मोहला में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की विशाल रैली, नियमितीकरण व मानदेय बढ़ोतरी सहित 5 मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन
मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में मंगलवार को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने अपनी पांच प्रमुख मांगों को लेकर रैली निकाली। छुरिया मंदिर से कलेक्टर कार्यालय तक निकाली गई रैली के बाद मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा गया। प्रदर्शनकारियों ने नियमितीकरण, पदोन्नति और मानदेय में बढ़ोतरी सहित विभिन्न मांगों पर जल्द निर्णय लेने की अपील की। उनका कहना है कि मौजूदा मानदेय में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है।
UNITED NEWS OF ASIA. जावेद सेख, मोहला। छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में मंगलवार को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने अपनी पांच प्रमुख मांगों को लेकर विशाल रैली निकाली। सैकड़ों की संख्या में जुटीं कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने छुरिया मंदिर से कलेक्टर कार्यालय तक रैली निकालकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। रैली के समापन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा और मांगों पर जल्द कार्रवाई करने की अपील की।
नियमितीकरण और पदोन्नति की मांग
प्रदर्शन में शामिल आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने नियमितीकरण, पदोन्नति तथा मानदेय में बढ़ोतरी को अपनी प्रमुख मांग बताया। उनका कहना है कि वे लंबे समय से महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इसके बावजूद उन्हें मिलने वाला मानदेय उनकी जिम्मेदारियों और वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों के हिसाब से पर्याप्त नहीं है।
कार्यकर्ताओं ने सरकार से मांग की कि उनकी सेवाओं को नियमित करने की दिशा में उचित कदम उठाए जाएं। इसके साथ ही पदोन्नति की व्यवस्था को बेहतर बनाने और लंबे समय से लंबित सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान करने की जरूरत बताई गई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने से कर्मचारियों को राहत मिल सकती है।
मानदेय में प्रतिवर्ष एक हजार रुपये बढ़ोतरी की मांग
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने मध्यप्रदेश की तर्ज पर प्रतिवर्ष एक हजार रुपये मानदेय बढ़ाने की मांग भी रखी। उनका कहना है कि महंगाई लगातार बढ़ रही है, जबकि सीमित मानदेय में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में नियमित बढ़ोतरी से उन्हें आर्थिक राहत मिल सकती है।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, वर्तमान में सहायिकाओं को लगभग 2,700 रुपये और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को करीब 4,500 रुपये मानदेय मिल रहा है। उनका कहना है कि इस राशि में घरेलू खर्च, बच्चों की पढ़ाई और अन्य आवश्यकताओं को पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। उन्होंने सरकार से काम और जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए मानदेय में उचित वृद्धि करने की मांग की।
मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन
रैली के बाद कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के प्रतिनिधिमंडल ने तहसीलदार के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में पांच प्रमुख मांगों पर गंभीरता से विचार करने और जल्द निर्णय लेने की अपील की गई। प्रदर्शनकारियों ने उम्मीद जताई कि सरकार उनकी समस्याओं को समझते हुए आर्थिक और सेवा संबंधी राहत देने के लिए कदम उठाएगी।
सरकार के निर्णय पर टिकी निगाहें
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की यह रैली उनकी लंबित मांगों को लेकर असंतोष और अपेक्षाओं को सामने लाती है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं के संचालन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाती हैं, इसलिए उनकी सेवा शर्तों और मानदेय से जुड़े मुद्दों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार नियमितीकरण, पदोन्नति और मानदेय बढ़ोतरी सहित उठाई गई मांगों पर क्या निर्णय लेती है। फिलहाल कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को अपनी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई की उम्मीद है।