रायपुर: नितिन लॉरेंस ने FCRA संशोधन विधेयक और दिल्ली के विरोध-प्रदर्शनों के वित्तीय स्रोतों की निष्पक्ष जांच की मांग की
रायपुर के सामाजिक कार्यकर्ता नितिन लॉरेंस ने FCRA संशोधन विधेयक और दिल्ली में आयोजित विरोध-प्रदर्शनों के संभावित वित्तीय स्रोतों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय के जनशिकायत पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर ईमेल के माध्यम से भी शिकायत-पत्र भेजा है। शिकायत में आयोजकों की भूमिका, वित्तीय पारदर्शिता, विदेशी अंशदान संबंधी नियमों के अनुपालन और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच कराने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता ने स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति या संगठन को बिना प्रमाण दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के सामाजिक कार्यकर्ता नितिन लॉरेंस ने FCRA संशोधन विधेयक से जुड़े घटनाक्रम और दिल्ली में आयोजित विरोध-प्रदर्शनों के संभावित वित्तीय स्रोतों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित शिकायत-पत्र ईमेल के माध्यम से भेजा है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री कार्यालय के जनशिकायत पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत का पंजीकरण क्रमांक PMOPG/E/2026/0198315 बताया गया है।
नितिन लॉरेंस ने अपनी शिकायत में अनुरोध किया है कि FCRA संशोधन विधेयक से संबंधित घटनाक्रम और दिल्ली में हुए विरोध-प्रदर्शनों के बीच किसी संभावित संबंध की जांच उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर कराई जाए। उन्होंने सोनम वांगचुक, अभिजीत दीपके तथा संबंधित आयोजकों और संगठनों की भूमिका के संबंध में उपलब्ध विश्वसनीय जानकारी का निष्पक्ष परीक्षण करने की मांग की है। हालांकि, शिकायत में उठाए गए बिंदु जांच की मांग हैं और इनके आधार पर किसी व्यक्ति या संगठन की संलिप्तता को प्रमाणित नहीं माना जा सकता।
वित्तीय स्रोतों और विदेशी अंशदान की जांच की मांग
शिकायत में विरोध-प्रदर्शनों के आयोजन, प्रचार-प्रसार, यात्रा, आवास और अन्य गतिविधियों पर होने वाले खर्च के स्रोतों तथा उनके उपयोग की पारदर्शिता सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि जहां पर्याप्त आधार और विश्वसनीय साक्ष्य उपलब्ध हों, वहां संबंधित वित्तीय लेन-देन की जांच की जानी चाहिए। इसके साथ ही संबंधित संस्थाओं द्वारा विदेशी अंशदान प्राप्त करने और उसके उपयोग के मामले में FCRA के अंतर्गत लागू नियमों के अनुपालन का परीक्षण करने की मांग भी की गई है।
नितिन लॉरेंस ने डिजिटल प्रचार और युवाओं की भागीदारी से जुड़े पहलुओं की जांच का अनुरोध करते हुए कहा है कि यदि भ्रामक सूचना फैलाने, हिंसा के लिए उकसाने या सार्वजनिक शांति भंग करने के प्रमाण सामने आते हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इसी तरह किसी तीसरे पक्ष, संस्था या अन्य व्यक्ति के संभावित वित्तीय सहयोग के संबंध में दस्तावेजी साक्ष्य मिलने पर उसकी भूमिका का कानून के अनुसार परीक्षण किए जाने की मांग की गई है।
सक्षम प्राधिकारी से जांच कराने का अनुरोध
शिकायतकर्ता ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि गृह मंत्रालय या किसी अन्य सक्षम प्राधिकारी के माध्यम से शिकायत में उठाए गए बिंदुओं की जांच कराई जाए। आवश्यकता होने पर स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच दल गठित करने पर भी विचार करने की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि वित्तीय पारदर्शिता, सार्वजनिक शांति, राष्ट्रीय एकता और युवाओं का भविष्य महत्वपूर्ण विषय हैं। यदि किसी प्रकार की अवैध वित्तीय गतिविधि या अन्य कानूनी उल्लंघन के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर भी जोर
नितिन लॉरेंस ने यह भी स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संवैधानिक अधिकार हैं, जिनका सम्मान किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, किसी भी व्यक्ति या संगठन के विरुद्ध निष्कर्ष केवल विश्वसनीय साक्ष्यों और निष्पक्ष जांच के आधार पर निकाला जाना चाहिए। उन्होंने शिकायत का उद्देश्य किसी को बिना प्रमाण दोषी ठहराना नहीं, बल्कि घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट कराना और कानून के शासन तथा वित्तीय पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के लिए जांच का अनुरोध करना बताया है।
शिकायत के अनुसार, प्रधानमंत्री कार्यालय के जनशिकायत पोर्टल पर पंजीकरण कराया गया है और संबंधित प्राधिकारियों को ईमेल से शिकायत-पत्र भेजा गया है। शिकायत की प्रति स्पीड पोस्ट से भेजने की तैयारी भी बताई गई है। स्पीड पोस्ट वास्तव में भेजे जाने की पुष्टि होने के बाद ही इसे भेजे जाने के रूप में प्रकाशित किया जाना चाहिए।