छत्तीसगढ़ में शिक्षक तबादलों पर कांग्रेस का आरोप, 2,461 स्कूलों में शिक्षकों की कमी पर उठाए सवाल

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने शिक्षक तबादलों और युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। कांग्रेस का आरोप है कि पिछले दो वर्षों में हुए 16,165 शिक्षक और प्राचार्य तबादलों में से केवल 3,512 पदस्थापनाएं एकल शिक्षकीय स्कूलों में की गईं, जबकि 2,461 स्कूलों में अब भी शिक्षकों की गंभीर कमी है। कांग्रेस ने नियमित शिक्षक भर्ती में देरी और तबादला प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर साय सरकार को घेरा है।

Oct 22, 2026 - 09:48
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छत्तीसगढ़ में शिक्षक तबादलों पर कांग्रेस का आरोप, 2,461 स्कूलों में शिक्षकों की कमी पर उठाए सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में शिक्षकों के तबादलों, नवीन पदस्थापनाओं और युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने साय सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय तबादला प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने शिक्षक स्थानांतरण और पदस्थापनाओं की प्रक्रिया की उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की बात करती है, लेकिन प्रदेश के अनेक सरकारी स्कूल अब भी शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं।

सुरेंद्र वर्मा के अनुसार, पिछले दो वर्षों में शिक्षकों और प्राचार्यों के कुल 16,165 तबादले हुए। इनमें से केवल 3,512 यानी लगभग 21.7 प्रतिशत पदस्थापनाएं एकल शिक्षकीय स्कूलों में की गईं। वहीं, शेष 12,653 यानी लगभग 78.3 प्रतिशत पदस्थापनाएं अन्य स्कूलों में हुईं। कांग्रेस ने इन आंकड़ों के आधार पर सवाल उठाया है कि जब प्रदेश में हजारों स्कूल शिक्षकों की कमी से प्रभावित हैं, तो तबादलों के दौरान उन स्कूलों को प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई, जहां शिक्षकों की सबसे अधिक आवश्यकता है।

कांग्रेस ने दावा किया कि प्रदेश में 2,461 स्कूल शिक्षकविहीन या एकल शिक्षकीय स्थिति में हैं। पार्टी का आरोप है कि कई ऐसे स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है, जबकि पर्याप्त शिक्षक वाले स्कूलों में भी नई पदस्थापनाएं की गईं। सुरेंद्र वर्मा ने आरोप लगाया कि युक्तियुक्तकरण के नाम पर पहले स्थानांतरित किए गए अनेक शिक्षकों का दोबारा तबादला बेहतर सुविधाओं वाले स्कूलों में किया गया। उन्होंने इन प्रक्रियाओं में कथित आर्थिक लेन-देन की जांच की मांग करते हुए कहा कि पूरे मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। ये आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं।

शिक्षक भर्ती के मुद्दे पर भी कांग्रेस ने सरकार को घेरा। सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने 57 हजार नियमित शिक्षकों की भर्ती का वादा किया था। उन्होंने तत्कालीन शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल और वित्त मंत्री ओपी चौधरी की ओर से अलग-अलग समय पर की गई भर्ती संबंधी घोषणाओं का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि अब तक पर्याप्त नियमित भर्तियां क्यों नहीं हो सकी हैं। कांग्रेस के अनुसार, सरकारी स्कूलों में हजारों पद खाली हैं और शिक्षकों के सेवानिवृत्त होने से यह समस्या लगातार बढ़ रही है।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि शिक्षकों की कमी का सबसे अधिक असर ग्रामीण, आदिवासी और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों पर पड़ रहा है। पार्टी ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी एवं हिंदी माध्यम स्कूल योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पर्याप्त शिक्षक और संसाधन उपलब्ध कराना जरूरी है।

सुरेंद्र वर्मा ने सवाल उठाया कि यदि तबादले और युक्तियुक्तकरण प्रशासनिक जरूरतों के आधार पर किए गए, तो शिक्षकों की कमी वाले स्कूलों को प्राथमिकता क्यों नहीं मिली। उन्होंने सरकार से नियमित शिक्षक भर्ती शुरू करने, रिक्त पद भरने और पिछले दो वर्षों में हुए तबादलों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। कांग्रेस ने कहा कि सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और जरूरत के अनुसार शिक्षकों की पदस्थापना आवश्यक है।