मिनीमाता महतारी जतन योजना बनी सहारा, दूसरी संतान के जन्म पर दुर्गा को मिले 20 हजार रुपए

कवर्धा जिले के ग्राम पैलपार की निर्माण श्रमिक दुर्गा सिन्हा को दूसरी संतान के जन्म के बाद मिनीमाता महतारी जतन योजना के तहत 20 हजार रुपए की एकमुश्त सहायता राशि मिली। परिवार की सीमित आमदनी के बीच नवजात की देखभाल, पोषण और अन्य जरूरी खर्चों को पूरा करने में यह राशि मददगार बनी। सेवा संकल्प अभियान के तहत सामने आई यह कहानी जरूरत के समय सरकारी सहायता मिलने से परिवार को मिली राहत को दर्शाती है।

Sep 29, 2026 - 18:35
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मिनीमाता महतारी जतन योजना बनी सहारा, दूसरी संतान के जन्म पर दुर्गा को मिले 20 हजार रुपए

UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा l परिवार में नन्हे मेहमान के आने की खुशी के साथ कई बार बढ़े हुए खर्च की चिंता भी सामने आती है। कबीरधाम जिले के ग्राम पैलपार की रहने वाली दुर्गा सिन्हा के परिवार के सामने भी दूसरी संतान के जन्म के बाद अतिरिक्त जरूरतों को पूरा करने की चुनौती थी। ऐसे समय में मिनीमाता महतारी जतन योजना के तहत मिली 20 हजार रुपए की एकमुश्त सहायता राशि परिवार के लिए मददगार बनी।

दुर्गा सिन्हा छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अंतर्गत पंजीकृत निर्माण श्रमिक हैं। वह मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करती हैं। परिवार की आय सीमित होने के कारण बच्चे के जन्म के बाद बढ़ने वाले खर्चों को लेकर चिंता थी। इसी दौरान योजना के तहत उन्हें आर्थिक सहायता प्राप्त हुई।

नवजात की जरूरतों में मिली आर्थिक मदद

दुर्गा के अनुसार बच्चे के जन्म के बाद स्वास्थ्य, पोषण और देखभाल से जुड़ी जरूरतों को लेकर अतिरिक्त खर्च सामने आए। सीमित आमदनी में घर के नियमित खर्चों के साथ इन जरूरतों को पूरा करना आसान नहीं था। ऐसे समय में योजना के तहत मिली 20 हजार रुपए की राशि ने परिवार को आर्थिक राहत दी।

दुर्गा ने बताया कि उन्होंने सहायता राशि का उपयोग नवजात की आवश्यकताओं और पौष्टिक आहार की व्यवस्था में किया। आर्थिक सहायता मिलने से उन्हें बच्चे की देखभाल पर ध्यान देने के साथ परिवार के दूसरे जरूरी खर्चों को भी संभालने में सुविधा हुई।

श्रमिक परिवार के लिए बनी सहारा

मिनीमाता महतारी जतन योजना के तहत मिली सहायता ऐसे समय पर परिवार तक पहुंची, जब अतिरिक्त खर्चों की जरूरत थी। दुर्गा के मुताबिक श्रमिक परिवारों के लिए कठिन परिस्थितियों में मिलने वाली इस तरह की आर्थिक सहायता उपयोगी साबित होती है।

सेवा संकल्प अभियान के तहत सामने आई दुर्गा की कहानी यह बताती है कि जरूरत के समय मिलने वाली आर्थिक सहायता परिवारों के लिए राहत का माध्यम बन सकती है। दूसरी संतान के जन्म के बाद मिली 20 हजार रुपए की सहायता से दुर्गा के परिवार को नवजात की देखभाल और पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिली।

दुर्गा सिन्हा की यह कहानी मेहनत-मजदूरी करने वाले परिवारों के लिए सामाजिक सुरक्षा और सहायता योजनाओं के महत्व को सामने रखती है। परिवार के लिए बच्चे का जन्म खुशी का अवसर था, वहीं योजना से मिली आर्थिक मदद ने इस खुशी के साथ जुड़ी खर्च की चिंता को कम करने में सहयोग किया।