छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्र्य अधिनियम-2026 सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा की दिशा में अहम कदम : अमरजीत सिंह छाबड़ा

छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा ने छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्र्य अधिनियम-2026 का स्वागत करते हुए कहा कि यह कानून अवैध धर्मांतरण पर रोक लगाने और धार्मिक स्वतंत्रता, सामाजिक सौहार्द तथा संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम है।

Jul 19, 2026 - 11:07
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छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्र्य अधिनियम-2026 सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा की दिशा में अहम कदम : अमरजीत सिंह छाबड़ा

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ राज्य में लागू किए गए छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्र्य अधिनियम-2026 का स्वागत करते हुए छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा ने इसे सामाजिक सौहार्द, धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया है। उन्होंने कहा कि यह कानून किसी भी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि जबरन, प्रलोभन, कपट, धोखाधड़ी या अन्य अनुचित तरीकों से किए जाने वाले अवैध धर्मांतरण पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से बनाया गया है।

अमरजीत सिंह छाबड़ा ने कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी इच्छा और आस्था के अनुसार किसी भी धर्म को मानने, उसका पालन करने और उसका प्रचार-प्रसार करने का अधिकार देता है। लेकिन यदि किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन भय, दबाव, लालच, छल या अन्य अवैध माध्यमों से कराया जाता है, तो यह संविधान की मूल भावना के विपरीत है और सामाजिक समरसता तथा कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकता है।

उन्होंने कहा कि नए अधिनियम में धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और विधिसम्मत बनाया गया है। इससे वास्तविक धार्मिक स्वतंत्रता सुरक्षित रहेगी और अवैध एवं संगठित धर्मांतरण की गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा। उनका कहना है कि यह कानून सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान की भावना को मजबूत करेगा तथा समाज में आपसी विश्वास और सौहार्द को बढ़ावा देगा।

अमरजीत सिंह छाबड़ा ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार ने जनभावनाओं और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम विशेष रूप से समाज के कमजोर और संवेदनशील वर्गों के हितों की रक्षा करने में सहायक होगा तथा कानून के शासन को और अधिक प्रभावी बनाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में धार्मिक स्वतंत्रता और कानून का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। नए कानून के माध्यम से ऐसे मामलों में स्पष्ट कानूनी प्रक्रिया तय होने से अनावश्यक विवादों में कमी आएगी और यदि कहीं शिकायतें सामने आती हैं तो उनका विधिसम्मत समाधान संभव हो सकेगा।

अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष ने विश्वास जताया कि छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्र्य अधिनियम-2026 प्रदेश में सामाजिक समरसता, धार्मिक सद्भाव और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने सभी नागरिकों से कानून का सम्मान करने और आपसी भाईचारे, शांति तथा सौहार्द बनाए रखने की अपील भी की।