देशी मशरूम के लिए जान जोखिम में डाल रहे ग्रामीण, बाजार में 1500 रुपये किलो तक बिक रहा 'फुटू'
धमतरी और आसपास के वन क्षेत्रों में बारिश के साथ देशी मशरूम (फुटू) की आवक शुरू हो गई है। ग्रामीण जहरीले सांपों के खतरे के बीच जंगलों से मशरूम निकाल रहे हैं, जबकि बाजार में इसकी कीमत 1000 से 1500 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।
UNITED NEWS OF ASIA. रिजवान मेमन, धमतरी l बारिश का मौसम शुरू होते ही छत्तीसगढ़ के लोगों की जुबान पर देशी मशरूम, जिसे स्थानीय भाषा में 'फुटू' कहा जाता है, का स्वाद फिर से लौट आया है। धमतरी सहित आसपास के वन क्षेत्रों में इन दिनों देशी मशरूम की आवक बढ़ने लगी है। जैसे ही यह मशरूम बाजार में पहुंचता है, इसके शौकीन खरीदने के लिए उमड़ पड़ते हैं। सीमित मात्रा में उपलब्ध होने और विशेष स्वाद के कारण इसकी कीमत भी काफी अधिक रहती है।
इन दिनों बाजार में देशी मशरूम की कीमत 1000 से 1500 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। हालांकि अधिकांश स्थानों पर इसे पारंपरिक तरीके से छोटी-छोटी झूड़ियों में बेचा जाता है। एक झूड़ी की कीमत लगभग 100 से 150 रुपये तक होती है। महंगा होने के बावजूद लोग इसे खरीदने से पीछे नहीं हटते, क्योंकि बारिश के मौसम में मिलने वाला यह मशरूम स्वाद और पौष्टिकता के कारण काफी लोकप्रिय माना जाता है।
लेकिन इस स्वादिष्ट मशरूम को जंगलों से निकालना बिल्कुल आसान नहीं है। वनांचल के ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर इसे एकत्र करते हैं। देशी मशरूम मुख्य रूप से जंगलों में बने दीमक के टीलों पर उगता है। यही कारण है कि इसे निकालने के दौरान हमेशा खतरा बना रहता है। बारिश के मौसम में जहरीले सांप अक्सर दीमक खाने के लिए इन्हीं टीलों के भीतर या आसपास छिपे रहते हैं। ऐसे में मशरूम निकालने के दौरान ग्रामीणों को सांप के काटने का गंभीर जोखिम उठाना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि मशरूम की तलाश में उन्हें घने जंगलों में कई घंटे बिताने पड़ते हैं। हर कदम पर जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा रहता है, लेकिन परिवार की अतिरिक्त आमदनी और बाजार में अच्छी कीमत मिलने के कारण वे यह जोखिम उठाने को मजबूर होते हैं। कई बार मशरूम निकालते समय सांपों का सामना भी करना पड़ता है, जिससे दुर्घटना की आशंका हमेशा बनी रहती है।
बारिश के साथ देशी मशरूम की मांग तेजी से बढ़ जाती है। स्थानीय बाजारों में इसकी सीमित उपलब्धता के कारण कीमतें ऊंची बनी रहती हैं। लोग इसे विशेष व्यंजन के रूप में पसंद करते हैं और कई परिवार पूरे साल बारिश के मौसम का इंतजार सिर्फ देशी मशरूम का स्वाद लेने के लिए करते हैं। यही वजह है कि बाजार में मशरूम पहुंचते ही इसकी खरीदारी तेज हो जाती है।
धमतरी और आसपास के वन क्षेत्रों में इन दिनों देशी मशरूम की आवक लगातार बढ़ रही है। ग्रामीण जंगलों से मशरूम एकत्र कर स्थानीय बाजारों तक पहुंचा रहे हैं, जबकि खरीदार भी ऊंची कीमत चुकाकर इसे खरीद रहे हैं। स्वाद, परंपरा और अच्छी कीमत के कारण देशी मशरूम का यह कारोबार बारिश के मौसम में ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त आय का महत्वपूर्ण स्रोत भी बन जाता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि मशरूम एकत्र करते समय ग्रामीणों को पूरी सावधानी बरतनी चाहिए, ताकि जहरीले सांपों और अन्य वन्य जीवों से होने वाली दुर्घटनाओं से बचा जा सके।