छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता पर जनभागीदारी, बिलासपुर में आठ जिलों के प्रतिनिधियों ने दिए सुझाव
छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता का प्रारूप तैयार करने के लिए बिलासपुर में संभाग स्तरीय परामर्श बैठक आयोजित की गई। इसमें आठ जिलों के सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों पर सुझाव दिए। समिति के सदस्य शत्रुघ्न सिंह ने कहा कि प्रस्तावित संहिता का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को मजबूत करना है। आम नागरिक 30 अक्टूबर 2026 तक आधिकारिक वेबसाइट और ई-मेल के माध्यम से अपने सुझाव दे सकते हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) का प्रारूप तैयार करने की प्रक्रिया में जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए बिलासपुर में संभाग स्तरीय समूह चर्चा एवं परामर्श बैठक आयोजित की गई। देवकी नंदन दीक्षित सभागृह, लाल बहादुर शास्त्री स्कूल परिसर में हुई इस बैठक में बिलासपुर संभाग के आठ जिलों के सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठनों सहित विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार और सुझाव रखे। बैठक में विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में राज्य शासन द्वारा गठित समान नागरिक संहिता उच्च स्तरीय समिति के सदस्य एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह और एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार, सेवानिवृत्त प्राचार्य ज्योति रानी सिंह, रायपुर संभागायुक्त एवं समिति के सचिव श्याम धावड़े तथा बिलासपुर संभागायुक्त सुनील जैन उपस्थित रहे। प्रतिनिधियों ने समिति के समक्ष पारिवारिक कानूनों, सामाजिक परंपराओं और कानूनी सुधारों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपनी राय रखी।
महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को मजबूत करने पर जोर
समिति के सदस्य शत्रुघ्न सिंह ने समान नागरिक संहिता की पृष्ठभूमि और आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान में पारिवारिक विषयों से संबंधित दो दर्जन से अधिक कानून और प्रावधान प्रचलित हैं, जिनमें कई तरह की भिन्नताएं हैं। समान नागरिक संहिता पर विचार का उद्देश्य पारिवारिक मामलों में समानता को बढ़ावा देना तथा महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को अधिक मजबूत बनाना है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 44 का उल्लेख करते हुए कहा कि इस विषय पर उच्चतम न्यायालय ने भी विभिन्न निर्णयों में आवश्यकता रेखांकित की है।
शत्रुघ्न सिंह ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित समान नागरिक संहिता का संबंध विवाह, विवाह-विच्छेद, भरण-पोषण और उत्तराधिकार जैसे नागरिक एवं पारिवारिक विषयों से है। उनके अनुसार, इसमें किसी भी धर्म की पूजा-पद्धति, धार्मिक आस्था और रीति-रिवाजों में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। विभिन्न समुदायों से प्राप्त सुझावों और मौजूदा कानूनी व्यवस्थाओं के अध्ययन के आधार पर प्रारूप तैयार किया जाएगा।
आठ जिलों के प्रतिनिधियों ने रखे विचार
परामर्श बैठक में बिलासपुर, मुंगेली, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, जांजगीर-चांपा, कोरबा, रायगढ़, सक्ती और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सामाजिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं, राजनीतिक संगठनों, शिक्षाविदों, विधि विशेषज्ञों और नागरिकों ने समान नागरिक संहिता के पक्ष और विपक्ष में अपने विचार रखे। चर्चा में पारंपरिक मान्यताओं, विभिन्न समुदायों की प्रथाओं और आधुनिक कानूनी सुधारों से जुड़े मुद्दे सामने आए। समिति ने आश्वस्त किया कि सभी सुझावों का अध्ययन किया जाएगा।
समिति छत्तीसगढ़ की वर्तमान कानूनी स्थिति के साथ अन्य राज्यों में प्रचलित व्यवस्थाओं का भी अध्ययन कर रही है। नागरिकों और संबंधित पक्षों से प्राप्त सुझावों के आधार पर संहिता का प्रारूप तथा आवश्यक विधायी और प्रशासनिक अनुशंसाएं राज्य शासन को प्रस्तुत की जाएंगी।
30 अक्टूबर तक दे सकते हैं सुझाव
आम नागरिक और संगठन 30 अक्टूबर 2026 तक आधिकारिक वेबसाइट ucc.cgstate.gov.in पर अपने सुझाव दे सकते हैं। इसके लिए ई-मेल पता ucc-chhattisgarh@cg.gov.in भी उपलब्ध कराया गया है। बैठक में विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में नागरिकों की सहभागिता रही।