स्मार्ट मीटर और बिजली कटौती पर मनोज सिंह ठाकुर के सवाल, ₹1,285 करोड़ के खर्च का ब्योरा मांगते हुए विद्युत मंत्रालय में प्रथम अपील दायर
छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर से बढ़ते बिजली बिलों और अघोषित बिजली कटौती को लेकर हाईकोर्ट के अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने सरकार और बिजली वितरण कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, केंद्र सरकार की आरडीएसएस योजना के तहत छत्तीसगढ़ के लिए ₹8,126.02 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं, जबकि ₹1,285 करोड़ की राशि जारी और उपयोग किए जाने की जानकारी केंद्रीय विद्युत मंत्रालय से मिली है। खर्च का मदवार विवरण और उपयोगिता प्रमाण-पत्र नहीं मिलने पर उन्होंने मंत्रालय में प्रथम अपील दायर की है। ठाकुर ने उपभोक्ताओं को राहत नहीं मिलने पर बिलासपुर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करने की चेतावनी भी दी है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर से संबंधित बिजली बिलों और अघोषित बिजली कटौती के मुद्दे पर उच्च न्यायालय के अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने केंद्र सरकार, विद्युत मंत्रालय और बिजली वितरण व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि केंद्र सरकार की पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (RDSS) के तहत छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी (CSPDCL) के लिए हजारों करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, लेकिन उपभोक्ताओं को बिजली व्यवस्था में अपेक्षित सुधार का लाभ नहीं मिल रहा है।
आरडीएसएस योजना के तहत ₹8,126 करोड़ की स्वीकृति
मनोज सिंह ठाकुर के अनुसार, केंद्रीय विद्युत मंत्रालय से सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त पत्र क्रमांक 48/1/2021-UR&SI-I/E-255784, दिनांक 9 अक्टूबर 2026 में छत्तीसगढ़ के लिए आरडीएसएस योजना के तहत कुल ₹8,126.02 करोड़ की स्वीकृति का उल्लेख है। इसमें केंद्र सरकार का शुद्ध अनुदान ₹3,216.86 करोड़ बताया गया है। उनके अनुसार, मंत्रालय ने अब तक ₹1,285 करोड़ की राशि जारी और उपयोग किए जाने की जानकारी भी दी है।
ठाकुर का कहना है कि इतनी बड़ी राशि बिजली वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने, स्मार्ट मीटर लगाने और अधोसंरचना सुधारने के लिए निर्धारित होने के बावजूद उपभोक्ताओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने इस राशि के वास्तविक उपयोग और उससे हुए सुधारों का विस्तृत विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है।
खर्च का मदवार विवरण नहीं मिलने पर उठाए सवाल
अधिवक्ता के मुताबिक, उन्होंने आरटीआई आवेदन के माध्यम से स्मार्ट मीटरिंग, वितरण अधोसंरचना और परियोजना प्रबंधन एजेंसी (PMA) से संबंधित खर्च का मदवार ब्योरा तथा उपयोगिता प्रमाण-पत्र (UC) मांगा था। उनका आरोप है कि केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी ने निर्धारित जानकारी उपलब्ध कराने के बजाय आवेदन दूसरी एजेंसी आरईसी लिमिटेड को स्थानांतरित कर दिया। ठाकुर ने इस प्रक्रिया में विलंब और मांगी गई जानकारी नहीं मिलने पर आपत्ति जताई है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि राशि बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए खर्च की गई है, तो उसके उपयोग का विवरण और संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने में परेशानी क्यों हो रही है। हालांकि, खर्च में अनियमितता का कोई निष्कर्ष निकालने के लिए संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक जवाबों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
स्मार्ट मीटर और बिजली कटौती से उपभोक्ताओं की परेशानी
मनोज सिंह ठाकुर ने आरोप लगाया कि प्रदेश के कई बिजली उपभोक्ता स्मार्ट मीटर की रीडिंग, अधिक बिल और बार-बार बिजली कटौती की शिकायत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मेंटेनेंस के नाम पर बिजली बंद रहने से आम नागरिकों और कारोबारियों को भी परेशानी होती है। उन्होंने मांग की कि बिजली वितरण कंपनी शिकायतों का समाधान करे और उपभोक्ताओं को पारदर्शी बिलिंग व्यवस्था उपलब्ध कराए।
विद्युत मंत्रालय में प्रथम अपील, हाईकोर्ट जाने की चेतावनी
ठाकुर ने बताया कि आरटीआई के तहत जानकारी नहीं मिलने और आवेदन स्थानांतरित किए जाने के मामले में उन्होंने सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 19(1) के तहत विद्युत मंत्रालय के प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील दायर की है। उन्होंने ₹1,285 करोड़ के उपयोगिता प्रमाण-पत्रों, खर्च के मदवार विवरण और संबंधित संविदाकारों की सूची उपलब्ध कराने की मांग की है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्मार्ट मीटर से जुड़ी शिकायतों, अधिक बिजली बिलों और अघोषित कटौती की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे उपभोक्ताओं के हित में बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।