कोजागिरी पर वैदिक सत्संग: आचार्य डॉ. अजय आर्य बोले—मुस्कान और प्रेम ही असली सुंदरता

भिलाई के आर्य समाज मंदिर में शरद पूर्णिमा पर विशेष वैदिक सत्संग आयोजित किया गया। आचार्य डॉ. अजय आर्य ने मुस्कान, प्रेम, सद्भाव और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश दिया। इस अवसर पर गायत्री मंत्र के अर्थ और साधना से संबंधित पोस्टर का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में वैदिक मंत्र-पाठ, संध्या, हवन और धार्मिक साहित्य का वाचन भी हुआ।

Oct 25, 2026 - 14:01
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कोजागिरी पर वैदिक सत्संग: आचार्य डॉ. अजय आर्य बोले—मुस्कान और प्रेम ही असली सुंदरता

UNITED NEWS OF ASIA. भिलाई। शरद पूर्णिमा के अवसर पर आर्य समाज मंदिर में विशेष वैदिक सत्संग का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आचार्य डॉ. अजय आर्य ने अपने रोचक, हास्यपूर्ण और प्रेरणादायक प्रवचन के माध्यम से मुस्कान, प्रेम, सद्भाव और सकारात्मक जीवन का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वास्तविक सुंदरता केवल चेहरे की चमक में नहीं, बल्कि व्यक्ति के विचारों, व्यवहार और दूसरों के प्रति उसके दृष्टिकोण में दिखाई देती है। इस अवसर पर गायत्री मंत्र के अर्थ और साधना से संबंधित पोस्टर का विमोचन भी किया गया।

आचार्य डॉ. अजय आर्य ने कहा कि लोग चेहरे की सुंदरता बढ़ाने के लिए महंगे सौंदर्य प्रसाधनों का उपयोग करते हैं, लेकिन मुस्कान के बिना सुंदरता अधूरी है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि तस्वीर खिंचवाते समय फोटोग्राफर भी मुस्कुराने के लिए कहता है। मुस्कान ऐसा सहज और सुंदर माध्यम है, जिसके लिए न पैसे खर्च करने पड़ते हैं और न किसी विशेष तैयारी की आवश्यकता होती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे स्वयं मुस्कुराएं और दूसरों को भी प्रसन्न रहने का अवसर दें। उनके अनुसार, प्रेमपूर्ण शब्द और मधुर व्यवहार रिश्तों को मजबूत बनाते हैं।

कोजागिरी शब्द की व्याख्या करते हुए आचार्य डॉ. अजय आर्य ने बताया कि इसका भाव ‘को जागर्ति?’ अर्थात ‘कौन जाग रहा है?’ से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि जागने का अर्थ केवल रातभर जागना नहीं, बल्कि अपने विवेक, कर्तव्य और सामाजिक उत्तरदायित्वों के प्रति सजग रहना भी है। उन्होंने मोबाइल और रील देखने में रात बिताने की प्रवृत्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि मनुष्य को अपने आसपास की समस्याओं और समाज के प्रति भी जागरूक रहना चाहिए।

चंद्रमा और प्रकृति के संबंध पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि पारंपरिक मान्यताओं में चंद्रमा को शीतलता, सौहार्द और औषधियों के पोषण से जोड़ा गया है। प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और उसके संरक्षण की भावना स्वस्थ एवं संतुलित जीवन के लिए आवश्यक है।

कार्यक्रम के दौरान ‘गायत्री मंत्र के साधन सूत्र’ पोस्टर का विमोचन किया गया। आचार्य डॉ. अजय आर्य ने गायत्री मंत्र को सद्बुद्धि, विवेक और श्रेष्ठ कर्मों की प्रेरणा देने वाला वैदिक मंत्र बताया। उन्होंने कहा कि मंत्र का अर्थ समझकर उसका अध्ययन करने से उसके संदेश को जीवन में अपनाने की प्रेरणा मिलती है। पोस्टर को आर्य समाज मंदिर से निःशुल्क प्राप्त करने की जानकारी भी दी गई।

कार्यक्रम में आचार्य अंकित शास्त्री ने वैदिक मंत्र-पाठ, संध्या और हवन का संचालन किया। नंदलाल ने महर्षि दयानंद सरस्वती की जीवनी का वाचन किया, जबकि प्रमिला सरपाल ने ‘सत्यार्थ प्रकाश’ का पाठ किया। डॉ. अनुपम मौर्य और यतींद्र पुरंग ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम वैदिक विचारों, सकारात्मकता और मानवीय संवेदनाओं को बढ़ावा देते हैं।

आचार्य डॉ. अजय आर्य के प्रवचन का संदेश रहा कि चांदनी रात को सुंदर बनाती है, मुस्कान चेहरे को और प्रेम पूरे जीवन को। इसलिए जीवन में प्रसन्नता, सद्भाव और मधुर व्यवहार को महत्व देना चाहिए।