बस्तर: सोनारपाल में 20 वर्षों से ईसाई धर्म का पालन कर रहे परिवार के 10 सदस्यों की मूल धर्म में वापसी
बस्तर जिले के भानपुरी आमाबाल परगना क्षेत्र के सोनारपाल में एक परिवार के 10 सदस्यों की मूल धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में वापसी का कार्यक्रम आयोजित किया गया। बताया गया कि परिवार पिछले 20 वर्षों से ईसाई धर्म का पालन कर रहा था। महारा समाज के पदाधिकारियों, समाज प्रमुखों और ग्रामीणों की उपस्थिति में पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई और परिवार के सदस्यों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया।
UNITED NEWS OF ASIA. बस्तर। बस्तर जिले के भानपुरी आमाबाल परगना क्षेत्र के सोनारपाल में एक परिवार के 10 सदस्यों की मूल धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में वापसी का कार्यक्रम आयोजित किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, परिवार पिछले 20 वर्षों से ईसाई धर्म का पालन कर रहा था। कार्यक्रम में महारा समाज के पदाधिकारियों, नाईक-पाईक, समाज प्रमुखों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों की उपस्थिति रही। पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ आयोजित इस कार्यक्रम में परिवार के सभी सदस्यों का स्वागत किया गया।
कार्यक्रम के दौरान सबसे पहले पारंपरिक विधि-विधान से देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद परिवार के सभी 10 सदस्यों को तिलक लगाकर उनका अभिनंदन किया गया। आयोजकों की ओर से उन्हें समाज की मूल धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में पुनः शामिल किया गया। इस दौरान समाज के पदाधिकारियों और ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार स्वागत किया।
बताया गया कि यह कार्यक्रम भानपुरी आमाबाल परगना क्षेत्र में सामाजिक और धार्मिक परंपराओं के अनुरूप संपन्न हुआ। आयोजन में महारा समाज के प्रतिनिधियों के साथ समाज प्रमुखों और ग्रामीणों की सहभागिता रही। सभी की मौजूदगी में पूजा-अर्चना और स्वागत की प्रक्रिया पूरी की गई।
बस्तर क्षेत्र में विभिन्न समुदायों की अपनी पारंपरिक मान्यताएं, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक परंपराएं हैं। ऐसे आयोजनों में स्थानीय समाज के लोग पारंपरिक विधियों के माध्यम से अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े कार्यक्रम संपन्न करते हैं। सोनारपाल में आयोजित इस कार्यक्रम में भी पारंपरिक पूजा-अर्चना और तिलक लगाकर स्वागत करने की प्रक्रिया अपनाई गई।
कार्यक्रम में परिवार के 10 सदस्यों की सहभागिता मुख्य आकर्षण रही। समाज के लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार उनका स्वागत किया और उन्हें सामाजिक-सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने की प्रक्रिया पूरी की। हालांकि, परिवार के सदस्यों के नाम और कार्यक्रम की विस्तृत पृष्ठभूमि के संबंध में अतिरिक्त जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
सोनारपाल में आयोजित यह कार्यक्रम स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। आयोजन के दौरान समाज के पदाधिकारियों, प्रमुखों और ग्रामीणों की उपस्थिति ने सामुदायिक सहभागिता को दर्शाया। कार्यक्रम पारंपरिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ।