छत्तीसगढ़ में SIR के दौरान फॉर्म-7 के दुरुपयोग का आरोप, मोहम्मद अकबर ने निर्वाचन आयोग से मांगा जवाब
छत्तीसगढ़ के पूर्व कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहम्मद अकबर ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग की जांच कराने और आपत्तियों की सुनवाई से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। अकबर ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 का उल्लेख करते हुए कहा कि जानबूझकर गलत घोषणा करने पर एक वर्ष तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
UNITED NEWS OF ASIA. रायपुर। छत्तीसगढ़ में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद सामने आया है। पूर्व कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहम्मद अकबर ने फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए भारत निर्वाचन आयोग से पूरी प्रक्रिया की जांच कराने और मतदाताओं के नाम कम होने के आंकड़ों पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि किसी भी पात्र मतदाता को उसके मतदान के अधिकार से वंचित न किया जाए।
मोहम्मद अकबर ने दस्तावेजों के आधार पर जारी बयान में दावा किया कि वर्ष 2023 से अब तक आबादी बढ़ने के बावजूद छत्तीसगढ़ में लगभग 24 लाख 99 हजार मतदाताओं की संख्या कम हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि मतदाताओं की संख्या में इतनी बड़ी कमी कैसे आई और इसमें फॉर्म-7 के आधार पर कितने नाम हटाए गए। उनके अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया और उसके आधार पर की गई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। ये आंकड़े और आरोप उनके बयान पर आधारित हैं।
अकबर ने बताया कि फॉर्म-7 के माध्यम से मतदाता सूची में दर्ज किसी व्यक्ति के नाम को लेकर आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है। उन्होंने कहा कि आपत्ति पर कार्रवाई करते समय निर्धारित प्रक्रिया का पालन होना चाहिए। उनके अनुसार, आपत्तिकर्ता को नोटिस देकर सुनवाई करना, उसका बयान दर्ज करना और आपत्ति की वैधता की जांच करना जरूरी है। जिस मतदाता के नाम पर आपत्ति दर्ज की गई है, उसे भी आदेश पारित करने से पहले अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल फॉर्म-7 दाखिल होने से किसी मतदाता का नाम स्वतः नहीं काटा जाना चाहिए।
पूर्व मंत्री ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 का उल्लेख करते हुए कहा कि मतदाता सूची से संबंधित आवेदन में जानबूझकर गलत बयान या घोषणा देने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। उनके मुताबिक, इस धारा के तहत दोषी पाए जाने पर एक वर्ष तक के कारावास, जुर्माने या दोनों की सजा हो सकती है। उन्होंने निर्वाचन आयोग से पूछा कि कथित गलत शिकायतों की पहचान और उनके विरुद्ध कार्रवाई के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
मोहम्मद अकबर ने अपने बयान में कहा कि राज्य के 33 जिलों में कुल 1,08,807 मतदाताओं के नाम काटे जाने की जानकारी सामने आई है। उनके द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, रायपुर में 31,028, कोरबा में 15,187, दुर्ग में 7,209, बालोद में 3,903, बलौदाबाजार-भाटापारा में 2,662 और कबीरधाम में 2,234 नाम काटे गए हैं। उन्होंने निर्वाचन आयोग से इन आंकड़ों में फॉर्म-7 के आधार पर हटाए गए नामों की संख्या स्पष्ट करने की मांग की।
अकबर ने यह भी कहा कि वर्ष 2023 से अब तक मतदाताओं की संख्या में आई कमी और चुनावों में जीत-हार के अंतर को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब मिलना चाहिए। उन्होंने मांग की कि SIR के दौरान हटाए गए नामों की नियमानुसार समीक्षा की जाए और पात्र मतदाताओं के नाम सूची में दोबारा जोड़े जाएं। निर्वाचन आयोग की ओर से इन आरोपों और सवालों पर आधिकारिक जवाब की जानकारी उपलब्ध होने पर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।