रायपुर में गीता ज्ञान अमृत वर्षा कथा: संकर्षण शरण गुरुजी बोले- गीता जीवन का महासागर, ज्ञान, भक्ति और कर्म से मिलता है आत्मसाक्षात्कार

रायपुर के अश्वनी नगर स्थित सोनकर मैरिज पैलेस में आयोजित गीता ज्ञान अमृत वर्षा कथा में प्रयागराज से पहुंचे संकर्षण शरण गुरुजी ने श्रीमद्भगवद्गीता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने ज्ञान, भक्ति और कर्म को जीवन का आधार बताते हुए राग-द्वेष और अहंकार से मुक्ति का संदेश दिया। कथा के बाद वासुदेव हॉस्पिटल की ओर से तीन दिवसीय निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने स्वास्थ्य जांच का लाभ लिया।

Oct 28, 2026 - 08:01
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रायपुर में गीता ज्ञान अमृत वर्षा कथा: संकर्षण शरण गुरुजी बोले- गीता जीवन का महासागर, ज्ञान, भक्ति और कर्म से मिलता है आत्मसाक्षात्कार

UNIITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के अश्वनी नगर स्थित सोनकर मैरिज पैलेस में आयोजित गीता ज्ञान अमृत वर्षा कथा में श्रद्धालुओं को श्रीमद्भगवद्गीता के आध्यात्मिक रहस्यों और जीवन के महत्वपूर्ण सिद्धांतों से परिचित कराया जा रहा है। प्रयागराज से पधारे संकर्षण शरण गुरुजी ने कथा के दौरान गीता के महत्व को समझाते हुए कहा कि गीता एक ऐसा विशाल समुद्र है, जिसमें मनुष्य को जीवन से जुड़े हर प्रश्न का उत्तर मिल सकता है। आवश्यकता केवल गीता के संदेश को समझने और उसके अनुसार जीवन जीने की है।

कथा के दौरान संकर्षण शरण गुरुजी ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाला ज्ञान का अथाह भंडार है। जिस प्रकार समुद्र में अनेक प्रकार की संपदाएं समाहित होती हैं, उसी प्रकार गीता में जीवन के सभी पहलुओं का समाधान मौजूद है। उन्होंने बताया कि गीता के माध्यम से संन्यासी संन्यास का मार्ग प्राप्त कर सकता है, योगी योग का ज्ञान हासिल कर सकता है और भक्त भक्ति के वास्तविक स्वरूप को समझ सकता है।

गुरुजी ने मानव जीवन में कर्म के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य का संपूर्ण जीवन कर्मों से जुड़ा हुआ है। व्यक्ति चाहे कोई कार्य करे या न करे, दोनों ही परिस्थितियों में वह कर्म की प्रक्रिया से जुड़ा रहता है। उन्होंने समझाया कि मनुष्य ज्ञान और अज्ञान, भक्ति और नास्तिकता जैसी विभिन्न अवस्थाओं से गुजरते हुए अपना जीवन व्यतीत करता है। ऐसे में सही कर्म, सच्ची भक्ति और वास्तविक ज्ञान का समन्वय आवश्यक है।

संकर्षण शरण गुरुजी ने कहा कि ज्ञान, भक्ति और कर्म मानव जीवन के तीन महत्वपूर्ण आधार हैं। उन्होंने इनकी तुलना गंगा, यमुना और सरस्वती से करते हुए बताया कि जिस प्रकार इन पवित्र नदियों का संगम आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है, उसी प्रकार जीवन में ज्ञान, भक्ति और कर्म का संतुलन भी आवश्यक है। उन्होंने श्रद्धालुओं को कर्मफल की आकांक्षा से मुक्त होकर अपने कर्तव्यों का पालन करने, भक्ति योग से जुड़ने और ज्ञान का दिखावा करने से बचने की सीख दी।

आत्मसाक्षात्कार के विषय में गुरुजी ने बताया कि मनुष्य संसार की अनेक वस्तुओं और विषयों के बारे में जानकारी प्राप्त कर लेता है, लेकिन कई बार स्वयं को समझने का प्रयास नहीं करता। उन्होंने कहा कि आत्मसाक्षात्कार के मार्ग में राग और द्वेष दो प्रमुख बाधाएं हैं। जब तक व्यक्ति इन भावनाओं से मुक्त नहीं होता, तब तक वह अपने वास्तविक स्वरूप को नहीं पहचान सकता।

गुरुजी ने पौराणिक प्रसंगों के माध्यम से मधु और कैटभ का उल्लेख करते हुए राग-द्वेष जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों पर विजय प्राप्त करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने भीतर मौजूद अहंकार, बुराइयों और नकारात्मक विचारों को समाप्त करने का प्रयास करना चाहिए। गुरु के मार्गदर्शन, ईश्वर के प्रति समर्पण और निष्काम कर्म के माध्यम से आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।

गीता ज्ञान अमृत वर्षा कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और गुरुजी के प्रवचनों का श्रवण किया। कथा के दौरान आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने गीता के उपदेशों को दैनिक जीवन में अपनाने और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा प्राप्त की।

कथा के साथ तीन दिवसीय निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन

धार्मिक आयोजन के साथ सामाजिक सेवा का संदेश देते हुए कथा के उपरांत निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर भी आयोजित किया गया। रायपुर के रोहिणीपुरम तालाब, डगरिया स्थित वासुदेव हॉस्पिटल की चिकित्सकीय टीम ने शिविर में पहुंचे श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य जांच की।

आयोजकों के अनुसार, यह निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर कथा के दौरान लगातार तीन दिनों तक संचालित किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ प्राप्त कर सकें।

इस प्रकार गीता ज्ञान अमृत वर्षा कथा के माध्यम से जहां श्रद्धालुओं को ज्ञान, भक्ति, कर्म और आत्मसाक्षात्कार का संदेश दिया जा रहा है, वहीं निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर के माध्यम से जनसेवा की पहल भी की जा रही है।