700 ग्राम के नवजात को मिला नया जीवन, 62 दिनों के उपचार से वजन बढ़कर हुआ 1.350 किलो
छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिला अस्पताल में 700 ग्राम वजन के साथ जन्मे प्रीटर्म नवजात को 62 दिनों के सतत उपचार और विशेष देखभाल के बाद नया जीवन मिला। चिकित्सकों की निगरानी, ऑक्सीजन सपोर्ट, आवश्यक उपचार और मां द्वारा लगभग 50 दिनों तक कंगारू मदर केयर देने से शिशु का वजन बढ़कर 1.350 किलोग्राम हो गया। स्वास्थ्य में सुधार और स्थिति स्थिर होने पर 21 अक्टूबर 2026 को शिशु को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में स्वास्थ्य सेवाओं और नवजात शिशुओं की विशेष देखभाल का एक सकारात्मक उदाहरण सामने आया है। जिला अस्पताल में मात्र 700 ग्राम वजन के साथ जन्मे प्रीटर्म नवजात को 62 दिनों तक लगातार उपचार, विशेष देखभाल और चिकित्सकीय निगरानी के बाद नया जीवन मिला है। उपचार के दौरान शिशु का वजन बढ़कर 1.350 किलोग्राम हो गया। स्वास्थ्य में सुधार और स्थिति स्थिर होने के बाद 21 अक्टूबर 2026 को शिशु को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
जन्म के समय मात्र 700 ग्राम था वजन
विश्रामपुरी विकासखंड के ग्राम सलना छोटेमालगांव निवासी लखमी मरकाम और रमेश्वर मरकाम के शिशु का जन्म 21 अगस्त 2026 को हुआ था। समय से पहले जन्म और बेहद कम वजन के कारण शिशु की स्थिति गंभीर थी। प्रारंभिक उपचार के बाद बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र माकड़ी से जिला अस्पताल रेफर किया गया। अस्पताल में भर्ती के समय शिशु की हृदय गति 135 प्रति मिनट, ऑक्सीजन संतृप्ति 90 प्रतिशत और शरीर का तापमान 36.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। उसकी नाजुक स्थिति को देखते हुए विशेष नवजात देखभाल और निरंतर चिकित्सकीय निगरानी शुरू की गई।
विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में चला उपचार
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रुद्र कश्यप और डॉ. राजेश बघेल ने शिशु की स्थिति के अनुसार उपचार किया। उपचार के दौरान उसे 11 दिनों तक Cefotaxime और Amikacin, 38 दिनों तक Capnea तथा 20 दिनों तक अंतःशिरा द्रव (IVF) दिया गया। आवश्यकता के अनुसार Meropenem और Vancomycin जैसे एंटीबायोटिक भी दिए गए। शिशु को लगभग 42 दिनों तक ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत रही और उपचार के दौरान छह बार रक्त चढ़ाया गया। विशेष नवजात देखभाल इकाई (SNCU) की टीम ने भी उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखी और आवश्यकतानुसार उपचार में बदलाव किए।
कंगारू मदर केयर से मिली मदद
शिशु की रिकवरी में चिकित्सकीय उपचार के साथ मां की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। लखमी मरकाम ने लगभग 50 दिनों तक कंगारू मदर केयर (KMC) प्रदान किया। इस पद्धति में नवजात को मां के सीने से त्वचा के सीधे संपर्क में रखकर गर्माहट और देखभाल दी जाती है। निरंतर चिकित्सकीय निगरानी, आवश्यक पोषण और मां के सहयोग से शिशु के स्वास्थ्य में धीरे-धीरे सुधार हुआ तथा उसका वजन बढ़ता गया।
62 दिनों की मेहनत लाई रंग
700 ग्राम वजन के साथ शुरू हुई यह चुनौतीपूर्ण यात्रा 62 दिनों के उपचार के बाद राहत और खुशी में बदल गई। शिशु की स्थिति स्थिर होने पर 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। यह उपलब्धि चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों और परिवार के निरंतर सहयोग का उदाहरण है। इस मामले से नवजात शिशुओं के लिए समय पर उपचार, विशेष देखभाल और कंगारू मदर केयर के महत्व को भी रेखांकित किया गया है।