छत्तीसगढ़ के स्कूलों में लगेगा शुगर-कैलोरी बोर्ड, जंक फूड और मीठे पेय पर रोकथाम की पहल

छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बच्चों में बढ़ते मोटापा और मधुमेह के खतरे को देखते हुए सरकारी और निजी स्कूलों सहित आवासीय संस्थाओं में शुगर एवं कैलोरी जागरूकता बोर्ड लगाने की अनुशंसा की है। बोर्ड पर खाद्य पदार्थों में मौजूद शक्कर, नमक और कैलोरी की मात्रा को सरल तरीके से प्रदर्शित किया जाएगा। आयोग ने जंक फूड की बिक्री नियंत्रित करने, स्थानीय पौष्टिक आहार को बढ़ावा देने और बच्चों व पालकों में खान-पान को लेकर व्यवहार परिवर्तन की दिशा में जागरूकता बढ़ाने की भी अनुशंसा की है।

Oct 6, 2026 - 13:08
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छत्तीसगढ़ के स्कूलों में लगेगा शुगर-कैलोरी बोर्ड, जंक फूड और मीठे पेय पर रोकथाम की पहल

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बच्चों में बढ़ते मोटापा और मधुमेह के खतरे को देखते हुए राज्य के सभी शासकीय एवं निजी विद्यालयों तथा आवासीय संस्थाओं में शुगर एवं कैलोरी जागरूकता बोर्ड स्थापित करने की अनुशंसा की है। आयोग का उद्देश्य बच्चों को उनके द्वारा सेवन किए जाने वाले खाद्य पदार्थों में मौजूद शक्कर, नमक और कैलोरी की मात्रा के प्रति जागरूक करना तथा स्वस्थ खान-पान को बढ़ावा देना है।

आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि बच्चों में जंक फूड, मीठे पेय पदार्थ और पैकेटबंद खाद्य पदार्थों के बढ़ते सेवन को नियंत्रित करने के लिए केवल जानकारी देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पालकों और बच्चों के व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाने की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से स्कूलों में ऐसे जागरूकता बोर्ड लगाने की अनुशंसा की गई है, जिनके माध्यम से पोषण संबंधी जानकारी बच्चों को सरल और दृश्य माध्यम से उपलब्ध कराई जा सके।

प्रस्तावित शुगर एवं कैलोरी बोर्ड में विभिन्न खाद्य पदार्थों में मौजूद शक्कर, नमक और कैलोरी की मात्रा को आसानी से समझ आने वाले तरीके से प्रदर्शित किया जाएगा। इसके साथ ही लाल, पीला और हरा ट्रैफिक लाइट सिस्टम इस्तेमाल करने का सुझाव दिया गया है। इस व्यवस्था के माध्यम से बच्चों को यह समझने में मदद मिलेगी कि कौन से खाद्य पदार्थ सीमित मात्रा में या कभी-कभार सेवन करने योग्य हैं और कौन से खाद्य पदार्थ स्वस्थ विकल्प के रूप में अपनाए जा सकते हैं।

आयोग ने राज्य के सभी शासकीय एवं निजी विद्यालयों के साथ-साथ आवासीय आश्रम शालाओं और छात्रावासों में शुगर एवं कैलोरी जागरूकता बोर्ड लगाने की अनुशंसा की है। इसके साथ ही स्कूल परिसर में जंक फूड की बिक्री पर नियंत्रण, पौष्टिक एवं स्थानीय खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने, ईट राइट क्लब और छात्र स्वास्थ्य एंबेसडर बनाने तथा प्रार्थना सभा के दौरान पोषण संबंधी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव दिया गया है।

आश्रम शालाओं, पोटा केबिन, प्रयास एवं एकलव्य विद्यालयों को लेकर भी आयोग ने विशेष सुझाव दिए हैं। यहां भोजन सारणी के साथ शुगर एवं कैलोरी बोर्ड लगाने और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य बच्चों को संतुलित भोजन के महत्व की जानकारी देना और उनके दैनिक खान-पान में बेहतर विकल्पों को शामिल करने के लिए प्रेरित करना है।

आयोग ने पालकों और शिक्षकों की बैठकों में भी पोषण एवं संतुलित आहार पर चर्चा करने की अनुशंसा की है। पालकों को बच्चों के स्वस्थ खान-पान के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ बेहतर प्रयास करने वाले पालकों को प्रोत्साहित करने की व्यवस्था विकसित करने का सुझाव दिया गया है। आयोग का मानना है कि बच्चों के खान-पान में स्थायी बदलाव के लिए स्कूल के साथ परिवार की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।

बाल आयोग ने संबंधित विभागों को इन अनुशंसाओं के संबंध में आवश्यक कार्यवाही करते हुए आयोग को अवगत कराने के लिए कहा है। यदि इन सुझावों को प्रभावी रूप से लागू किया जाता है तो स्कूलों में बच्चों के बीच पोषण, शक्कर और कैलोरी को लेकर जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ जंक फूड के अत्यधिक सेवन को नियंत्रित करने और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।