कवर्धा: सिरोही नस्ल के बकरे से बदली बृजलाल मेरावी की तकदीर, बकरी पालन से आय बढ़कर 70 हजार रुपये तक पहुंची
कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड के वनांचल ग्राम बेंदा निवासी बृजलाल मेरावी ने पशुधन विकास विभाग की नर बकरा वितरण योजना का लाभ लेकर बकरी पालन को लाभकारी व्यवसाय बनाया है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में अनुदान पर मिले उन्नत सिरोही नस्ल के नर बकरे से नस्ल सुधार हुआ। उनकी बकरियों की संख्या 15 से बढ़कर लगभग 30 हो गई, जबकि सालाना आय 20–30 हजार रुपये से बढ़कर 60–70 हजार रुपये तक पहुंच गई।
UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कबीरधाम l मेहनत, सही मार्गदर्शन और शासन की योजनाओं का लाभ मिले तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी आर्थिक समृद्धि के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड के वनांचल ग्राम बेंदा निवासी बृजलाल मेरावी की सफलता इसकी एक मिसाल है। पशुधन विकास विभाग की नर बकरा वितरण योजना के तहत मिले उन्नत सिरोही नस्ल के नर बकरे ने उनके पारंपरिक बकरी पालन को नई दिशा दी है। नस्ल सुधार और पशुओं की बेहतर देखभाल से उनकी बकरियों की संख्या 15 से बढ़कर लगभग 30 हो गई है। वहीं, बकरी पालन से होने वाली वार्षिक आय भी 20 से 30 हजार रुपये से बढ़कर 60 से 70 हजार रुपये तक पहुंच गई है।
योजना से मिला उन्नत नस्ल का नर बकरा
बृजलाल मेरावी का परिवार खेती-किसानी के साथ बकरी पालन पर निर्भर था। पहले उनके पास स्थानीय देशी नस्ल की 15 बकरियां थीं। मेमनों की धीमी वृद्धि और कम वजन के कारण उन्हें बिक्री से सीमित आमदनी होती थी। इससे बकरी पालन से होने वाला आर्थिक लाभ भी कम था। वित्तीय वर्ष 2023-24 में पशुधन विकास विभाग की नर बकरा वितरण योजना के तहत बृजलाल का चयन किया गया। पशु चिकित्सालय चिल्फी के माध्यम से उन्हें अनुदान पर उन्नत सिरोही नस्ल का नर बकरा उपलब्ध कराया गया। इस पहल से उनके पशुधन में नस्ल सुधार की प्रक्रिया शुरू हुई और बकरी पालन को अधिक लाभकारी बनाने का अवसर मिला।
नस्ल सुधार से बढ़ा पशुधन और आमदनी
सिरोही नस्ल के नर बकरे से प्रजनन के बाद बृजलाल को संकर नस्ल के मेमने प्राप्त हुए। बेहतर शारीरिक विकास और वजन के कारण इन मेमनों की बिक्री से होने वाली आय में सुधार आया। इसके साथ ही पशुओं की देखभाल को लेकर भी उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन मिला। पशु चिकित्सालय चिल्फी के अधिकारियों और कर्मचारियों ने नियमित टीकाकरण, कृमिनाशक दवाओं के उपयोग, संतुलित आहार, खनिज लवण तथा वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों के बारे में जानकारी दी।
इन उपायों का असर बृजलाल के पशुधन और आमदनी पर दिखाई देने लगा। उनकी बकरियों की संख्या लगभग दोगुनी होकर 30 के आसपास पहुंच गई। बकरी पालन से मिलने वाली सालाना आय भी बढ़कर 60 से 70 हजार रुपये तक हो गई। इस बढ़ोतरी से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और बकरी पालन उनकी आजीविका का महत्वपूर्ण अतिरिक्त साधन बन गया है।
दूसरे पशुपालकों के लिए बनी प्रेरणा
बृजलाल मेरावी ने योजना का लाभ मिलने पर शासन और पशु चिकित्सालय चिल्फी के प्रति आभार जताया। उनका अनुभव बताता है कि उन्नत नस्ल के पशुओं का उपयोग, नियमित टीकाकरण, संतुलित आहार और वैज्ञानिक देखभाल अपनाकर पारंपरिक पशुपालन को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।
वनांचल क्षेत्रों में खेती के साथ बकरी पालन ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त आय का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। नर बकरा वितरण योजना के जरिए नस्ल सुधार को बढ़ावा देने की पहल से पशुपालकों को बेहतर उत्पादन और आमदनी बढ़ाने का अवसर मिल रहा है। बृजलाल मेरावी की सफलता क्षेत्र के अन्य पशुपालकों के लिए भी प्रेरणा है कि उचित मार्गदर्शन और उपलब्ध योजनाओं का लाभ लेकर वे अपनी आजीविका को मजबूत बना सकते हैं।