आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों में 1 डीवीसीएम (डिविजनल कमेटी मेंबर), 4 एसीएम (एरिया कमेटी मेंबर) और 6 पीएम (पार्टी मेंबर) शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यह सभी माओवादी लंबे समय से नक्सली गतिविधियों में सक्रिय थे और कई घटनाओं में उनकी संलिप्तता की जांच भी की जा रही थी।
आत्मसमर्पण के दौरान माओवादियों ने अपने पास मौजूद हथियार भी सुरक्षा बलों के सामने जमा कर दिए। इनमें 1 एके-47 राइफल, 4 एसएलआर राइफल, 1 इंसास राइफल, 1 बारह बोर बंदूक और 2 सिंगल-शॉट हथियार शामिल हैं। सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि इन हथियारों का उपयोग नक्सली गतिविधियों और सुरक्षा बलों पर हमलों में किया जाता था।
स्थानीय पुलिस विभाग के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले कुछ माओवादी छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के विभिन्न जिलों के निवासी बताए जा रहे हैं। लंबे समय से ये माओवादी ओडिशा और छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे जंगलों में सक्रिय थे और संगठन के लिए काम कर रहे थे।
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले इन सभी माओवादियों पर मिलाकर करीब 1 करोड़ 34 लाख रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इन माओवादियों के आत्मसमर्पण से क्षेत्र में नक्सली नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सरकार की पुनर्वास और आत्मसमर्पण नीति के तहत नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने का अवसर दिया जा रहा है। इस नीति के अंतर्गत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को आर्थिक सहायता, रोजगार के अवसर और समाज में पुनर्वास की सुविधा प्रदान की जाती है, ताकि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन जी सकें।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि लगातार चल रहे अभियान, बढ़ते दबाव और विकास कार्यों के कारण कई नक्सली अब हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय ले रहे हैं। इससे प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास का रास्ता और मजबूत होगा।
पुलिस ने उम्मीद जताई है कि आने वाले समय में और भी माओवादी आत्मसमर्पण कर सकते हैं, जिससे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति बहाल करने के प्रयासों को और बल मिलेगा।