बलरामपुर के सरकारी स्कूल में ‘संस्कार सरिता’ पुस्तक वितरण पर विवाद, आसाराम की तस्वीर को लेकर उठे सवाल
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के रघुनाथनगर स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में ‘संस्कार सरिता’ पुस्तक के वितरण को लेकर विवाद सामने आया है। आरोप है कि विद्यार्थियों को पुस्तक पढ़ने और परीक्षा देने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। पुस्तक के मुखपृष्ठ पर आसाराम की तस्वीर होने के कारण अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाए हैं। मामले में जिला शिक्षा अधिकारी और जिला प्रशासन से पुस्तक वितरण, अनुमति तथा संबंधित निर्देशों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की जा रही है।
UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर l बलरामपुर जिले के रघुनाथनगर स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में ‘संस्कार सरिता’ पुस्तक के वितरण को लेकर विवाद सामने आया है। आरोप है कि विद्यालय के प्राचार्य महेश प्रजापति द्वारा विद्यार्थियों को यह पुस्तक वितरित की जा रही है और उन्हें इसे पढ़ने तथा इससे संबंधित परीक्षा देने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। पुस्तक के मुखपृष्ठ पर आसाराम की तस्वीर होने के कारण इस मामले ने स्थानीय स्तर पर चर्चा का रूप ले लिया है।
पुस्तक के मुखपृष्ठ को लेकर उठे सवाल
मामले में मुख्य आपत्ति पुस्तक के कवर पेज पर छपी तस्वीर को लेकर है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तस्वीर में आसाराम दिखाई देते हैं, जिन्हें नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराया गया था। इस वजह से अभिभावकों और जागरूक नागरिकों ने सवाल उठाए हैं कि सरकारी विद्यालय में इस पुस्तक का वितरण किस आधार पर किया जा रहा है। उनका कहना है कि विद्यार्थियों को दी जाने वाली अध्ययन सामग्री के चयन में पारदर्शिता और विभागीय नियमों का पालन जरूरी है।
हालांकि, पुस्तक वितरण के पीछे विद्यालय प्रबंधन का क्या पक्ष है और इसे पढ़ाने के लिए कोई आधिकारिक निर्देश जारी हुआ था या नहीं, इसकी पुष्टि संबंधित विभाग की जांच के बाद ही हो सकेगी।
विद्यार्थियों पर दबाव बनाने के आरोप
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि विद्यार्थियों को पुस्तक पढ़ने और परीक्षा देने के लिए कहा जा रहा है। इस संबंध में सवाल उठ रहे हैं कि क्या पुस्तक को विद्यालय की नियमित पढ़ाई या परीक्षा व्यवस्था में शामिल करने के लिए शिक्षा विभाग से अनुमति ली गई थी। यदि पुस्तक को अनिवार्य रूप से पढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, तो उसके पीछे का आदेश और उद्देश्य स्पष्ट होना जरूरी है।
अभिभावकों की चिंता है कि विद्यार्थियों को दी जाने वाली सामग्री का चयन शैक्षणिक उद्देश्यों और निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप होना चाहिए। इस मामले में विद्यालय प्रबंधन और शिक्षा विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
DEO और जिला प्रशासन से जांच की मांग
विवाद को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की जा रही है। जांच के तहत यह स्पष्ट करने की अपेक्षा है कि पुस्तक किसके निर्देश पर वितरित की गई, इसकी खरीद या वितरण के लिए धनराशि किसने उपलब्ध कराई और क्या इस संबंध में कोई विभागीय आदेश जारी हुआ था।
इसके साथ ही यह भी पता लगाने की मांग की जा रही है कि विद्यार्थियों को पुस्तक पढ़ने और परीक्षा देने के लिए बाध्य किए जाने के आरोपों में कितनी सच्चाई है। यदि किसी नियम के उल्लंघन या विद्यार्थियों पर अनुचित दबाव डालने की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की मांग उठाई गई है।
शिक्षा व्यवस्था और जवाबदेही का मुद्दा
इस पूरे मामले ने सरकारी विद्यालयों में अध्ययन सामग्री के चयन, विद्यार्थियों की पढ़ाई और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय स्तर पर मांग की जा रही है कि शिक्षा विभाग तथ्यों की जांच कर स्थिति स्पष्ट करे और यह सुनिश्चित करे कि विद्यालयों में निर्धारित शैक्षणिक मानकों तथा विभागीय निर्देशों का पालन हो।
फिलहाल पुस्तक वितरण को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। ऐसे में जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे, जिनसे यह स्पष्ट हो सकेगा कि पुस्तक किस उद्देश्य से वितरित की गई और क्या इस प्रक्रिया में किसी नियम का उल्लंघन हुआ है।