खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय के 70वें स्थापना दिवस पर राज्यपाल रमेन डेका का संदेश, डिजिटल माध्यमों से दुनिया तक पहुंचाएं छत्तीसगढ़ की लोककलाएं

खैरागढ़ स्थित राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय के 70वें स्थापना दिवस समारोह में राज्यपाल एवं कुलाधिपति रमेन डेका ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककलाओं को मोबाइल, इंटरनेट और डिजिटल मीडिया के जरिए देश-विदेश तक पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों से कला के क्षेत्र में सफलता के लिए निरंतर अभ्यास, धैर्य और समर्पण अपनाने की अपील की। समारोह में सांसद संतोष पांडे, कुलपति डॉ. लवली शर्मा सहित जनप्रतिनिधि, प्राध्यापक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

Oct 14, 2026 - 12:37
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खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय के 70वें स्थापना दिवस पर राज्यपाल रमेन डेका का संदेश, डिजिटल माध्यमों से दुनिया तक पहुंचाएं छत्तीसगढ़ की लोककलाएं

UNITED NEWS OF ASIA. खैरागढ़ l छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककलाओं और सांस्कृतिक परंपराओं को आधुनिक तकनीक के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचाने की आवश्यकता पर राज्यपाल रमेन डेका ने जोर दिया है। खैरागढ़ स्थित राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय के 70वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को मोबाइल, इंटरनेट और डिजिटल मीडिया के जरिए व्यापक पहचान दिलाई जानी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों, कलाकारों और कला से जुड़े संस्थानों से छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कलाओं के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

70 वर्षों की गौरवशाली यात्रा का उत्सव

राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय का 70वां स्थापना दिवस समारोह हर्षोल्लास के साथ आयोजित किया गया। राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति रमेन डेका ने समारोह की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय की सात दशक लंबी यात्रा को विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों के सामूहिक योगदान का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान की पहचान उसके विद्यार्थियों की उपलब्धियों, शिक्षकों के समर्पण और संस्थान से जुड़े लोगों की निरंतर मेहनत से बनती है।

समारोह में विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक और शैक्षणिक उपलब्धियों को याद किया गया। संगीत, नृत्य, चित्रकला और शिल्प जैसी विधाओं को प्रोत्साहित करने में विश्वविद्यालय की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया। सात दशकों की यात्रा पूरी करना संस्थान के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो कला और संस्कृति के क्षेत्र में उसकी निरंतर सक्रियता को दर्शाती है।

डिजिटल माध्यमों से दुनिया तक पहुंचेगी छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति

राज्यपाल रमेन डेका ने अपने संबोधन में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककलाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर स्थापित करने के लिए आधुनिक संचार माध्यमों का प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए। पंडवानी, पंथी, राउत नाचा, सुवा नृत्य, कर्मा और बस्तर की जनजातीय नृत्य परंपराएं छत्तीसगढ़ की विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

उन्होंने कहा कि इन लोककलाओं को केवल पारंपरिक मंचों तक सीमित रखने के बजाय मोबाइल, इंटरनेट और डिजिटल मीडिया के माध्यम से देश-विदेश के लोगों तक पहुंचाया जाना चाहिए। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और पारंपरिक कलाओं को नई पीढ़ी से जोड़ने का अवसर मिल सकता है। इससे प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर सामने लाने में मदद मिलेगी।

राज्यपाल के संदेश का प्रमुख उद्देश्य पारंपरिक कलाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ना और उनके संरक्षण के साथ प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना रहा। छत्तीसगढ़ की लोककलाएं प्रदेश की सामाजिक परंपराओं, जीवनशैली और सांस्कृतिक विविधता को अभिव्यक्त करती हैं। ऐसे में इनके दस्तावेजीकरण और डिजिटल प्रसार से आने वाली पीढ़ियों को भी अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर मिल सकता है।

