SIR पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज, राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं ने दायर की याचिका

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं की याचिका पर सुनवाई होनी है। विपक्ष ने SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने, चुनाव आयोग के फैसलों की जांच करने और संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की है। वहीं, चुनाव आयोग ने हलफनामा दाखिल कर कहा है कि फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया और SIR से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।

Oct 27, 2026 - 13:14
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SIR पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज, राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं ने दायर की याचिका

UNITED NEWS OF ASIA. स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट में राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई होनी है। विपक्षी नेताओं ने SIR प्रक्रिया को रद्द करने और इस पर रोक लगाने की मांग की है। याचिका में चुनाव आयोग के फैसलों की जांच करने तथा प्रक्रिया से संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग भी शामिल है। इस मामले में शीर्ष अदालत का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसका संबंध मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रिया से है।

इससे पहले 15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में मामले की पहली सुनवाई हुई थी। उस दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा अन्य चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी किया था। अदालत ने इस याचिका को SIR से संबंधित पहले से लंबित मामलों के साथ जोड़ने का निर्देश भी दिया था। अब विपक्ष की मांगों और चुनाव आयोग के जवाब पर आगे की सुनवाई होनी है।

सुनवाई से एक दिन पहले चुनाव आयोग ने भी सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया। आयोग ने अपने जवाब में कहा कि SIR प्रक्रिया के दौरान फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है। आयोग के अनुसार, निर्धारित नियमों के तहत फॉर्म में संशोधन करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि SIR से संबंधित फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। हलफनामे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के हस्ताक्षर होने की बात कही गई है।

क्या है फॉर्म-6 को लेकर विवाद?

इस विवाद की शुरुआत एक मीडिया रिपोर्ट के बाद हुई थी। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि फॉर्म-6 में बदलाव से संबंधित जानकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अन्य दो चुनाव आयुक्तों को नहीं दी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कथित बदलाव को लेकर आपत्ति जताई थी। इसमें आवेदकों से स्वयं, अपने माता-पिता या दादा-दादी अथवा नाना-नानी को पिछली SIR प्रक्रिया से जोड़ने वाली जानकारी देने की बात सामने आई थी।

हालांकि, चुनाव आयोग ने इन दावों पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि ऑनलाइन आवेदन प्लेटफॉर्म पर जानकारी जिस तरह प्रदर्शित की गई थी, उससे फॉर्म-6 में बदलाव होने का आभास हो सकता था। आयोग का कहना है कि याचिका मीडिया रिपोर्ट पर आधारित है और केवल रिपोर्ट को कानूनी सबूत नहीं माना जा सकता। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित फॉर्म में बदलाव करने का अधिकार सरकार के पास है। उसके अनुसार, SIR के दौरान मांगा गया घोषणा-पत्र अलग दस्तावेज है और इसे फॉर्म-6 में संशोधन नहीं माना जाना चाहिए।

अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान विपक्षी नेताओं की मांगों और चुनाव आयोग के पक्ष पर विचार किया जाएगा। इस मामले में अदालत क्या निर्देश देती है, इस पर राजनीतिक दलों और मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया से जुड़े लोगों की नजरें टिकी हैं। फिलहाल, याचिका पर अंतिम निर्णय या किसी नई व्यवस्था को लेकर कोई निष्कर्ष निकालना अदालत की सुनवाई और आदेश पर निर्भर करेगा।