सक्षम योजना से आत्मनिर्भर बनीं सूरजपुर की सोन कुमारी, मिट्टी के बर्तनों के कारोबार से संवार रहीं बच्चों का भविष्य

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के ग्राम केशवनगर की सोन कुमारी प्रजापति ने महिला कोष की सक्षम योजना से मिली 40 हजार रुपये की ऋण सहायता से मिट्टी के बर्तनों की दुकान शुरू की। पहले मजदूरी पर निर्भर रहने वाली सोन कुमारी अब दुकान से होने वाली आय के जरिए परिवार की जरूरतें पूरी करने और बच्चों की पढ़ाई में सहयोग कर रही हैं। उनकी कहानी महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार की प्रेरक मिसाल है।

Oct 14, 2026 - 13:41
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सक्षम योजना से आत्मनिर्भर बनीं सूरजपुर की सोन कुमारी, मिट्टी के बर्तनों के कारोबार से संवार रहीं बच्चों का भविष्य

UNITED NEWS OF ASIA. सूरजपुर l छत्तीसगढ़ में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए संचालित स्वरोजगार योजनाएं कई परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम बन रही हैं। ऐसी ही एक प्रेरक कहानी सूरजपुर जिले के ग्राम केशवनगर की सोन कुमारी प्रजापति की है, जिन्होंने सरकारी योजना से मिली आर्थिक सहायता का उपयोग कर मिट्टी के पारंपरिक बर्तनों का कारोबार शुरू किया। कभी परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए मजदूरी पर निर्भर रहने वाली सोन कुमारी आज अपनी दुकान के माध्यम से घर के खर्चों और बच्चों की पढ़ाई में सहयोग कर रही हैं।

सक्षम योजना से मिला स्वरोजगार का अवसर

सोन कुमारी प्रजापति को छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना के अंतर्गत 40 हजार रुपये की ऋण सहायता मिली। महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से संचालित इस योजना से प्राप्त राशि ने उन्हें अपना छोटा व्यवसाय शुरू करने का अवसर दिया। उन्होंने इस आर्थिक सहयोग का उपयोग मिट्टी के बर्तनों की दुकान खोलने में किया। उनका उद्देश्य परिवार की आमदनी बढ़ाना और बच्चों की शिक्षा सहित घरेलू जरूरतों को पूरा करने में आर्थिक योगदान देना था।

सोन कुमारी की दुकान में मटके, घड़े, गुल्लक, कलश और दीये जैसी पारंपरिक वस्तुएं उपलब्ध हैं। ये सामान भारतीय घरों की दैनिक जरूरतों के साथ धार्मिक आयोजनों, त्योहारों और विशेष अवसरों पर भी उपयोग किए जाते हैं। ऐसे समय में मिट्टी के बर्तनों की मांग बढ़ने से दुकानदारों को कारोबार करने का अवसर मिलता है। सोन कुमारी भी अपने व्यवसाय के माध्यम से नियमित आय अर्जित करने का प्रयास कर रही हैं।

मजदूरी से कारोबार तक का सफर

व्यवसाय शुरू करने से पहले सोन कुमारी मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण करती थीं। सीमित आमदनी के कारण घर के खर्चों का प्रबंधन करना आसान नहीं था। बच्चों की स्कूल फीस, पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी जरूरतें और परिवार के अन्य खर्चों को पूरा करने में उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। ऐसे में अपना कारोबार शुरू करना उनके लिए आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

सक्षम योजना के तहत मिली ऋण सहायता से उन्होंने मिट्टी के बर्तनों की दुकान शुरू की। अब दुकान से होने वाली कमाई परिवार की आर्थिक जरूरतों में मददगार बन रही है। इससे उन्हें बच्चों की पढ़ाई के खर्च में सहयोग करने और घरेलू जिम्मेदारियों को निभाने में सहारा मिला है। स्वरोजगार के माध्यम से वे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

