वैदिक संस्कृति और सनातन परंपरा के संरक्षण का संकल्प लेकर पोर्ट ब्लेयर पहुंचे भिलाई के आर्य समाजी
भिलाई के आर्य समाजियों ने आचार्य डॉ. अजय आर्य के नेतृत्व में अंडमान-निकोबार के पोर्ट ब्लेयर स्थित आर्य समाज में वैदिक यज्ञ का आयोजन किया। इस दौरान वैदिक संस्कृति, सनातन परंपराओं, नैतिक मूल्यों और मानव कल्याण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम में वैदिक विचारधारा के प्रचार-प्रसार, आर्य समाज के संगठनात्मक सुदृढ़ीकरण और नई पीढ़ी को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने पर जोर दिया गया।
UNITED NEWS OF ASIA. रोहितास सिंह भुवाल, भिलाई l वैदिक संस्कृति, सनातन परंपरा और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार का संकल्प लेकर भिलाई के आर्य समाजियों ने अंडमान-निकोबार के पोर्ट ब्लेयर स्थित आर्य समाज में वैदिक यज्ञ का आयोजन किया। आचार्य डॉ. अजय आर्य के नेतृत्व में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से यज्ञ में आहुतियां अर्पित कीं और विश्व कल्याण, सामाजिक सद्भाव तथा मानव मात्र के सुख-समृद्धि की कामना की। अंडमान-निकोबार की धरती पर वैदिक परंपराओं के प्रचार-प्रसार में सहभागी बनना सभी के लिए आध्यात्मिक आनंद और प्रेरणा का अवसर रहा।
आचार्य डॉ. अजय आर्य ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आर्य समाज की वैदिक विचारधारा भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। वेदों का ज्ञान, यज्ञ की परंपरा, नैतिक जीवन-मूल्य और मानव कल्याण की भावना भारतीय सांस्कृतिक पहचान के महत्वपूर्ण आधार हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में आवश्यकता है कि आर्य समाज का प्रत्येक कार्यकर्ता अपनी वैदिक विरासत के प्रति गौरव, संगठन के प्रति समर्पण और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना के साथ कार्य करे। आर्य समाज का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन करना नहीं, बल्कि वैदिक ज्ञान के माध्यम से व्यक्ति, परिवार और समाज के जीवन को बेहतर बनाना भी है।
उन्होंने आह्वान किया कि सनातन परंपराओं और भारतीय संस्कृति के संरक्षण के लिए वैदिक विचारों को अपने व्यवहार और जीवनशैली में अपनाया जाए। साथ ही नई पीढ़ी को अपनी गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक परंपराओं से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएं। उनके अनुसार, संस्कृति का वास्तविक संरक्षण तभी संभव है, जब उसके श्रेष्ठ आदर्शों को जीवन में उतारा जाए और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जाए।
कार्यक्रम में संजय चतुर्वेदी, दिनेश कुमार पटेल और आशुतोष सिंह ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने वैदिक संस्कृति और सनातन परंपराओं के संरक्षण के साथ आर्य समाज के संगठनात्मक सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय संस्कृति की शक्ति उसके उदात्त विचारों, नैतिक मूल्यों, आध्यात्मिक चेतना और मानव कल्याण की भावना में निहित है। यज्ञ में डॉ. मृदुला चतुर्वेदी और अक्षत आर्यांश ने भी सहभागिता की।
इस अवसर पर आर्य समाज के प्रधान आर.पी. यादव को आचार्य चंद्रशेखर शास्त्री और डॉ. अजय आर्य द्वारा लिखित पुस्तक 'गायत्री मंत्र के साधना सूत्र' भेंट की गई। वहीं आर्य समाज के मंत्री पंकज वैद्य को गायत्री मंत्र के पंपलेट प्रदान किए गए, ताकि वैदिक धर्म, गायत्री मंत्र र भारतीय संस्कृति से जुड़े संदेश को अधिकाधिक लोगों तक पहुंचाया जा सके।
कार्यक्रम में वैदिक प्रचारक आचार्य आनंद पुरुषार्थी के अंडमान में वेद प्रचार के लिए दिए गए योगदान को भी स्मरण किया गया। उनके योगदान का उल्लेख करते हुए वैदिक विचारधारा के प्रसार में निरंतर प्रयासों के महत्व को रेखांकित किया गया।
यह आयोजन वैदिक संस्कृति के प्रचार-प्रसार, आर्य समाज की गतिविधियों को मजबूत करने और भारतीय आध्यात्मिक विरासत को व्यापक स्तर पर पहुंचाने की दिशा में एक प्रेरक पहल रहा। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि संस्कृति का संरक्षण केवल अतीत की उपलब्धियों को याद करने से नहीं, बल्कि उसके श्रेष्ठ आदर्शों को अपनाने और समाज में उनका प्रसार करने से होता है। वैदिक ज्ञान, यज्ञ परंपरा, नैतिक मूल्यों और मानव कल्याण की भावना को जन-जन तक पहुंचाना ही इस पहल का प्रमुख उद्देश्य रहा।