इंदौर में Gen-Z को पंडित इंद्रेश उपाध्याय की सलाह, बोले— युवा ‘यूजलेस’ नहीं, ‘यूज्ड-लेस’ हैं

इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में आयोजित जेनजी चर्चा में कथावाचक पंडित इंद्रेश उपाध्याय ने युवाओं के धैर्य, भक्ति, सोशल मीडिया के इस्तेमाल और राजनीतिक भागीदारी पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि युवा बेकार नहीं हैं, बल्कि उनकी क्षमता का पर्याप्त उपयोग नहीं हो रहा है। उन्होंने युवाओं को नियमित नाम जप, सकारात्मक सोच, आलोचना से सीखने और समाज के हित में काम करने की सलाह दी।

Oct 26, 2026 - 19:32
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इंदौर में Gen-Z को पंडित इंद्रेश उपाध्याय की सलाह, बोले— युवा ‘यूजलेस’ नहीं, ‘यूज्ड-लेस’ हैं

UNITED NEWS OF ASIA. इंदौर। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में आयोजित जेनजी चर्चा के दौरान कथावाचक पंडित इंद्रेश उपाध्याय ने युवाओं के जीवन, उनकी चुनौतियों, धार्मिक आस्था, सोशल मीडिया और राजनीतिक भागीदारी जैसे मुद्दों पर अपने विचार रखे। उन्होंने युवाओं को केवल उनकी कमियों के आधार पर आंकने के बजाय उनकी क्षमताओं को पहचानने और उन्हें आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर देने की आवश्यकता पर जोर दिया। चर्चा के दौरान उनका एक बयान खास तौर पर चर्चा में रहा। उन्होंने कहा कि Gen-Z ‘यूजलेस’ नहीं, बल्कि ‘यूज्ड-लेस’ है। उनके मुताबिक, युवा बेकार नहीं हैं, बल्कि उनकी प्रतिभा और ऊर्जा का पर्याप्त इस्तेमाल नहीं हो रहा है।

पंडित इंद्रेश उपाध्याय ने युवाओं को धैर्य विकसित करने की सलाह देते हुए नियमित रूप से भगवान का नाम जपने की बात कही। उन्होंने सुझाव दिया कि युवा 30 दिनों तक ‘राम-राम’ या ‘ॐ नमः शिवाय’ जैसे किसी एक नाम का नियमित जप करके अपने अनुभव को समझें। उन्होंने कहा कि भक्ति का महत्वपूर्ण गुण सहनशीलता है। उनके अनुसार, नियमित साधना, सकारात्मक विचार और व्यवहार में संयम व्यक्ति को क्रोध तथा जल्दबाजी पर नियंत्रण रखने में मदद कर सकते हैं।

चर्चा के दौरान उन्होंने अपनी व्यस्त दिनचर्या का उदाहरण भी दिया। उन्होंने बताया कि धार्मिक कार्यक्रमों, यात्राओं, कथाओं और लोगों से मुलाकात के बीच कई बार आराम तथा भोजन के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। इसके बावजूद सार्वजनिक मंच पर उपस्थित लोगों की अपेक्षाओं को संभालना पड़ता है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को बाहर से देखकर उसके जीवन को आसान नहीं मानना चाहिए, क्योंकि हर किसी की अपनी परिस्थितियां और परेशानियां होती हैं। ऐसे में धैर्य और मानसिक स्थिरता बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

युवाओं की राजनीतिक भागीदारी पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि देश की राजनीतिक व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं में युवाओं को अधिक अवसर मिलने चाहिए। उन्होंने ‘यूज्ड-लेस’ शब्द के माध्यम से युवाओं की क्षमता का पर्याप्त उपयोग नहीं होने की बात उठाई। उनका कहना था कि युवाओं को केवल आलोचना का विषय बनाने के बजाय जिम्मेदारियां सौंपने और उनकी प्रतिभा को सामने लाने की जरूरत है।

पंडित इंद्रेश उपाध्याय ने युवाओं में बढ़ती अधीरता पर चिंता जताते हुए कहा कि मनचाहे परिणाम नहीं मिलने पर निराश होने के बजाय लगातार प्रयास करते रहना चाहिए। उन्होंने विराट कोहली, सचिन तेंदुलकर और महेंद्र सिंह धोनी जैसे खिलाड़ियों का उदाहरण देते हुए कठिन परिस्थितियों में भी लक्ष्य की ओर बढ़ते रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि असफलताओं और आलोचनाओं से सीखने की क्षमता व्यक्ति को आगे बढ़ने में मदद करती है।

सोशल मीडिया पर धार्मिक गतिविधियों के प्रदर्शन को लेकर उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों पर जाना और अनुभव साझा करना गलत नहीं है, लेकिन भक्ति का उद्देश्य केवल वीडियो या पोस्ट बनाना नहीं होना चाहिए। युवाओं को वहां के आध्यात्मिक अनुभव और अपनी आस्था के व्यक्तिगत भाव को भी महत्व देना चाहिए। उन्होंने चुगली, अनावश्यक गॉसिप और दूसरों की बुराई से बचने की सलाह देते हुए मौन, करुणा और सकारात्मक व्यवहार को महत्वपूर्ण बताया।

भारतीय संस्कृति और पारंपरिक पहनावे का उल्लेख करते हुए उन्होंने युवाओं से अपनी परंपराओं के मूल्यों को समझने की अपील की। अहिल्याबाई होल्कर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जीवन का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता और सुविधाएं हासिल करना नहीं, बल्कि ऐसा कार्य करना भी होना चाहिए जिससे समाज और आने वाली पीढ़ियों को लाभ मिले।

इस चर्चा का मुख्य संदेश युवाओं में धैर्य, आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और सामाजिक जिम्मेदारी विकसित करने से जुड़ा रहा। पंडित इंद्रेश उपाध्याय ने युवाओं को अपनी गलतियों से सीखने, दूसरों के प्रति संवेदनशील रहने और अपनी क्षमताओं का उपयोग समाज के हित में करने की सलाह दी।