शिक्षा का उद्देश्य बेहतर इंसान बनाना, केवल डिग्री नहीं: बृजमोहन अग्रवाल

रायपुर में गुरु पूर्णिमा पर आयोजित सम्मान समारोह में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने शिक्षकों का सम्मान करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री दिलाना नहीं, बल्कि बेहतर इंसान बनाना है। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और संस्कारों पर ध्यान देने का आग्रह किया।

Aug 2, 2026 - 13:54
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शिक्षा का उद्देश्य बेहतर इंसान बनाना, केवल डिग्री नहीं: बृजमोहन अग्रवाल

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l गुरु पूर्णिमा के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी शिक्षा प्रकोष्ठ, जिला रायपुर द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल शामिल हुए। इस दौरान शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले वरिष्ठ एवं सेवानिवृत्त शिक्षकों, युवा अध्यापकों तथा मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा, संस्कार और गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर विशेष जोर दिया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि बेहतर इंसान बनाना है। उन्होंने कहा कि माता-पिता जीवन के प्रथम शिक्षक होते हैं और उसके बाद विद्यालय में शिक्षक बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने अपने गुरुजनों को याद करते हुए कहा कि आज उन्हें उन शिक्षकों का सम्मान करने का अवसर मिला, जिन्होंने उनके जीवन को दिशा दी और समाज सेवा के योग्य बनाया।

उन्होंने ज्ञान और शिक्षा के अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि केवल विषयों की जानकारी देना ज्ञान है, जबकि शिष्टाचार, अनुशासन, बड़ों का सम्मान, नैतिक मूल्यों की समझ और सही-गलत का विवेक विकसित करना वास्तविक शिक्षा है। उनके अनुसार शिक्षक की जिम्मेदारी केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनाना भी है।

बृजमोहन अग्रवाल ने शिक्षकों से विद्यार्थियों के साथ आत्मीय और विश्वासपूर्ण संबंध बनाने की अपील की, ताकि बच्चे अपनी समस्याएं और भावनाएं खुलकर साझा कर सकें। उन्होंने सेवानिवृत्त शिक्षकों से भी आग्रह किया कि वे समय-समय पर विद्यालयों में जाकर नए शिक्षकों और विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते रहें।

विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में धैर्य, अनुशासन और सादगी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी हैं। उन्होंने कहा कि माता-पिता और शिक्षक यदि किसी बात पर रोक-टोक या डांटते हैं, तो उसके पीछे बच्चों का हित छिपा होता है। विद्यार्थियों को दिखावे और अनावश्यक प्रतिस्पर्धा से दूर रहकर पढ़ाई, संस्कार और व्यक्तित्व विकास पर ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि सामान्य उच्च शिक्षा के लिए अनावश्यक रूप से दूसरे शहरों या विदेशों में जाकर परिवार पर आर्थिक बोझ डालने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि छत्तीसगढ़ में भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हैं। विशेष और उन्नत तकनीकी पाठ्यक्रमों के लिए ही बाहर जाने की जरूरत होती है, जिसमें सरकार और बैंक भी सहयोग करते हैं।

कार्यक्रम में राजेश मूणत, पुरंदर मिश्रा, मोतीलाल साहू, कांतिलाल जैन, सूर्यकांत राठौर, अभिषेक अग्रवाल, अंबर अग्रवाल, सचिन मेघानी सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, विद्यार्थी, अभिभावक और शिक्षा प्रकोष्ठ के पदाधिकारी उपस्थित रहे। समारोह में गुरु-शिष्य परंपरा के सम्मान और मूल्य आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने का संकल्प भी दोहराया गया।