बच्चों की पढ़ाई और परिवार की जरूरतों में सहयोग

किसी भी परिवार के लिए बच्चों की शिक्षा भविष्य को बेहतर बनाने का महत्वपूर्ण आधार होती है। सीमित आय वाले परिवारों में स्कूल फीस और पढ़ाई से जुड़े खर्चों का प्रबंधन कई बार चुनौतीपूर्ण हो जाता है। सोन कुमारी के लिए भी यह चिंता का विषय था। मजदूरी से होने वाली सीमित आमदनी में परिवार के सभी खर्चों को संभालना मुश्किल होता था।

दुकान शुरू होने के बाद उनकी आय का एक नया माध्यम तैयार हुआ है। अब वे परिवार के खर्चों में योगदान देने के साथ बच्चों की शिक्षा के लिए भी आर्थिक सहयोग कर पा रही हैं। यह बदलाव उनके लिए केवल कारोबार शुरू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार की जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।

सोन कुमारी की कहानी यह बताती है कि आर्थिक सहायता का सही उपयोग, मेहनत और नियमित प्रयास किसी महिला को अपने परिवार की जिम्मेदारियों में अधिक प्रभावी भूमिका निभाने का अवसर दे सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे व्यवसाय महिलाओं के लिए आय अर्जित करने और आर्थिक निर्भरता कम करने का एक उपयोगी माध्यम बन सकते हैं।

सोन कुमारी ने साझा किया अपना अनुभव

योजना से मिले सहयोग के बारे में सोन कुमारी प्रजापति कहती हैं कि पहले वे मजदूरी करके परिवार चलाती थीं। बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्चों की व्यवस्था करना उनके लिए कठिन था। सक्षम योजना के तहत 40 हजार रुपये की सहायता मिलने से उन्होंने मिट्टी के बर्तनों की दुकान शुरू की। अब दुकान से होने वाली कमाई से घर चलाने और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने में मदद मिल रही है।

उन्होंने योजना के सहयोग के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। सोन कुमारी के अनुसार, सक्षम योजना से मिले आर्थिक संबल ने उन्हें अपना कारोबार शुरू करने और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दिया। उनका अनुभव उन महिलाओं के लिए प्रेरणा बन सकता है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपना छोटा व्यवसाय शुरू करना चाहती हैं।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में स्वरोजगार की भूमिका

महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ना आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। जब महिलाओं के पास अपनी आय का साधन होता है, तो वे परिवार की जरूरतों को पूरा करने में योगदान देने के साथ अपने निर्णयों में भी अधिक भागीदारी निभा सकती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक कौशल पर आधारित कारोबार इस दिशा में उपयोगी साबित हो सकते हैं।

मिट्टी के बर्तनों का कारोबार पारंपरिक कला और स्थानीय बाजार से जुड़ा हुआ है। मटके, घड़े, कलश, गुल्लक और दीये जैसी वस्तुओं की मांग के आधार पर इस तरह के छोटे व्यवसाय आगे बढ़ सकते हैं। सोन कुमारी ने भी इसी पारंपरिक कारोबार को अपनी आजीविका का माध्यम बनाया है। उनकी पहल स्वरोजगार के जरिए परिवार की आर्थिक जरूरतों में योगदान देने का उदाहरण प्रस्तुत करती है।

सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र महिलाओं तक पहुंचाने पर जोर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने तथा आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। सक्षम योजना के माध्यम से पात्र महिलाओं को ऋण सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें आजीविका के अवसर विकसित करने में सहयोग दिया जाता है।

सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत सामने आई सोन कुमारी प्रजापति की कहानी बताती है कि योजनाओं से मिलने वाला आर्थिक सहयोग किसी महिला के लिए नए अवसरों का रास्ता खोल सकता है। हालांकि, व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर मेहनत, बाजार की मांग को समझना और आय-व्यय का उचित प्रबंधन भी महत्वपूर्ण है।

सूरजपुर जिले के ग्राम केशवनगर की सोन कुमारी आज मिट्टी के बर्तनों की दुकान के माध्यम से अपने परिवार की जरूरतों और बच्चों की शिक्षा में योगदान दे रही हैं। उनकी यात्रा यह संदेश देती है कि सही अवसर, मेहनत और दृढ़ संकल्प के साथ महिलाएं स्वरोजगार के जरिए आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं। सक्षम योजना से मिला 40 हजार रुपये का आर्थिक संबल उनके लिए इसी बदलाव की शुरुआत बना है।