विजय साहू का बयान: प्रधानमंत्री के परिवार पर टिप्पणी दुर्भाग्यपूर्ण, भिलाई इस्पात संयंत्र की बिक्री के आरोपों पर मांगे प्रमाण
भाजपा नेता और छत्तीसगढ़ क्रेडा के पूर्व सदस्य विजय साहू ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के परिवार पर की गई टिप्पणी की आलोचना की। उन्होंने राजनीतिक संवाद में मर्यादा बनाए रखने की अपील की और भिलाई इस्पात संयंत्र को अडानी समूह को बेचे जाने संबंधी भूपेश बघेल के आरोपों पर आधिकारिक दस्तावेज प्रस्तुत करने की मांग की। साहू ने संयंत्र की उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इस विषय पर तथ्यों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए।
UNITED NEWS OF ASIA. रोहितास सिंह भुवाल, भिलाई l भारतीय जनता पार्टी के नेता एवं छत्तीसगढ़ क्रेडा के पूर्व सदस्य विजय साहू ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके पिता के संदर्भ में की गई टिप्पणी की आलोचना की है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि राजनीतिक विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा बनाए रखना सभी नेताओं की जिम्मेदारी है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री की नीतियों और निर्णयों की आलोचना की जा सकती है, लेकिन राजनीतिक विवाद में उनके परिवार को शामिल करना उचित नहीं है।
विजय साहू ने कहा कि कांग्रेस जैसे राष्ट्रीय दल के अध्यक्ष से संयमित और जिम्मेदार भाषा की अपेक्षा की जाती है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की प्रतिक्रिया पर भी आपत्ति जताई। साहू का कहना है कि किसी राजनीतिक बयान से असहमति होने पर उसका जवाब तथ्यों और तर्कों के आधार पर दिया जाना चाहिए। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से सार्वजनिक संवाद की गरिमा बनाए रखने की अपील की।
भिलाई इस्पात संयंत्र की बिक्री के आरोपों पर सवाल
विजय साहू ने भिलाई इस्पात संयंत्र को अडानी समूह को बेचे जाने संबंधी भूपेश बघेल के आरोपों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण औद्योगिक प्रतिष्ठान के भविष्य से जुड़े विषय पर आरोप लगाने वालों को अपने दावों के समर्थन में आधिकारिक दस्तावेज और प्रमाण सार्वजनिक करने चाहिए। उन्होंने इस मामले में दुर्ग सांसद विजय बघेल की ओर से पहले दी गई प्रतिक्रिया का भी उल्लेख किया।
साहू ने दावा किया कि केंद्र सरकार के इस्पात मंत्रालय की ओर से भिलाई इस्पात संयंत्र की उत्पादन क्षमता बढ़ाकर 10.2 मिलियन टन प्रतिवर्ष करने की योजना सामने आई है। इसके लिए मेकॉन के साथ परामर्श अनुबंध किए जाने और संयंत्र की आवश्यकताओं से जुड़ी रेल एवं औद्योगिक अधोसंरचना के विकास पर काम किए जाने का भी उन्होंने उल्लेख किया।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब संयंत्र के विस्तारीकरण और उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं, तो उसकी बिक्री के आरोप किस आधिकारिक जानकारी के आधार पर लगाए जा रहे हैं। साहू ने कहा कि संयंत्र के विस्तार की योजना और उसके निजीकरण की आशंका दो अलग-अलग विषय हैं। इसलिए इन पर चर्चा करते समय तथ्यों और प्रमाणों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
श्रमिकों और नागरिकों की चिंताओं पर तथ्यपरक चर्चा की अपील
विजय साहू ने कहा कि भिलाई इस्पात संयंत्र छत्तीसगढ़ की औद्योगिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इससे हजारों परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। ऐसे में संयंत्र के भविष्य को लेकर श्रमिकों और नागरिकों की चिंताओं का समाधान विश्वसनीय जानकारी के माध्यम से होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद प्रधानमंत्री पद की गरिमा, सार्वजनिक संवाद की मर्यादा और भिलाई इस्पात संयंत्र जैसे महत्वपूर्ण संस्थान के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनका कहना है कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय संबंधित विषयों पर तथ्यों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए, ताकि जनता के सामने सही जानकारी पहुंच सके।