कुपोषण से लड़ना ही नहीं, जिले से भगाना है- कलेक्टर रोक्तिमा यादव, गर्भवती महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष जोर

कोरिया जिले में कुपोषण मुक्त समाज और सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने के लिए कलेक्टर रोक्तिमा यादव ने स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास तथा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अधिकारियों की संयुक्त बैठक ली। उन्होंने गर्भवती एवं शिशुवती महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच, पौष्टिक आहार और सतत निगरानी के निर्देश दिए। साथ ही मितानिनों की भूमिका को पूरे परिवार की स्वास्थ्य देखभाल तक विस्तार देने और दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने पर जोर दिया।

Nov 5, 2026 - 08:12
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कुपोषण से लड़ना ही नहीं, जिले से भगाना है- कलेक्टर रोक्तिमा यादव, गर्भवती महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष जोर

UNITED NEWS OF ASIA. जमील अंसारी, कोरिया l जिले को कुपोषण मुक्त बनाने और गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में प्रशासन ने प्रयास तेज कर दिए हैं। कलेक्टर रोक्तिमा यादव ने स्पष्ट कहा है कि कुपोषण से केवल लड़ना ही नहीं, बल्कि उसे जिले से पूरी तरह भगाना है। इसके लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ जिम्मेदारी निभाएं और योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाएं। कलेक्टर ने 4 नवंबर 2026 को कलेक्टरेट सभाकक्ष में स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की संयुक्त बैठक लेकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

बैठक में कलेक्टर ने गर्भवती एवं शिशुवती महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच, पौष्टिक आहार की उपलब्धता और उनकी स्वास्थ्य स्थिति की लगातार निगरानी सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मितानिनों, बीसी सखी, कृषि सखी और पशु सखी के सहयोग से गर्भवती महिलाओं तक नियमित रूप से पहुंच बनाई जाए। उनके खानपान, स्वास्थ्य जांच और पोषण स्तर की जानकारी रखी जाए, ताकि सुरक्षित मातृत्व के साथ स्वस्थ शिशु का जन्म सुनिश्चित किया जा सके।

कलेक्टर ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को निर्देशित किया कि वे महिलाओं को संतुलित और पौष्टिक भोजन के महत्व के बारे में जागरूक करें। गर्भावस्था के दौरान उचित खानपान, समय पर स्वास्थ्य परीक्षण और आवश्यक देखभाल के प्रति परिवारों को भी जागरूक किया जाए। उन्होंने कहा कि मां और बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य के लिए शुरुआती स्तर पर ही आवश्यक सावधानियां बरतना जरूरी है।

बैठक में मितानिनों की भूमिका और उनकी जिम्मेदारियों के विस्तार पर भी चर्चा हुई। कलेक्टर ने कहा कि मितानिन की अवधारणा केवल गर्भवती महिलाओं और बच्चों की देखभाल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य गर्भस्थ शिशु से लेकर परिवार के बुजुर्ग सदस्यों तक सभी के स्वास्थ्य की देखभाल सुनिश्चित करना है। उन्होंने गर्भवती महिलाओं की प्रसवपूर्व जांच, संस्थागत प्रसव, नवजात शिशुओं की देखभाल, नियमित टीकाकरण और कुपोषण की समय पर पहचान पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।

कलेक्टर ने गैर संचारी और संक्रामक बीमारियों की रोकथाम को लेकर भी व्यापक जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया। उन्होंने मधुमेह, उच्च रक्तचाप और कैंसर की स्क्रीनिंग के साथ टीबी, कुष्ठ रोग और सिकल सेल की पहचान के लिए घर-घर संपर्क तथा निर्धारित स्वास्थ्य जांच से लोगों को जोड़ने के निर्देश दिए। इसके अलावा किशोर-किशोरियों को उचित परामर्श, परिवार नियोजन, एचआईवी/एड्स जागरूकता, नशामुक्ति और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में भी सक्रियता से काम करने को कहा।

उन्होंने गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने, उपचार के बाद नियमित फॉलोअप करने और मरीजों को दवाओं का नियमित सेवन करने में सहयोग देने के निर्देश दिए। साथ ही पात्र हितग्राहियों की आभा आईडी और आयुष्मान कार्ड बनवाने में सहायता करने पर भी जोर दिया। कलेक्टर ने कहा कि मितानिनों की भूमिका अब केवल मां और बच्चे की देखभाल तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वे पूरे परिवार की स्वास्थ्य दीदी के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाएंगी।

दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचे उपचार और सही परामर्श

कलेक्टर रोक्तिमा यादव ने कहा कि जिले के दूरस्थ और ग्रामीण अंचलों में रहने वाले लोगों तक भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, समुचित उपचार और सही परामर्श पहुंचना चाहिए। इसके लिए विभागीय अमला नियमित संपर्क बनाए रखे और लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करे। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुपोषण उन्मूलन का लक्ष्य केवल किसी एक विभाग के प्रयास से पूरा नहीं हो सकता। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन सहित सभी संबंधित इकाइयों को मिलकर काम करना होगा।

कलेक्टर ने दोहराया कि जिले से कुपोषण को समाप्त करना प्रशासन की प्राथमिकता है। गर्भवती महिलाओं, माताओं, बच्चों, किशोर-किशोरियों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य की बेहतर देखभाल सुनिश्चित कर ही स्वस्थ और सशक्त समाज का निर्माण किया जा सकता है।