बलरामपुर नवाडीह कला पंचायत में 'फंड मैनेज' का बड़ा खेल बिना स्वीकृति के कराए काम दूसरे मद से भुगतान का आरोप

बलरामपुर जिले के कुसमी विकासखंड की नवाडीह कला ग्राम पंचायत में बिना प्रशासनिक स्वीकृति कराए गए विकास कार्यों के भुगतान को लेकर नया विवाद सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पुराने कार्यों का भुगतान दूसरे स्वीकृत मद की राशि से समायोजित किया गया। मामले में निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की गई है।

Jul 29, 2026 - 12:39
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बलरामपुर नवाडीह कला पंचायत में 'फंड मैनेज' का बड़ा खेल बिना स्वीकृति के कराए काम दूसरे मद से भुगतान का आरोप

UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर l ​बलरामपुर जिला के कुसमी विकासखंड के ग्राम पंचायत नवाडीह कला में विकास कार्यों और सरकारी पैसों के उपयोग को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। मामला साल 2025 में हुए सड़क मुरमीकरण मुरम बिछाने और तालाब समतलीकरण के कामों से जुड़ा है आरोप है कि बिना प्रशासनिक स्वीकृति के कराए गए कामों का भुगतान छिपाने के लिए दूसरे मद फंड की राशि का इस्तेमाल कर एडजस्टमेंट किया गया है।

जांच के बाद भी इस मामले को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।​ट्रैक्टर मालिकों की शिकायत पर हुई थी जांच ​दरअसल ट्रैक्टर मालिकों ने आरोप लगाया था कि उनसे महीनों तक काम करवाने के बाद भी उनकी मजदूरी व भाड़े का भुगतान नहीं किया गया। 

इसके बाद ट्रैक्टर मालिकों ने थक-हारकर कलेक्टर जनदर्शन में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही अधिकारियों की जांच टीम गांव पहुंची। जांच के बाद सरपंच की ओर से ट्रैक्टर मालिकों को दो किस्तों में पैसा दे दिया गया।

​अब लगा नया आरोप दूसरे मद के पैसे से किया गया एडजस्टमेंट ​भुगतान होने के बाद मामला सुलझने के बजाय और उलझ गया है ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जिस काम के लिए उस समय कोई सरकारी प्रशासनिक मंजूरी ही नहीं थी, उसका पैसा बाद में किसी दूसरे स्वीकृत काम के बजट से दे दिया गया।

​क्या है पूरा मामला ग्रामीणों के अनुसार, सितंबर 2025 में सड़क पर मुरम डालने और तालाब समतलीकरण का काम कराया गया था। उस समय इसके लिए कोई प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिली थी। जब भुगतान अटका तो मामला कलेक्टर तक पहुंचा।

आरोप है कि जून 2026 में स्वीकृत हुए दूसरे मुरमीकरण कार्यों के बजट से पुराने बकाए पैसों का समायोजन एडजस्टमेंटकर दिया गया ​4.70 लाख रुपये के कामों पर उठे सवाल ग्रामीणों का दावा है कि जांच के दौरान अधिकारियों को चार अलग-अलग मुरमीकरण कामों की सूची दिखाई गई, जिसकी कुल लागत करीब 4.70 लाख रुपये बताई गई थी। आरोप है कि इन नए कामों में सिर्फ नाममात्र कागजी का काम हुआ और इनके बजट का इस्तेमाल पुराना पेंडिंग पेमेंट चुकाने के लिए कर लिया गया।

हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है।​वार्ड पंचों ने भी खोली पोल कहा हमें अंधेरे में रखा जाता है ​इस पूरे मामले में अब पंचायत के वार्ड पंचों ने भी सवाल खड़े कर दिए हैं। कुछ पंचों का कहना है कि पंचायत में कौन सा काम मंजूर स्वीकृत हुआ है और उसका कितना एस्टीमेट बजट है, इसकी कोई जानकारी उन्हें नहीं दी जाती।

ना ही काम के मूल्यांकन मूल्यांकन जांच के समय उन्हें बुलाया जाता है। पंचों ने पंचायत के कामों में पूरी पारदर्शिता लाने की मांग की है।​निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग​ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए।

अगर जांच में वित्तीय गड़बड़ी या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो इसके जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।​सरपंच और सचिव का पक्ष इस पूरे मामले में जब सरपंच और ग्राम पंचायत सचिव से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उनसे संपर्क नहीं हो सका। उनका पक्ष आते ही खबर में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।