परफॉर्मेंस गारंटी में ही उखड़ने लगी 636 करोड़ की सड़क, 2 ठेकेदारों और 6 इंजीनियरों को नोटिस
बालोद जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-930 परियोजना के तहत बनी सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं। झलमला से कोहका-महाराष्ट्र सीमा तक सड़क निर्माण के बाद परफॉर्मेंस गारंटी अवधि में ही कई जगह सड़क की सतह उखड़ने और क्षतिग्रस्त होने की शिकायतें सामने आई हैं। विभाग ने मामले में दो ठेकेदारों और छह इंजीनियरों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। ठेकेदारों को जवाब देने के लिए 15 दिन और इंजीनियरों को तीन दिन का समय दिया गया है। संबंधित पक्षों के जवाब के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
UNITED NEWS OF ASIA. सुनील साहू, बालोद l राष्ट्रीय राजमार्ग-930 परियोजना के तहत निर्मित सड़क की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। झलमला से कोहका-महाराष्ट्र सीमा तक सड़क निर्माण के बाद कई स्थानों पर सड़क की सतह उखड़ने और क्षतिग्रस्त होने की शिकायतें सामने आई हैं। मामला सामने आने के बाद संबंधित विभाग ने दो ठेकेदारों और छह इंजीनियरों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। खास बात यह है कि सड़क की स्थिति परफॉर्मेंस गारंटी अवधि के दौरान ही खराब होने की बात सामने आई है।
शेरपार–मानपुर–कोहका मार्ग पर गुणवत्ता को लेकर सवाल
जानकारी के अनुसार, शेरपार–मानपुर–कोहका मार्ग पर सड़क निर्माण कार्य अधूरा और गुणवत्ताहीन रहने की बात विभागीय स्तर पर सामने आई है। निर्माण के बाद ही सड़क की सतह खराब होने से काम की गुणवत्ता और निर्माण के बाद रखरखाव की निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं। विभाग ने मामले की जांच और निरीक्षण के बाद संबंधित ठेकेदारों तथा इंजीनियरों से स्पष्टीकरण मांगा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य इंजीनियर की ओर से ठेकेदारों को जवाब देने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है, जबकि संबंधित इंजीनियरों को तीन दिन के भीतर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए गए हैं। नोटिस के माध्यम से निर्माण कार्य में सामने आई कमियों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर जवाब मांगा गया है।
636 करोड़ रुपये की परियोजना पर उठे सवाल
राष्ट्रीय राजमार्ग-930 परियोजना के दो चरणों में कुल 636 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी दी गई है। पहले चरण में झलमला से शेरपार तक लगभग 35 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया गया, जबकि दूसरे चरण में शेरपार से कोहका-महाराष्ट्र सीमा तक लगभग 48 किलोमीटर सड़क का काम शामिल बताया गया है।
इतनी बड़ी लागत की परियोजना में सड़क की सतह का परफॉर्मेंस गारंटी अवधि के दौरान ही खराब होने की शिकायतों ने निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सड़क निर्माण के दौरान गुणवत्ता सुनिश्चित करने और काम पूरा होने के बाद उसकी स्थिति पर नजर रखने की जिम्मेदारी संबंधित विभागीय अधिकारियों की भी होती है। इसी कारण मामले में इंजीनियरों की भूमिका को लेकर भी जवाब मांगा गया है।
नोटिस के जवाब के बाद होगी आगे की कार्रवाई
सड़क की खराब स्थिति को लेकर स्थानीय स्तर पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। विभागीय जांच के बाद संबंधित ठेकेदारों और इंजीनियरों को नोटिस जारी किया गया है। अब सभी संबंधित पक्षों के जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी में नोटिस जारी होने और जवाब मांगे जाने की पुष्टि की गई है। अंतिम कार्रवाई तथा सड़क की मरम्मत को लेकर आगे क्या निर्णय लिया जाता है, यह संबंधित पक्षों के जवाब और विभागीय प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होगा। इस मामले में सड़क निर्माण की गुणवत्ता, सरकारी राशि के उपयोग और रखरखाव की जिम्मेदारी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे सामने आए हैं।