बालोद में तेज रफ्तार वाहनों का कहर, दो अलग-अलग हादसों में दो गौवंश की मौत
बालोद जिले में मंगलवार सुबह दो अलग-अलग सड़क हादसों में तेज रफ्तार भारी वाहनों की चपेट में आने से दो गौवंश की मौत हो गई। दोनों मामलों में वाहन चालक घटनास्थल से फरार हो गए। स्थानीय लोगों ने दोषी चालकों की पहचान कर सख्त कार्रवाई और सड़क सुरक्षा के प्रभावी इंतजाम की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. सुनील साहू, बालोद l जिले में तेज रफ्तार भारी वाहनों के कारण सड़क हादसों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। मंगलवार सुबह बालोद जिले में दो अलग-अलग स्थानों पर हुए सड़क हादसों में दो गौवंश की मौत हो गई। दोनों घटनाओं में भारी वाहन चालक दुर्घटना के बाद मौके से फरार हो गए। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने सड़क सुरक्षा, यातायात नियमों के पालन और गौवंश संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पहली घटना बालोद-दुर्ग मार्ग पर उमरादाह बस स्टैंड के पास हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एक तेज रफ्तार भारी वाहन ने सड़क पर मौजूद एक गाय को कुचल दिया। टक्कर इतनी भीषण थी कि गौवंश के शरीर के कई हिस्से अलग-अलग हो गए। हादसे के बाद चालक वाहन सहित मौके से फरार हो गया। घटना के बाद कुछ समय तक मार्ग पर अफरा-तफरी का माहौल रहा।
दूसरी घटना झलमला-धमतरी मार्ग पर धोठिया चौक के पास हुई। यहां भी एक तेज रफ्तार भारी वाहन ने सड़क पर मौजूद एक गाय को टक्कर मार दी। इस हादसे में भी गौवंश की मौके पर ही मौत हो गई। दुर्घटना के बाद चालक बिना रुके वाहन लेकर फरार हो गया। दोनों घटनाओं के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन से दोषी वाहन चालकों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
घटनाओं के बाद मौके से गुजर रहे सामाजिक कार्यकर्ता परस साहू ने मानवता का परिचय देते हुए सड़क पर पड़े मृत गौवंश के शव को पॉलीथीन से ढंकवाया और यातायात को व्यवस्थित कराने में सहयोग किया। उनका उद्देश्य सड़क पर गुजर रहे अन्य वाहन चालकों को दुर्घटना से बचाना और यातायात को सुचारु बनाए रखना था। स्थानीय लोगों ने उनके इस प्रयास की सराहना की।
लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने यह चिंता भी बढ़ा दी है कि सड़कों पर खुले में घूम रहे मवेशी और तेज रफ्तार से दौड़ते भारी वाहन दोनों ही दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बन रहे हैं। सड़कों पर आवारा मवेशियों की मौजूदगी जहां वाहन चालकों के लिए जोखिम पैदा करती है, वहीं निर्धारित गति सीमा का पालन नहीं करने वाले वाहन चालक दुर्घटनाओं की गंभीरता को और बढ़ा देते हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई प्रमुख मार्गों पर भारी वाहन निर्धारित गति सीमा से अधिक रफ्तार में चलते हैं। ऐसे में सड़क पर अचानक मवेशी आने या अन्य अवरोध मिलने पर हादसों की आशंका बढ़ जाती है। लोगों ने मांग की है कि मुख्य सड़कों पर नियमित यातायात निगरानी बढ़ाई जाए और तेज रफ्तार वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से यह भी आग्रह किया है कि दोनों घटनाओं में शामिल वाहनों की पहचान सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी माध्यमों से कर दोषी चालकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही सड़कों पर घूम रहे गौवंश की सुरक्षा के लिए भी ठोस व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
नागरिकों का मानना है कि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि वाहन चालकों और आम लोगों की भी साझा जिम्मेदारी है। निर्धारित गति सीमा का पालन, सावधानीपूर्वक वाहन चलाना और सड़क पर मौजूद पशुओं एवं अन्य लोगों का ध्यान रखना ऐसे हादसों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
इन दो दर्दनाक घटनाओं ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा व्यवस्था और गौवंश संरक्षण को लेकर प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता को सामने ला दिया है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।