सूरजगढ़ माइंस के डंपरों पर फूटा जनाक्रोश, सड़क पर उतरी परलकोट जन कल्याण संस्था
पखांजूर क्षेत्र में सूरजगढ़ माइंस से संचालित भारी डंपरों के विरोध में परलकोट जन कल्याण संस्था ने सांकेतिक प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने ओवरलोड वाहनों पर रोक, सड़क सुरक्षा और खराब सड़कों की मरम्मत की मांग करते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की।
UNITED NEWS OF ASIA. रोहित देहारी, पखांजूर l कांकेर जिले के पखांजूर क्षेत्र में सूरजगढ़ माइंस से संचालित भारी डंपरों के खिलाफ स्थानीय लोगों का आक्रोश एक बार फिर खुलकर सामने आया। सोमवार को परलकोट जन कल्याण संस्था के बैनर तले क्षेत्रवासियों ने सांकेतिक विरोध प्रदर्शन कर प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लंबे समय से क्षेत्र में भारी वाहनों की आवाजाही के कारण सड़कें बदहाल हो रही हैं, दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है और आम लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है।
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ सीमा से होकर बांदे–पखांजूर–कापसी मार्ग पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में सूरजगढ़ माइंस के डंपर गुजरते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इनमें से कई वाहन ओवरलोड होते हैं, जिससे पहले से क्षतिग्रस्त सड़कें और तेजी से टूट रही हैं। इसके कारण आम नागरिकों, दोपहिया वाहन चालकों और स्कूली बच्चों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से धूल प्रदूषण भी गंभीर समस्या बन गया है। सड़क किनारे रहने वाले लोगों को सांस संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि दुकानदारों और राहगीरों को भी असुविधा झेलनी पड़ रही है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर पुल-पुलियों पर उनकी क्षमता से अधिक भार पड़ रहा है, जिससे भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है।
परलकोट जन कल्याण संस्था ने प्रशासन से मांग की कि ओवरलोड वाहनों के संचालन पर तत्काल प्रभावी नियंत्रण लगाया जाए। संस्था का कहना है कि सड़क सुरक्षा के नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए, खराब हो चुकी सड़कों की मरम्मत कराई जाए और क्षेत्रवासियों की समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जाए। प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान संस्था के पदाधिकारियों और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से नियमित निगरानी, वाहनों की जांच और परिवहन नियमों के पालन को सुनिश्चित करने की मांग की। उनका कहना है कि विकास कार्यों के साथ आम जनता की सुरक्षा और सुविधा से समझौता नहीं किया जा सकता।
क्षेत्रवासियों का मानना है कि लंबे समय से उठाई जा रही समस्याओं के बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है। इसी कारण लोगों में नाराजगी लगातार बढ़ रही है। प्रदर्शन के माध्यम से उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी मांगों को गंभीरता से लेते हुए सड़क सुरक्षा, ओवरलोडिंग पर नियंत्रण और क्षेत्र की आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए जल्द आवश्यक कदम उठाएगा। फिलहाल पूरे मामले पर प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।