UNA News की खबर का बड़ा असर: तिल्दा-नेवरा के पांच निजी अस्पतालों को स्वास्थ्य विभाग का शो-कॉज नोटिस
तिल्दा-नेवरा क्षेत्र के निजी अस्पतालों में कथित तौर पर बिना मेडिकल डिग्री और पर्याप्त प्रशिक्षण वाले कर्मचारियों से OT, ICU और लेबर रूम में काम कराने का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई की है। UNA News की खबर के बाद खंड चिकित्सा अधिकारी कार्यालय ने पांच निजी अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी कर अयोग्य स्टाफ को तत्काल हटाने और पैरामेडिकल कर्मचारियों की शैक्षणिक योग्यता की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. अशोक मिश्रा, तिल्दा-नेवरा। तिल्दा-नेवरा क्षेत्र के निजी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा और इलाज की गुणवत्ता से जुड़ा गंभीर मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है। यूएनए न्यूज़ (UNA News) की खबर का बड़ा असर देखने को मिला है। निजी अस्पतालों में कथित तौर पर बिना मेडिकल डिग्री और निर्धारित शैक्षणिक योग्यता वाले कर्मचारियों से ऑपरेशन थिएटर (OT), आईसीयू (ICU) और लेबर रूम जैसे संवेदनशील विभागों में काम कराए जाने की खबर प्रसारित होने के बाद खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तिल्दा-नेवरा के कार्यालय ने क्षेत्र के पांच निजी अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
UNA News ने अपनी रिपोर्ट में अस्पतालों में कर्मचारियों की योग्यता और मरीजों की सुरक्षा से जुड़े सवाल उठाए थे। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि कुछ निजी अस्पतालों में दसवीं और बारहवीं पास युवकों से ऐसे कार्य कराए जा रहे हैं, जिनके लिए मेडिकल शिक्षा, निर्धारित प्रशिक्षण और तकनीकी दक्षता आवश्यक है। इनमें ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू और प्रसव कक्ष में सेवाएं देने के साथ मरीजों को इंजेक्शन लगाने जैसे जोखिमपूर्ण कार्य भी शामिल बताए गए थे।
स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक पत्र में भी अयोग्य व्यक्तियों से संवेदनशील चिकित्सा इकाइयों में सेवाएं लेने की शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है। इस मामले में जिन पांच निजी अस्पतालों को नोटिस जारी किया गया है, उनमें ज्योति वाधवा एवं प्रसूति गृह, तिल्दा-नेवरा, श्री साईं पैकरा हॉस्पिटल, खुशी हॉस्पिटल, सूना हॉस्पिटल और ओम हॉस्पिटल, खरोरा रोड, तिल्दा-नेवरा शामिल हैं।
खंड चिकित्सा अधिकारी कार्यालय ने संबंधित अस्पताल संचालकों को निर्देश दिए हैं कि बिना निर्धारित योग्यता वाले कर्मचारियों से चिकित्सा संबंधी कार्य तत्काल प्रभाव से बंद कराया जाए। साथ ही अस्पतालों में कार्यरत सभी पैरामेडिकल कर्मचारियों की शैक्षणिक योग्यता, प्रमाणपत्र और डिग्री की जांच कराई जाए। इसके बाद पूरी जानकारी और आवश्यक दस्तावेजों के साथ रिपोर्ट बीएमओ कार्यालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि नर्सिंग होम एक्ट के प्रावधानों के तहत मरीजों की सुरक्षा से जुड़ी लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा। नोटिस में दिए गए निर्देशों का पालन नहीं करने की स्थिति में संबंधित अस्पतालों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। मामले की प्रतिलिपि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), रायपुर को भी आगे की कार्रवाई के लिए भेजी गई है।
UNA News की खबर के बाद हुई इस प्रशासनिक कार्रवाई से तिल्दा-नेवरा क्षेत्र के निजी अस्पतालों में हलचल बढ़ गई है। हालांकि, संबंधित अस्पतालों का पक्ष और नोटिस के जवाब सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति और स्पष्ट होगी। मरीजों की जान और स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में योग्य एवं प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ की तैनाती बेहद जरूरी है। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और संबंधित अस्पताल निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाते हैं।