प्रेमनगर के जंगल में सागौन की कथित अवैध कटाई, ग्रामीणों ने वन विभाग से जांच की मांग की

सूरजपुर के प्रेमनगर से जंगल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। उमेश्वरपुर और श्यामपुर से लगे जंगल में सागौन के पेड़ों की कथित अवैध कटाई का आरोप है। ग्रामीणों का दावा है कि जंगल में लगातार बड़े और कीमती पेड़ों को निशाना बनाया जा रहा है।

Sep 28, 2026 - 18:08
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प्रेमनगर के जंगल में सागौन की कथित अवैध कटाई, ग्रामीणों ने वन विभाग से जांच की मांग की

UNITED NEWS OF ASIA. जमील अंसारी, कोरिया l सूरजपुर, जिले के प्रेमनगर क्षेत्र में जंगल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। उमेश्वरपुर और श्यामपुर से लगे जंगल में सागौन के पेड़ों की कथित अवैध कटाई का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का दावा है कि जंगल क्षेत्र में लगातार बड़े और कीमती पेड़ों को निशाना बनाया जा रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार, जंगल के अलग-अलग हिस्सों में पेड़ों की कटाई के निशान दिखाई दे रहे हैं। मौके पर कटे हुए पेड़ों के ठूंठ और लकड़ी के अवशेष नजर आने की बात कही गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि जंगल क्षेत्र में नियमित निगरानी और गश्त होती, तो इस तरह पेड़ों की कटाई पर रोक लगाई जा सकती थी।

बताया जा रहा है कि उमेश्वरपुर और श्यामपुर से लगे जंगल में सागौन के पेड़ों की कटाई को लेकर ग्रामीणों में चिंता है। सागौन को मूल्यवान पेड़ों में माना जाता है और जंगल में इसकी कटाई से वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।

ग्रामीणों ने वन विभाग से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जंगल के जिन हिस्सों में पेड़ों की कटाई के निशान मिले हैं, वहां मौके पर पहुंचकर स्थिति की जांच की जानी चाहिए। साथ ही जंगल में गश्त और निगरानी व्यवस्था को बढ़ाने की मांग भी की गई है।

ग्रामीणों ने कथित अवैध कटाई के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि वन क्षेत्र की सुरक्षा के लिए लगातार निगरानी जरूरी है, ताकि कीमती पेड़ों की कटाई को रोका जा सके।

मामले में ग्रामीणों की ओर से वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, वन विभाग की ओर से इस मामले में अभी आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में सागौन के पेड़ों की अवैध कटाई और विभागीय लापरवाही से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

मामले की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जंगल में पेड़ों की कटाई कब और किसके द्वारा की गई तथा इसके लिए कौन जिम्मेदार है। साथ ही जांच के दौरान यह भी सामने आ सकता है कि मौके पर मिले पेड़ों के ठूंठ और लकड़ी के अवशेष किस घटना से संबंधित हैं।

फिलहाल ग्रामीणों ने जंगल की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, नियमित गश्त बढ़ाने और पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। वन विभाग का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की स्थिति और आगे की कार्रवाई को लेकर तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।