पिथौरा में मृत महिला के नाम दर्ज जमीन की रजिस्ट्री पर सवाल, वृद्धा से अंगूठा लगवाकर धोखाधड़ी का आरोप
महासमुंद जिले के पिथौरा क्षेत्र में जमीन की रजिस्ट्री को लेकर कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2006 में निधन हो चुकी आसिन बाई के नाम दर्ज 10 डिसमिल जमीन की रजिस्ट्री मानोबाई से अंगूठा लगवाकर कराई गई। मामले में नोटरी सत्यापन, रजिस्ट्री प्रक्रिया और राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज किए जाने की जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना बाकी है।
UNITED NEWS OF ASIA. शिखा दास, महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के पिथौरा क्षेत्र में जमीन की रजिस्ट्री को लेकर कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। ग्राम डोंगाझर की एक वृद्ध महिला मानोबाई से अंगूठा लगवाकर जमीन की रजिस्ट्री कराए जाने का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का दावा है कि संबंधित भूमि पहले से ही वर्ष 2006 में निधन हो चुकी आसिन बाई के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है। मामले में नोटरी सत्यापन, रजिस्ट्री प्रक्रिया और राजस्व रिकॉर्ड में नामांतरण को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर मामले की जांच और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
मृत महिला के नाम दर्ज जमीन को लेकर विवाद
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिथौरा तहसील के भुरकोनी राजस्व क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम चुर्रुपाली, पटवारी हल्का नंबर 00025 में सड़क किनारे स्थित भूमि खसरा नंबर 115 का क्षेत्रफल 10 डिसमिल बताया गया है। ग्रामीणों के अनुसार, यह भूमि आसिन पति विसंभर पांडे के नाम पर दर्ज है, जिनका निधन वर्ष 2006 में हो चुका था। आरोप है कि इसके बावजूद भूमि की रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। इस संबंध में भूमि के स्वामित्व, दस्तावेजों और रजिस्ट्री की वैधता की जांच की मांग की जा रही है।
मानोबाई से अंगूठा लगवाने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि मानोबाई की पहचान का उपयोग करते हुए उनसे अंगूठा लगवाया गया और 16 अक्टूबर 2026 को भूमि की रजिस्ट्री कर दी गई। आरोपों के मुताबिक, प्रक्रिया में पहचान संबंधी दस्तावेजों और नोटरी सत्यापन की भूमिका की जांच जरूरी है। इसके बाद भूमि को 58 वर्षीय खरीदार भानसिंह चक्रधारी के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, रजिस्ट्री दस्तावेजों और संबंधित रिकॉर्ड की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
रजिस्ट्री कार्यालय की भूमिका पर भी सवाल
मामले की जानकारी गांव में फैलने के बाद ग्रामीणों, सरपंच और अन्य पंचों ने घटना से जुड़े तथ्यों का पता लगाने का प्रयास किया। बताया गया है कि ग्रामीणों के एक समूह ने पिथौरा रजिस्ट्री कार्यालय से दस्तावेजों की नकल निकलवाई। इसके बाद कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए गए। ग्रामीणों ने नोटरी और रजिस्ट्रार की भूमिका की जांच करने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि रजिस्ट्री के दौरान नियमों और आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं।
एसपी से शिकायत, निष्पक्ष जांच की मांग
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पहले स्थानीय स्तर पर शिकायत किए जाने के बाद ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक से संपर्क कर मामले में कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीण चाहते हैं कि संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाए, मानोबाई सहित संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जाएं और भूमि के स्वामित्व तथा रजिस्ट्री प्रक्रिया की वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।
अब मामले में प्रशासन और पुलिस की जांच महत्वपूर्ण होगी। आरोपों की पुष्टि दस्तावेजों, संबंधित पक्षों के बयान और आधिकारिक जांच के आधार पर ही हो सकेगी। संबंधित अधिकारियों और अन्य पक्षों का जवाब मिलने पर मामले की स्थिति और स्पष्ट हो पाएगी।