन को सफल बनाने में समाज की महिलाओं और स्वयंसेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सभी व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित किया गया, जिससे श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना में किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई। कार्यक्रम के समापन पर सभी श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।
सावन माह में आयोजित इस धार्मिक आयोजन ने न केवल श्रद्धालुओं की आस्था को मजबूत किया, बल्कि सामाजिक समरसता और सामूहिक सहभागिता का भी संदेश दिया। बड़ी संख्या में महिलाओं की उपस्थिति ने यह साबित किया कि धार्मिक परंपराओं के संरक्षण और सांस्कृतिक मूल्यों को आगे बढ़ाने में समाज की सक्रिय भागीदारी निरंतर बनी हुई है।