बेमेतरा में टोकन से होगी उर्वरक की बिक्री, कालाबाजारी पर लगेगी रोक; कृषि विभाग ने शुरू किया प्रशिक्षण

छत्तीसगढ़ में जल्द ही किसानों को टोकन के माध्यम से उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा। भारत सरकार के निर्देशानुसार लागू होने वाली नई उर्वरक बिक्री रूपरेखा का उद्देश्य खाद वितरण में पारदर्शिता बढ़ाना, कालाबाजारी और जमाखोरी पर रोक लगाना तथा किसानों को उचित मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराना है। बेमेतरा में कृषि विभाग के अधिकारियों और मैदानी अमले को नवीन उर्वरक वितरण सॉफ्टवेयर का प्रशिक्षण दिया गया है। जल्द ही सहकारी समितियों, निजी कृषि केंद्रों के संचालकों और किसानों को भी इस प्रणाली की जानकारी दी जाएगी।

Oct 12, 2026 - 18:47
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बेमेतरा में टोकन से होगी उर्वरक की बिक्री, कालाबाजारी पर लगेगी रोक; कृषि विभाग ने शुरू किया प्रशिक्षण

UNITED NEWS OF ASIA. अरुण पुरेना, बेमेतरा l छत्तीसगढ़ में किसानों को जल्द ही टोकन के माध्यम से उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा। भारत सरकार के निर्देशानुसार शुरू की जाने वाली इस व्यवस्था का उद्देश्य खाद वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है। इसके माध्यम से किसानों को सही समय पर, निर्धारित मूल्य पर और गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने के साथ ही जमाखोरी तथा कालाबाजारी पर रोक लगाने का प्रयास किया जाएगा। इस संबंध में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, नई दिल्ली ने देशभर में उर्वरकों के वितरण, बिक्री और मूल्य नियंत्रण को बेहतर बनाने के लिए फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल की घोषणा की है।

POS मशीन से होगा आधार आधारित सत्यापन

नई उर्वरक बिक्री रूपरेखा के तहत उर्वरकों की बिक्री मुख्य रूप से पॉइंट ऑफ सेल (POS) मशीन के माध्यम से आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद की जाएगी। राज्यों और जिलों में उर्वरक की मांग तथा उपलब्धता की वास्तविक समय में निगरानी के लिए इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम (IFMS) पोर्टल के उपयोग को मजबूत किया जाएगा। इससे उर्वरक वितरण से संबंधित जानकारी को व्यवस्थित रखने और उपलब्धता पर नजर रखने में मदद मिलेगी।

नई व्यवस्था के तहत सभी खुदरा विक्रेताओं को अपनी दुकान के बाहर उर्वरक के स्टॉक और निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) की जानकारी प्रदर्शित करने वाला बोर्ड लगाना अनिवार्य होगा। निर्धारित मूल्य से अधिक राशि वसूलने पर सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान बताया गया है। इसके अलावा कृषि कार्यों के बजाय गैर-कृषि उपयोग या उद्योगों में कृषि-ग्रेड उर्वरकों, विशेषकर यूरिया, के अवैध इस्तेमाल को रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।

संतुलित उर्वरक उपयोग को मिलेगा बढ़ावा

नई रूपरेखा में किसानों को मिट्टी के स्वास्थ्य के अनुसार उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया गया है। इसके तहत यूरिया, डीएपी और एनपीके के उचित उपयोग के साथ बायो-फर्टिलाइजर्स तथा नैनो यूरिया के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य किसानों को उर्वरकों के बेहतर उपयोग के प्रति जागरूक करना और कृषि व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।

कृषि अधिकारियों को दिया गया प्रशिक्षण

नई व्यवस्था को लागू करने की तैयारी के तहत बेमेतरा जिले में कृषि विभाग के अधिकारियों को नवीन उर्वरक वितरण प्रणाली के सॉफ्टवेयर का प्रशिक्षण दिया गया। मास्टर ट्रेनर डॉ. श्याम लाल साहू, सहायक संचालक कृषि, और दीपक कुमार साहू, कृषि विकास अधिकारी ने जिले के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारियों, कृषि विकास अधिकारियों तथा ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान किया।

आगामी दिनों में सेवा सहकारी समितियों के प्रबंधकों, उनके कंप्यूटर ऑपरेटरों और निजी कृषि केंद्रों के संचालकों को भी प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके साथ ही कृषि विभाग का मैदानी अमला गांवों में कृषि चौपाल आयोजित कर किसानों को नए सॉफ्टवेयर, उर्वरक वितरण की प्रक्रिया और टोकन जारी करने की प्रणाली की जानकारी दे रहा है।

नई व्यवस्था से उर्वरक वितरण में पारदर्शिता बढ़ाने, निर्धारित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराने और अनियमितताओं पर नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। कृषि विभाग द्वारा प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों तथा विक्रेताओं को इस प्रणाली से जोड़ने की तैयारी की जा रही है।