पुलिस के अनुसार, थाना वरला क्षेत्र के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में अवैध गांजे की खेती किए जाने की सूचना के बाद विशेष अभियान की योजना तैयार की गई थी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक धीरज बब्बर और एसडीओपी सेंधवा अजय वाघमारे के नेतृत्व में कार्रवाई के लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया गया। अभियान का उद्देश्य पहाड़ी और जंगल क्षेत्रों में छिपाकर की जा रही अवैध खेती का पता लगाना और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करना था।
12 सितंबर 2026 को पुलिस टीमों ने ग्राम डोकलियापानी, धवलियागीर, बागदरी, टाकियापानी और आड़नदी सहित आसपास के पहाड़ी एवं जंगल क्षेत्रों में सर्चिंग की। इन इलाकों में पुलिस ने ड्रोन की मदद से संभावित स्थानों की निगरानी की और इसके बाद टीमों ने पैदल पहुंचकर खेतों की जांच की। इस दौरान पुलिस को पांच ऐसे खेत मिले, जहां अवैध रूप से गांजे की खेती किए जाने की बात सामने आई।
पुलिस कार्रवाई के दौरान इन पांच खेतों से 23 क्विंटल से अधिक गांजा जब्त किए जाने की जानकारी दी गई है। पुलिस के मुताबिक जब्त गांजे की बाजार कीमत करीब एक करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। इतनी बड़ी मात्रा में गांजा मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए खेती से जुड़े लोगों की पहचान और उनकी तलाश शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार जिन खेतों से अवैध फसल जब्त की गई है, वे वन भूमि पर स्थित हैं। ऐसे में पुलिस द्वारा वन विभाग से संबंधित भूमि के पट्टाधारियों और कब्जाधारियों की जानकारी जुटाई जा रही है। इस जानकारी के आधार पर अवैध खेती से जुड़े संभावित आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
ऑपरेशन ग्रीन स्ट्राइक के दौरान तीन जिलों की पुलिस टीमों के समन्वय से व्यापक स्तर पर सर्चिंग की गई। दुर्गम इलाकों में पुलिसकर्मियों ने पैदल पहुंचकर संभावित खेतों की जांच की, जबकि ड्रोन के जरिए ऐसे क्षेत्रों पर निगरानी रखी गई जहां सामान्य तरीके से पहुंचना मुश्किल था। पुलिस का कहना है कि अवैध मादक पदार्थों की खेती और तस्करी के नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
बड़वानी पुलिस ने जब्त की गई गांजे की फसल को कार्रवाई में बड़ी सफलता बताया है। फिलहाल पुलिस और संबंधित विभाग वन भूमि से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार जांच के बाद अवैध खेती के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, अभियान के तहत जिले के दुर्गम क्षेत्रों में निगरानी और सर्चिंग को आगे भी जारी रखने की बात कही गई है।