बोड़ला नगर पंचायत के करोड़ों के निर्माण कार्यों पर सवाल, कमीशनखोरी और घटिया निर्माण के आरोप

बोड़ला नगर पंचायत में करोड़ों रुपये के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं। स्थानीय नागरिकों ने इंजीनियर-ठेकेदार की मिलीभगत, घटिया निर्माण और कमीशनखोरी के आरोप लगाते हुए स्वतंत्र तकनीकी जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

Jul 19, 2026 - 16:47
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बोड़ला नगर पंचायत के करोड़ों के निर्माण कार्यों पर सवाल, कमीशनखोरी और घटिया निर्माण के आरोप

UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा l कबीरधाम जिले के बोड़ला नगर पंचायत में अधोसंरचना मद से कराए जा रहे करोड़ों रुपये के निर्माण कार्यों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। स्थानीय नागरिकों और कुछ जनप्रतिनिधियों ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाते हुए इंजीनियर और ठेकेदार की कथित मिलीभगत से कमीशनखोरी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनाए जा रहे कई निर्माण कार्य शुरुआत से ही गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं।

आरोपों के अनुसार नगर पंचायत क्षेत्र में वार्ड क्रमांक 10 स्थित हिंदू संगम परिसर सहित विभिन्न स्थानों पर आरसीसी नाली-नाला, सामुदायिक भवन, सार्वजनिक शौचालय, कलवर्ट, प्रवेश द्वार, ओवरहेड टैंक, हॉल और अन्य अधोसंरचनात्मक निर्माण कार्य जारी हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इन परियोजनाओं में स्वीकृत इस्टीमेट और निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है तथा घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग किया जा रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से समझौता किया गया तो इससे सरकारी धन की बर्बादी होगी और भविष्य में इन परियोजनाओं की उपयोगिता भी प्रभावित होगी। उनका आरोप है कि तकनीकी निगरानी की कमी के कारण ठेकेदार मनमाने तरीके से कार्य कर रहे हैं, जबकि संबंधित अधिकारी प्रभावी निरीक्षण नहीं कर रहे हैं। इससे निर्माण कार्यों में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की आशंका बढ़ रही है।

नागरिकों ने मांग की है कि नगर पंचायत में चल रहे सभी निर्माण कार्यों की स्वतंत्र तकनीकी टीम से निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि जांच में अनियमितता, घटिया निर्माण या वित्तीय गड़बड़ी की पुष्टि होती है तो संबंधित इंजीनियर, ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने और जांच पूरी होने तक निर्माण कार्यों के भुगतान पर रोक लगाने की भी मांग की गई है।

स्थानीय नागरिकों का मानना है कि सार्वजनिक धन से किए जाने वाले विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उनका कहना है कि यदि समय रहते निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच नहीं हुई तो भविष्य में इन परियोजनाओं की मरम्मत पर अतिरिक्त सरकारी धन खर्च करना पड़ सकता है।

फिलहाल इस मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज है और लोगों की नजर जिला प्रशासन एवं शासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शिकायतों के आधार पर संबंधित विभाग तकनीकी जांच कराता है या नहीं। यदि जांच होती है तो उससे निर्माण कार्यों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी और आरोपों की पुष्टि अथवा खंडन हो सकेगा।