रायपुर में 650 किलो संदिग्ध नकली पनीर जब्त, फैक्ट्री पर कार्रवाई को लेकर उठे सवाल
रायपुर के कन्हेरा स्थित एक फैक्ट्री से ओडिशा भेजे जा रहे करीब 650 किलो संदिग्ध नकली पनीर को खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम ने जब्त किया। कार्रवाई के दौरान पनीर 13 पेटियों में मिला। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संरक्षण आयोग के प्रदेश प्रवक्ता अफरोज ख्वाजा ने इसकी सूचना विभाग को दी थी। फैक्ट्री में छापे की कार्रवाई नहीं होने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। पनीर का नमूना जांच के लिए भेजा गया है।
UNITED NEWS OF ASIA. हसीब अख्तर, रायपुर l रायपुर में खाद्य सुरक्षा से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जहां बिलासपुर बाईपास के कन्हेरा स्थित एक फैक्ट्री से ओडिशा भेजे जा रहे करीब 650 किलो संदिग्ध नकली पनीर को जब्त किया गया है। यह पनीर 13 पेटियों में पैक था और इसे ओडिशा सप्लाई करने की तैयारी की जा रही थी। मामले की सूचना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संरक्षण आयोग के प्रदेश प्रवक्ता अफरोज ख्वाजा की ओर से खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम को दिए जाने की बात सामने आई है।
जानकारी के अनुसार, कन्हेरा स्थित फैक्ट्री से पनीर को महिंद्रा बोलेरो वाहन क्रमांक CG-04-QJ-3906 के जरिए लाकर जोरा माल के पास ओडिशा जाने वाली बस क्रमांक OD-07-F-9181 में लोड किया जा रहा था। इसी दौरान अफरोज ख्वाजा की नजर पनीर की खेप पर पड़ी। उन्होंने तत्काल खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अधिकारियों को इसकी सूचना दी। इसके बाद मौके पर पहुंची टीम ने करीब 650 किलो पनीर जब्त किया।
जब्त पनीर की पैकिंग पर मलाई पनीर लिखा हुआ बताया गया है। आरोप है कि इसे ओडिशा भेजने की तैयारी थी। हालांकि पनीर की गुणवत्ता और उसमें मिलावट या नकली सामग्री होने की वास्तविक स्थिति जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी। खाद्य विभाग की टीम ने मौके से पनीर का नमूना लेकर जांच के लिए भेजा है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होने की संभावना है।
मामले में एक अन्य गंभीर सवाल फैक्ट्री में कार्रवाई को लेकर उठाया गया है। शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि जिस फैक्ट्री से पनीर निकाला जा रहा था, वहां पहुंचकर निरीक्षण या छापे की कार्रवाई नहीं की गई। आरोप है कि जिला अभिहित अधिकारी विनोद गुप्ता ने फैक्ट्री में जाकर कार्रवाई करने से इनकार किया। हालांकि इस संबंध में विभाग की ओर से आधिकारिक पक्ष और कार्रवाई के कारणों की विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
बताया गया है कि इसी फैक्ट्री से पहले भी खाद्य विभाग की टीम द्वारा पनीर के नमूने लिए जा चुके हैं। आरोप है कि पूर्व में लिए गए नमूने जांच में मानकों पर खरे नहीं उतरे थे। ऐसे में एक बार फिर उसी परिसर से पनीर की खेप पकड़े जाने के बाद खाद्य सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि पुराने नमूनों की जांच रिपोर्ट और वर्तमान जब्त खेप के बीच संबंध की पुष्टि आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकेगी।
शिकायतकर्ता पक्ष का यह भी दावा है कि खाद्य विभाग की टीम के मौके पर पहुंचने में देरी हुई। इसी दौरान पनीर से लदी एक अन्य गाड़ी वहां से निकल गई। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में यह भी बताया गया है कि अफरोज ख्वाजा ने जब्त पनीर के नमूने की जांच अपने निजी खर्च पर कराने की पहल की है।
फिलहाल खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा जब्त पनीर के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पनीर वास्तव में खाद्य मानकों के अनुरूप था या उसमें किसी तरह की मिलावट अथवा अन्य अनियमितता पाई जाती है। यदि जांच में पनीर मानकों के विपरीत पाया जाता है तो संबंधित फैक्ट्री और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इस पूरे मामले ने रायपुर में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, निगरानी व्यवस्था और संदिग्ध खाद्य उत्पादों की सप्लाई पर प्रभावी कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज कर दी है।