अभिजीत दीपके की बढ़ीं मुश्किलें, दिल्ली पुलिस ने BNSS की धारा 126/170 के तहत की कार्रवाई, SEM कोर्ट में होगी पेशी
नई दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली पुलिस ने ‘लहरा दो तिरंगा’ अभियान से पहले उन्हें हिरासत में लिया था। पुलिस ने शांति भंग होने की आशंका के मद्देनजर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई शुरू की है। अभिजीत दीपके को विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत में पेश किया जाना है। वहीं, AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को पुलिस ने औपचारिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद रिहा कर दिया है।
UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। दिल्ली पुलिस ने ‘लहरा दो तिरंगा’ अभियान से पहले उन्हें हिरासत में लिया था। अब पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई शुरू की है। पुलिस के अनुसार, शांति भंग होने या किसी संभावित टकराव की आशंका को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अभिजीत दीपके को 17 अक्टूबर को विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत में पेश किया जाना था, जहां मामले में आगे की कार्रवाई पर निर्णय होना है।
CJP का ‘लहरा दो तिरंगा’ अभियान दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में आयोजित करने की योजना थी। अभियान को लेकर पुलिस और आयोजकों के बीच अनुमति तथा कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दे सामने आए। पुलिस ने संभावित भीड़ और टकराव की आशंका को देखते हुए एहतियाती कदम उठाए। इसी क्रम में 16 अक्टूबर की शाम अभिजीत दीपके और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को हिरासत में लिया गया था।
BNSS की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई
दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दीपके के खिलाफ BNSS की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई शुरू की है। धारा 126 शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा संबंधी कार्यवाही से जुड़ी है, जबकि धारा 170 संज्ञेय अपराध को रोकने के उद्देश्य से पुलिस की निवारक कार्रवाई से संबंधित है। ऐसी कार्रवाई का उद्देश्य संभावित विवाद या कानून-व्यवस्था की स्थिति को बिगड़ने से रोकना होता है। इस मामले में आगे की प्रक्रिया और संबंधित आदेशों की जानकारी SEM अदालत की कार्यवाही के बाद स्पष्ट होगी।
बताया गया है कि अभिजीत दीपके के खिलाफ पहले भी शांति भंग नहीं करने की शर्त से जुड़ी न्यायिक कार्यवाही हुई थी। हालांकि, इस बार की कार्रवाई में उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों और संभावित शर्तों को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित दस्तावेजों तथा अदालत के आदेश से ही स्पष्ट होगी। फिलहाल पुलिस की कार्रवाई को अभियान के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने से जोड़कर देखा जा रहा है।
नेहा बोरा को किया गया रिहा
इस मामले में AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को भी 16 अक्टूबर की शाम हिरासत में लिया गया था। दिल्ली पुलिस के अनुसार, दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत औपचारिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, नेहा बोरा को लगभग 12 घंटे हिरासत में रखने के बाद आरके पुरम थाने से छोड़ा गया।
नेहा बोरा की हिरासत के बाद छात्र संगठन के सदस्यों ने उनकी स्थिति और स्थान को लेकर चिंता जताई थी। बाद में उनकी रिहाई की जानकारी सामने आई। दूसरी ओर, अभिजीत दीपके के मामले में BNSS की धाराओं के तहत आगे की प्रक्रिया जारी रहने की बात कही गई।
अदालत की कार्यवाही पर नजर
अभिजीत दीपके को SEM अदालत में पेश किए जाने के बाद यह स्पष्ट होगा कि मामले में आगे क्या निर्देश दिए जाते हैं। अदालत संबंधित तथ्यों और पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक निर्णय लेगी। फिलहाल इस घटनाक्रम ने दिल्ली में तिरंगा अभियान, प्रदर्शन की अनुमति और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने को लेकर चर्चा तेज कर दी है। मामले की आगे की स्थिति अदालत के आदेश और पुलिस की आधिकारिक जानकारी के आधार पर स्पष्ट होगी।