छत्तीसगढ़ में 5 लाख स्कूली बच्चों को चश्मा मिलने में देरी, टेंडर की शर्तों पर कांग्रेस ने उठाए सवाल

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सरकारी स्कूलों के बच्चों को निःशुल्क चश्मा वितरण में हो रही देरी को लेकर साय सरकार पर निशाना साधा है। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सत्यप्रकाश सिंह ने आरोप लगाया कि टेंडर की शर्तों में बदलाव के कारण स्थानीय सप्लायर प्रक्रिया से बाहर हो गए हैं और करीब 5 लाख बच्चों को चश्मा मिलने में देरी हो रही है। कांग्रेस ने सरकार से टेंडर प्रक्रिया में सुधार कर बच्चों को समय पर चश्मा उपलब्ध कराने की मांग की है।

Oct 22, 2026 - 09:45
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छत्तीसगढ़ में 5 लाख स्कूली बच्चों को चश्मा मिलने में देरी, टेंडर की शर्तों पर कांग्रेस ने उठाए सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में सरकारी स्कूलों के बच्चों को निःशुल्क चश्मा उपलब्ध कराने की योजना को लेकर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए हैं। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सत्यप्रकाश सिंह ने आरोप लगाया कि टेंडर की शर्तों में बदलाव के कारण चश्मा वितरण की प्रक्रिया बाधित हो रही है। कांग्रेस का दावा है कि इसके चलते प्रदेश के करीब 5 लाख बच्चों को समय पर चश्मा नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका है।

सत्यप्रकाश सिंह ने कहा कि सरकारी स्कूलों के बच्चों की आंखों की जांच कराने और दृष्टि संबंधी समस्याओं से जूझ रहे विद्यार्थियों को समय पर चश्मा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। लेकिन टेंडर प्रक्रिया में किए गए बदलावों के कारण स्थानीय चश्मा सप्लायरों को बाहर कर दिया गया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार की मौजूदा व्यवस्था से प्रतिस्पर्धा सीमित हो गई है, जिसका सीधा असर चश्मा वितरण की गति पर पड़ रहा है।

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता के अनुसार, टेंडर की नई शर्तों में जेम पोर्टल के क्वाड्रेंट-2 में पंजीकृत कंपनियों को ही भाग लेने की पात्रता दी गई है। कांग्रेस का कहना है कि पहले क्वाड्रेंट-3 में पंजीकृत कंपनियां भी टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा ले सकती थीं, लेकिन इस वर्ष नियमों में बदलाव कर दिया गया। पार्टी का आरोप है कि इस बदलाव के कारण छत्तीसगढ़ के स्थानीय सप्लायरों के लिए भागीदारी के अवसर सीमित हो गए हैं।

सत्यप्रकाश सिंह ने दावा किया कि टेंडर में बदलाव के बाद देशभर की अनेक कंपनियों के बजाय केवल चार चश्मा निर्माता कंपनियां ही प्रक्रिया में भाग लेने के योग्य रह गई हैं। कांग्रेस के मुताबिक, इससे प्रतिस्पर्धा कम हुई है और आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हुई है। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार चुनिंदा कंपनियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, ये आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि पहले स्थानीय चश्मा आपूर्ति व्यवस्था के माध्यम से भी बच्चों को चश्मे उपलब्ध कराए जाते थे। इस वर्ष टेंडर प्रक्रिया में बदलाव के कारण शिक्षा सत्र का काफी समय बीत जाने के बाद भी बच्चों को चश्मे नहीं मिल पाने की स्थिति चिंताजनक है। जिन विद्यार्थियों को देखने में परेशानी होती है, उन्हें किताबों के अक्षर पढ़ने, कक्षा में पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने और शैक्षणिक गतिविधियों में भाग लेने में कठिनाई हो सकती है।

कांग्रेस ने कहा कि बच्चों की आंखों की रोशनी और शिक्षा से जुड़ा यह विषय संवेदनशील है। ऐसे मामलों में सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिससे पर्याप्त संख्या में आपूर्तिकर्ता भाग ले सकें और विद्यार्थियों को आवश्यक सुविधाएं समय पर मिल सकें। पार्टी ने टेंडर की शर्तों की समीक्षा करने और स्थानीय व्यापारियों को भी उचित अवसर देने की मांग की है।

सत्यप्रकाश सिंह ने साय सरकार से आग्रह किया कि बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य को प्राथमिकता देते हुए चश्मा वितरण की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक और खरीद प्रक्रिया से जुड़ी बाधाओं का समाधान कर पात्र विद्यार्थियों तक जल्द से जल्द चश्मे पहुंचाए जाने चाहिए, ताकि दृष्टि संबंधी समस्याओं के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।