विद्युत कंपनी के निजीकरण की तैयारी का कांग्रेस ने किया विरोध, सरकार पर लगाया सार्वजनिक संपत्ति बेचने का आरोप

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने राज्य सरकार के पावर कंपनी को स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध करने के फैसले का विरोध किया है। कांग्रेस का आरोप है कि यह कदम सरकारी विद्युत कंपनी के निजीकरण की दिशा में उठाया गया प्रयास है। पार्टी ने सरकार पर सार्वजनिक संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने की साजिश रचने और बिजली उपभोक्ताओं के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया।

Aug 6, 2026 - 14:14
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विद्युत कंपनी के निजीकरण की तैयारी का कांग्रेस ने किया विरोध, सरकार पर लगाया सार्वजनिक संपत्ति बेचने का आरोप

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (CSPGCL) को स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध करने की मंजूरी का कड़ा विरोध किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इसे सरकारी विद्युत कंपनी के निजीकरण की दिशा में उठाया गया कदम बताते हुए कहा कि यह फैसला राज्य के हितों और आम उपभोक्ताओं के खिलाफ है।

दीपक बैज ने कहा कि राज्य मंत्रिमंडल ने लगभग 200 करोड़ रुपये तक के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) और बॉन्ड जारी कर कंपनी को स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। कांग्रेस का आरोप है कि इस प्रक्रिया के माध्यम से धीरे-धीरे सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी में निजी निवेश बढ़ाया जाएगा, जिससे भविष्य में कंपनी का नियंत्रण निजी हाथों में जा सकता है।

कांग्रेस का कहना है कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है और यहां बिजली उत्पादन के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं। ऐसे में राज्य की विद्युत कंपनियां आत्मनिर्भर हैं और उन्हें निजी निवेश के सहारे चलाने की आवश्यकता नहीं है। पार्टी का आरोप है कि सरकार आर्थिक कुप्रबंधन को छिपाने के लिए सार्वजनिक उपक्रमों को बाजार के हवाले करने की नीति अपना रही है।

दीपक बैज ने कहा कि पिछले कुछ समय में बिजली दरों में बढ़ोतरी, स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया और बिजली बिल हाफ योजना में बदलाव जैसे फैसलों से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है। अब सरकार विद्युत कंपनी को सूचीबद्ध कर निजीकरण की दिशा में आगे बढ़ रही है, जिससे भविष्य में बिजली सेवाओं और दरों पर भी असर पड़ सकता है।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को मजबूत करने के बजाय उन्हें निजी क्षेत्र के लिए आकर्षक बनाने की कोशिश की जा रही है। पार्टी का कहना है कि सरकार को सार्वजनिक संस्थानों को सशक्त बनाने, उनकी वित्तीय स्थिति सुधारने और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने पर ध्यान देना चाहिए।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा कि देश में पहले भी कई सार्वजनिक उपक्रमों के विनिवेश और निजीकरण के फैसले लिए गए हैं। ऐसे में राज्य सरकार का यह निर्णय भी उसी दिशा में एक और कदम माना जा रहा है। कांग्रेस ने आशंका जताई कि यदि समय रहते इस प्रक्रिया पर रोक नहीं लगी तो भविष्य में राज्य की महत्वपूर्ण विद्युत परिसंपत्तियों पर निजी कंपनियों का प्रभाव बढ़ सकता है।

कांग्रेस ने राज्य सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए कहा कि विद्युत क्षेत्र जैसी रणनीतिक और जनहित से जुड़ी सेवाओं को पूरी तरह सार्वजनिक नियंत्रण में रखा जाना चाहिए। पार्टी ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार इस फैसले को वापस नहीं लेती है तो कांग्रेस लोकतांत्रिक तरीके से इसका विरोध करेगी और जनहित के इस मुद्दे को जनता के बीच लेकर जाएगी।