ऑपरेशन ट्राइडेंट: नशे के नेटवर्क पर केंद्र का बड़ा प्रहार, 38 ठिकानों पर छापेमारी और 18 गिरफ्तार
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार, ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ के तहत असम, मिजोरम और मणिपुर में 38 ठिकानों पर छापेमारी कर 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई में कथित अंतरराष्ट्रीय नार्को-कार्टेल के नेटवर्क पर प्रहार किया गया। शाह ने 31 दिसंबर 2029 तक भारत को नशा-मुक्त बनाने के लक्ष्य को दोहराते हुए नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही।
UNITED NEWS OF ASIA. केंद्र सरकार ने नशीले पदार्थों की तस्करी और उससे जुड़े नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई तेज करने की बात कही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ को नशीले पदार्थों के विरुद्ध अभियान में एक बड़ी कार्रवाई बताया। उनके अनुसार, इस अभियान के तहत असम, मिजोरम और मणिपुर में एक साथ छापेमारी की गई। गृह मंत्री ने दावा किया कि कार्रवाई के दौरान 38 ठिकानों को निशाना बनाया गया और 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया। सरकार का कहना है कि इस अभियान के जरिए कथित अंतरराष्ट्रीय नार्को-कार्टेल के नेटवर्क पर प्रहार किया गया है।
अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किए गए संदेश में कहा कि मोदी सरकार नशीले पदार्थों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने देश को नशा-मुक्त बनाने के लिए सभी से एकजुट होकर प्रयास करने की अपील की। गृह मंत्री ने 31 दिसंबर 2029 तक भारत को नशा-मुक्त बनाने का लक्ष्य भी दोहराया। उनके मुताबिक, नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े नेटवर्क को समाप्त करने के लिए विभिन्न एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं।
गृह मंत्री की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार, ऑपरेशन से जुड़ी कार्रवाई में लगभग 100 करोड़ रुपये के हवाला लेनदेन का पता चलने, 1,424 बैंक खातों को फ्रीज करने और 17.82 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त करने की बात कही गई है। इसके अलावा 500 डेटोनेटर और 12 लाख रुपये नकद बरामद होने का भी उल्लेख किया गया। ये आंकड़े गृह मंत्री के दावे पर आधारित हैं। इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक जांच रिपोर्ट या स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी उपलब्ध सामग्री में नहीं दी गई है।
अमित शाह ने बताया कि संबंधित नेटवर्क भारत, म्यांमार और बांग्लादेश की सीमाओं से जुड़े मार्गों के जरिए नशीले पदार्थों की तस्करी करता था। उन्होंने इसे ‘डेथ ट्रायंगल कॉरिडोर’ का नाम देते हुए कहा कि ऐसे नेटवर्क को खत्म करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। सीमावर्ती क्षेत्रों से होने वाली कथित तस्करी पर कार्रवाई को नशे के कारोबार पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया गया है।
केंद्र सरकार ने नशीले पदार्थों की तस्करी को युवाओं और समाज के लिए गंभीर चुनौती माना है। सरकार का लक्ष्य केवल तस्करी करने वालों पर कार्रवाई करना ही नहीं, बल्कि नशीले पदार्थों की आपूर्ति से जुड़े पूरे नेटवर्क को कमजोर करना भी है। इसके लिए जांच एजेंसियों के बीच समन्वय, वित्तीय लेनदेन की पड़ताल और संदिग्ध संपत्तियों पर कार्रवाई जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।
ऑपरेशन ट्राइडेंट के संबंध में गृह मंत्री के बयान ने नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को फिर चर्चा में ला दिया है। सरकार ने 31 दिसंबर 2029 तक नशा-मुक्त भारत बनाने का संकल्प जताया है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए तस्करी के नेटवर्क पर कार्रवाई के साथ जागरूकता, रोकथाम और नशे की लत से प्रभावित लोगों के पुनर्वास जैसे प्रयास भी महत्वपूर्ण होंगे।