संगीत और कला मानसिक शांति के साथ संस्कृति की पहचान

राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि संगीत मनुष्य को मानसिक शांति प्रदान करता है, जबकि नृत्य, चित्रकला और शिल्प समाज के इतिहास और संस्कृति को अभिव्यक्त करने के प्रभावी माध्यम हैं। कला केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह किसी समाज की परंपराओं, भावनाओं और ऐतिहासिक अनुभवों को भी सामने लाती है।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि कला के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए प्रतिभा के साथ धैर्य, निरंतर अभ्यास और समर्पण आवश्यक है। किसी भी कला विधा में दक्षता हासिल करने के लिए नियमित अभ्यास और सीखने की निरंतर प्रक्रिया महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा को निखारने के साथ-साथ कला की परंपराओं और मूल्यों को समझने का प्रयास करना चाहिए।

राज्यपाल ने कला को आजीविका और व्यवसाय से जोड़ने की संभावनाओं पर भी बल दिया। कला के क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर विकसित करने से कलाकारों को अपनी प्रतिभा के माध्यम से आर्थिक रूप से आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है। इसके लिए कला शिक्षा, रचनात्मकता और व्यावहारिक कौशल के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।

दानवीर राजपरिवार के योगदान को किया याद

समारोह के दौरान राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की स्थापना से जुड़े ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने दानवीर राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह और रानी पद्मावती को याद करते हुए बताया कि उन्होंने अपनी पुत्री राजकुमारी इंदिरा सिंह की स्मृति में विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए योगदान दिया था।

राज्यपाल ने इस योगदान को कला और संस्कृति के प्रति समर्पण का उदाहरण बताया। किसी शैक्षणिक और सांस्कृतिक संस्थान की स्थापना के पीछे दूरदर्शी सोच और समाज के लिए कुछ करने की भावना महत्वपूर्ण होती है। विश्वविद्यालय की सात दशक लंबी यात्रा इसी विरासत को आगे बढ़ाने का अवसर भी है।

सांसद संतोष पांडे ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों को सराहा

समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित सांसद संतोष पांडे ने विश्वविद्यालय की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि राजपरिवार द्वारा स्थापित इस दूरदर्शी संस्थान ने खैरागढ़ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान दिलाई है।

उन्होंने विश्वविद्यालय को क्षेत्र की सांस्कृतिक प्रतिष्ठा से जोड़ते हुए इसकी ऐतिहासिक भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। संगीत और कला के क्षेत्र में स्थापित संस्थानों का योगदान स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने और सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण होता है। खैरागढ़ की पहचान में इस विश्वविद्यालय की भूमिका विशेष रही है।

कुलपति ने किया स्वागत

कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. लवली शर्मा के स्वागत उद्बोधन से हुई। उन्होंने समारोह में उपस्थित अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर राजपरिवार की सदस्य राजकुमारी शताक्षी सिंह, सांसद प्रतिनिधि भागवत शरण सिंह और प्रभारी कुलसचिव आर. वेंकट रमण गुड़े सहित जिला प्रशासन के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, प्राध्यापक, विद्यार्थी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

समारोह ने विश्वविद्यालय की 70 वर्षों की यात्रा, कला शिक्षा के महत्व और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने की आवश्यकता को रेखांकित किया। राज्यपाल रमेन डेका का डिजिटल माध्यमों से लोककलाओं को वैश्विक पहचान दिलाने का संदेश कलाकारों और विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण रहा।

कुल मिलाकर, खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय का 70वां स्थापना दिवस समारोह केवल एक संस्थागत उपलब्धि का उत्सव नहीं रहा, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोककलाओं के संरक्षण, डिजिटल प्रसार और कला को आजीविका से जोड़ने की दिशा में नए अवसरों पर विचार करने का मंच भी बना। समारोह में व्यक्त विचारों ने यह संदेश दिया कि पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक तकनीक और नई पीढ़ी की भागीदारी के साथ आगे बढ़ाकर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई जा सकती है।