फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट के 'सोनखाद' की बिक्री से ग्राम पंचायत पतोरा को 70 हजार रुपये का राजस्व
दुर्ग जिले के ग्राम पंचायत पतोरा स्थित फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट में तैयार 'सोनखाद' का वन विभाग को विक्रय किया गया। 7,000 किलोग्राम खाद की बिक्री से पंचायत को 70 हजार रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जिससे प्लांट के संचालन और रखरखाव को मजबूती मिलेगी।
UNITED NEWS OF ASIA. रोहिताश सिंह भुवाल, दुर्ग l स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत दुर्ग जिले में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के पुनः उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। जनपद पंचायत पाटन के अंतर्गत ग्राम पंचायत पतोरा में स्थापित फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (एफएसटीपी) में तैयार उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद 'सोनखाद' का सफलतापूर्वक वन विभाग को विक्रय किया गया। इस पहल से ग्राम पंचायत को 70 हजार रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है, जिससे पंचायत की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ प्लांट के संचालन एवं रखरखाव को भी मजबूती मिलेगी।
जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में संचालित इस पहल के तहत सेप्टिक टैंकों से प्राप्त ब्लैक वाटर एवं मल का वैज्ञानिक तरीके से उपचार कर उपयोगी जैविक खाद तैयार की जाती है। इस खाद को 'सोनखाद' नाम दिया गया है, जो पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ कृषि एवं हरित विकास कार्यों में उपयोगी साबित हो रही है।
वन विभाग द्वारा बोरसीभाठा में विकसित किए जा रहे ऑक्सीजोन निर्माण कार्य के लिए 7,000 किलोग्राम सोनखाद 10 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदी गई। इस खरीद से ग्राम पंचायत पतोरा को कुल 70 हजार रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। पंचायत ने निर्धारित समय पर खाद की आपूर्ति सुनिश्चित कर इस कार्य को सफलतापूर्वक पूरा किया।
इस पहल से प्राप्त राशि का उपयोग फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट के नियमित संचालन, रखरखाव, मरम्मत तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं में किया जाएगा। इससे प्लांट की कार्यक्षमता बढ़ेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता सेवाओं को निरंतर बनाए रखने में सहायता मिलेगी।
यह मॉडल केवल स्वच्छता तक सीमित नहीं है, बल्कि कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलने की दिशा में भी एक प्रभावी उदाहरण बनकर सामने आया है। इससे सर्कुलर इकोनॉमी की अवधारणा को बढ़ावा मिल रहा है, जहां अपशिष्ट का वैज्ञानिक उपचार कर उसे पुनः उपयोग के योग्य बनाया जाता है।
इस पहल से यह भी स्पष्ट हुआ है कि पंचायत स्तर पर वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन अपनाकर पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता भी हासिल की जा सकती है। वन विभाग और ग्राम पंचायत के बीच समन्वय से तैयार यह मॉडल अन्य पंचायतों के लिए भी प्रेरणादायक साबित हो सकता है।
प्रशासन का मानना है कि इस तरह की पहलें स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों को गति देने के साथ ग्रामीण विकास, हरित पर्यावरण और स्थानीय निकायों की वित्तीय सुदृढ़ता को भी नई दिशा प्रदान करेंगी। आने वाले समय में ऐसे प्रयासों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लक्ष्यों को और अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।