रायगढ़ में हजारों आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं का प्रदर्शन, नियमितीकरण और मानदेय वृद्धि की मांग को लेकर सड़कों पर उतरीं महिलाएं

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में हजारों आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं ने नियमितीकरण, मानदेय वृद्धि, पदोन्नति और सामाजिक सुरक्षा सहित विभिन्न लंबित मांगों को लेकर रैली निकाली। महिलाओं ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। कार्यकर्ताओं के लिए 30 हजार और सहायिकाओं के लिए 25 हजार 500 रुपये मासिक मानदेय की मांग की गई। संगठन ने सरकार से मांगों के शीघ्र निराकरण की अपील की है।

Oct 28, 2026 - 08:14
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रायगढ़ में हजारों आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं का प्रदर्शन, नियमितीकरण और मानदेय वृद्धि की मांग को लेकर सड़कों पर उतरीं महिलाएं

UNITED NEWS OF ASIA. महेंद्र अग्रवाल, रायगढ़ l छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं ने अपनी लंबित मांगों को लेकर बड़ा प्रदर्शन किया। हजारों की संख्या में महिला कार्यकर्ता-सहायिकाएं सड़कों पर उतरीं और रैली निकालते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं। यहां उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर नियमितीकरण, मानदेय वृद्धि, पदोन्नति और सामाजिक सुरक्षा सहित विभिन्न मांगों के शीघ्र निराकरण की अपील की। प्रदर्शन में महिलाओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिली।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका संयुक्त मंच एवं सशक्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका संघ, छत्तीसगढ़ के बैनर तले आयोजित प्रदर्शन में महिलाओं ने अपनी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। संगठन के अनुसार, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं बच्चों के पोषण, प्रारंभिक शिक्षा, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा सरकारी योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके बावजूद उन्हें पर्याप्त मानदेय और सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

ज्ञापन में सबसे प्रमुख मांग आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं की सेवाओं का नियमितीकरण करने की रखी गई। संगठन ने मांग की कि नियमितीकरण होने तक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रतिमाह 30 हजार रुपये और सहायिकाओं को 25 हजार 500 रुपये का भुगतान किया जाए। महिलाओं का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच वर्तमान मानदेय से परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है।

इसके अलावा संगठन ने पदोन्नति प्रक्रिया में वरिष्ठता को प्राथमिकता देने की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि लंबे समय से कार्यरत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पर्यवेक्षक और सहायिकाओं को कार्यकर्ता के पद पर पदोन्नति का अवसर मिलना चाहिए। पदोन्नति में आयु संबंधी प्रतिबंध हटाकर वरिष्ठता के आधार पर अवसर उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई।

प्रदर्शनकारी महिलाओं ने समूह बीमा, पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ देने की मांग की। संगठन का कहना है कि वर्षों तक सेवाएं देने वाली महिलाओं के भविष्य की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है। इसके साथ ही सेवा के दौरान आकस्मिक मृत्यु होने पर संबंधित परिवार को आर्थिक सहायता और अनुकंपा नियुक्ति का लाभ देने की मांग भी रखी गई।

ज्ञापन में आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में पांच लाख रुपये की सहायता राशि तथा तीन लाख रुपये की एकमुश्त सहायता राशि का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा मध्यप्रदेश की तर्ज पर प्रतिवर्ष मानदेय में एक हजार रुपये की वृद्धि करने की मांग भी की गई, ताकि बढ़ती महंगाई के बीच कार्यकर्ता-सहायिकाओं को आर्थिक राहत मिल सके।

महिलाओं ने आंगनबाड़ी केंद्रों के नियमित संचालन के अतिरिक्त सौंपे जाने वाले विभागीय कार्यों को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि अतिरिक्त जिम्मेदारियों के कारण कार्यभार बढ़ता है, जिससे केंद्रों के मूल कार्य प्रभावित हो सकते हैं।

रायगढ़ में आयोजित इस प्रदर्शन के माध्यम से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं ने राज्य सरकार से अपनी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की। संगठन ने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री और संबंधित विभाग उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सकारात्मक कदम उठाएंगे।

फिलहाल आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं को शासन के निर्णय का इंतजार है। अब देखना होगा कि नियमितीकरण, मानदेय वृद्धि और सामाजिक सुरक्षा जैसी लंबित मांगों को लेकर राज्य सरकार क्या कदम उठाती है।