बहेसर में सरकारी जमीन पर अवैध प्लाटिंग की शिकायत, 20 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप

छत्तीसगढ़ के तिल्दा क्षेत्र के ग्राम बहेसर में सरकारी जमीन पर कथित अवैध प्लाटिंग और प्लॉट बिक्री को लेकर शिकायत के 20 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगा है। शिकायतकर्ता बंशी यादव ने खसरा नंबर 83 की करीब तीन एकड़ जमीन पर अवैध प्लाटिंग का आरोप लगाते हुए नहर विभाग और तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने संबंधित भूमि का निरीक्षण, निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

Oct 14, 2026 - 13:34
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बहेसर में सरकारी जमीन पर अवैध प्लाटिंग की शिकायत, 20 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप

UNITED NEWS OF ASIA. अशोक मिश्रा, तिल्दा- नेवरा l छत्तीसगढ़ के तिल्दा क्षेत्र के ग्राम बहेसर में सरकारी जमीन पर कथित अवैध प्लाटिंग और प्लॉट बिक्री का मामला सामने आया है। इस संबंध में 22 सितंबर 2026 को शिकायत दर्ज कराए जाने के बावजूद 20 दिन बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि संबंधित भूमि का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार करने और कथित अवैध कब्जे पर रोक लगाने की दिशा में अब तक प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं। मामले को लेकर नहर विभाग और तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

खसरा नंबर 83 की करीब तीन एकड़ जमीन पर प्लाटिंग का आरोप

शिकायतकर्ता एवं भाजयुमो तिल्दा ग्रामीण के पूर्व अध्यक्ष बंशी यादव ने आरोप लगाया है कि ग्राम बहेसर के खसरा नंबर 83 में लगभग तीन एकड़ क्षेत्र में नहर के आसपास की जमीन पर अवैध प्लाटिंग की जा रही है। उनके अनुसार, संबंधित जमीन पर प्लॉट तैयार कर उनकी बिक्री किए जाने की शिकायत है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि नहर के आसपास की जमीन के अलावा समीपवर्ती अन्य भूमि को भी कथित तौर पर अवैध तरीके से बेचा जा रहा है।
बंशी यादव का कहना है कि यदि नहर के आसपास की सरकारी जमीन पर अतिक्रमण और प्लाटिंग की गतिविधियां जारी रहती हैं, तो इससे सरकारी संपत्ति की सुरक्षा के साथ सिंचाई व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। इसी आशंका को देखते हुए उन्होंने संबंधित अधिकारियों से समय रहते जांच और कार्रवाई करने की मांग की है।

22 सितंबर को दर्ज हुई थी शिकायत

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मामले में 22 सितंबर 2026 को अनुविभागीय अधिकारी भाटापारा के समक्ष शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में ग्राम बहेसर की संबंधित भूमि, खसरा संख्या और कथित अवैध प्लाटिंग का विवरण दिए जाने की बात कही गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बावजूद अब तक मौके पर निरीक्षण नहीं कराया गया है और न ही जमीन की स्थिति को लेकर कोई स्पष्ट रिपोर्ट सामने आई है।

बंशी यादव ने आरोप लगाया कि नहर विभाग की ओर से कार्रवाई नहीं की गई और तहसीलदार तिल्दा द्वारा भी मौके का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार नहीं की गई। उनका कहना है कि पटवारी और राजस्व अधिकारियों के माध्यम से भूमि का सर्वे कराया जाना चाहिए था, ताकि जमीन की वास्तविक स्थिति, उसके स्वामित्व और कथित कब्जे से जुड़े तथ्यों की पुष्टि हो सके। हालांकि, मामले में संबंधित विभागों का पक्ष और कार्रवाई की आधिकारिक स्थिति उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है।

नहर और सिंचाई व्यवस्था की सुरक्षा का मुद्दा

शिकायतकर्ता ने नहर के आसपास की भूमि को लेकर चिंता जताते हुए कहा है कि भाटापारा नहर का निर्माण कार्य वर्षों पहले पूरा हो चुका है और इस क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का उद्देश्य है। ऐसे में नहर के समीप की जमीन पर कथित अवैध प्लाटिंग का मामला गंभीरता से जांचा जाना चाहिए। उनका कहना है कि सरकारी भूमि की सुरक्षा के साथ-साथ नहर से जुड़ी संरचनाओं और सिंचाई व्यवस्था को सुरक्षित रखना भी जरूरी है।

ग्रामीण क्षेत्र में जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े मामलों में भूमि का रिकॉर्ड, सीमांकन और स्वामित्व की स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है। यदि किसी सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे या प्लाटिंग की शिकायत मिलती है, तो संबंधित अधिकारियों द्वारा दस्तावेजों की जांच और स्थल निरीक्षण के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जा सकती है। बहेसर के इस मामले में भी शिकायतकर्ता ने इसी तरह की जांच की मांग की है।

उच्चाधिकारियों से जांच और कार्रवाई की मांग

बंशी यादव ने मांग की है कि उच्चाधिकारियों के निर्देश पर ग्राम बहेसर के खसरा नंबर 83 सहित संबंधित क्षेत्र का तत्काल निरीक्षण कराया जाए। उन्होंने कथित अवैध प्लाटिंग और कब्जे की निष्पक्ष जांच करने, जमीन के राजस्व अभिलेखों का परीक्षण कराने और जांच में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने नहर विभाग की जमीन पर यदि अवैध कब्जा पाया जाता है, तो उसे नियमानुसार कब्जामुक्त कराने की बात कही है।

शिकायतकर्ता ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में जल्द कार्रवाई नहीं होती, तो इसे जनप्रतिनिधियों और उच्च स्तर के अधिकारियों के समक्ष उठाया जाएगा। उनका कहना है कि शिकायत का समयबद्ध निराकरण होना चाहिए, ताकि सरकारी भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और कथित अवैध प्लाटिंग पर रोक लगाई जा सके।

जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी नजरें

बहेसर में कथित अवैध प्लाटिंग को लेकर उठे इस मामले में अब संबंधित विभागों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। शिकायत के आधार पर भूमि का निरीक्षण, सीमांकन और राजस्व रिकॉर्ड की जांच किए जाने से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल, शिकायतकर्ता ने 20 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है।

यह मामला सरकारी भूमि की सुरक्षा, नहर से जुड़ी संपत्ति और प्रशासनिक जवाबदेही से संबंधित है। हालांकि, अवैध प्लाटिंग और कब्जे के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस शिकायत पर कब तक कार्रवाई करते हैं और भूमि की वास्तविक स्थिति को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं।