चिपरेल में वनभूमि पर कथित अतिक्रमण का विवाद, छह महीने से समाधान का इंतजार

कोंडागांव जिले के केशकाल विकासखंड के ग्राम पंचायत चिपरेल में वनभूमि पर कथित अतिक्रमण और पेड़ों की कटाई को लेकर विवाद सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि छोटेपारा क्षेत्र में फॉरेस्ट रिजर्व की जमीन पर कथित रूप से नौतोड़ और पेड़ों की कटाई की गई है। शिकायत और ज्ञापन के बावजूद करीब छह महीने से मामले का स्थायी समाधान नहीं होने की बात ग्रामीणों ने कही है। ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग से निष्पक्ष जांच कर वनभूमि की स्थिति स्पष्ट करने तथा नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

Sep 23, 2026 - 13:49
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चिपरेल में वनभूमि पर कथित अतिक्रमण का विवाद, छह महीने से समाधान का इंतजार

UNITED NEWS OF ASIA. डेनिरो सलाम, कोंडागांव। केशकाल विकासखंड के ग्राम पंचायत चिपरेल में वनभूमि पर कथित अतिक्रमण और पेड़ों की कटाई को लेकर पिछले करीब छह महीनों से विवाद बना हुआ है। चिपरेल के छोटेपारा के ग्रामीणों पर फॉरेस्ट रिजर्व की जमीन में नौतोड़ करने और वनभूमि पर मौजूद पेड़ों की कटाई कर जमीन पर कब्जा करने के आरोप चिपरेल बड़ेपारा और शालेभाट के ग्रामीणों द्वारा लगाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले को लेकर संबंधित विभाग और प्रशासन को शिकायत एवं ज्ञापन सौंपे जाने के बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

विरोध कर रहे ग्रामीणों के मुताबिक छोटेपारा के कई परिवारों के पास पहले से नौतोड़ की पुरानी जमीन और पैतृक भूमि मौजूद है। ग्रामीणों का आरोप है कि इसके बावजूद वन क्षेत्र की अतिरिक्त जमीन पर दोबारा नौतोड़ किए जाने से जंगल के संरक्षण को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। उनका कहना है कि वन विभाग की ओर से चिपरेल बड़ेपारा और शालेभाट के ग्रामीणों को जंगल, पेड़-पौधों और वनभूमि के संरक्षण में सहयोग की जिम्मेदारी दी गई थी। ऐसे में वन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई और कथित अतिक्रमण की स्थिति को लेकर ग्रामीणों में चिंता बनी हुई है।

ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने मामले को लेकर संबंधित विभाग और प्रशासन को कई बार लिखित शिकायत एवं ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, उनके अनुसार अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से नाराजगी बढ़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि विवाद का समाधान नहीं होने के कारण जंगल के भविष्य और वनभूमि के संरक्षण को लेकर भी चिंता बनी हुई है।

ग्रामीणों ने कहा कि जंगल केवल जमीन और पेड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वन्यजीवों, पशु-पक्षियों और आसपास रहने वाले ग्रामीणों के जीवन का महत्वपूर्ण आधार है। जंगल से मिलने वाली जड़ी-बूटियां, फल-फूल और अन्य वनोपज ग्रामीणों की आजीविका तथा दैनिक जरूरतों से जुड़ी हुई हैं। उनका कहना है कि यदि पेड़ों की कटाई और वनभूमि के उपयोग का सिलसिला जारी रहता है तो आने वाले समय में इसका प्रभाव जंगल और उस पर निर्भर समुदायों पर पड़ सकता है।

ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने वनभूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने, पेड़ों की कटाई के आरोपों की जांच कराने और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग रखी है। ग्रामीणों का कहना है कि करीब छह महीने से चले आ रहे विवाद का स्थायी समाधान किया जाना आवश्यक है, ताकि वनभूमि और जंगल के संरक्षण को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके।